ऑउटसोर्स मज़दूरों के लिए बन रही पॉलिसी से वंचित रहेंगे जलशक्ति विभाग के मज़दूर

 

वर्तमान में कार्यरत मज़दूरों को विभाग ने नहीं दिया है पूर्ण मज़दूर का दर्जा

(सरकाघाट)रितेश चौहान

धर्मपुर जलशक्ति मण्डल के अंतर्गत प्रदेश में सबसे अधिक 962 मजदूरों की भर्ती पिछले चार वर्षों में हुई है।जिनमे 484 जलरक्षकों 269 पैरा पम्प ऑपरेटर 124 पैरा फिटर और 85 मल्टी पर्पज वर्कर नियुक्त किए गए हैं।जिनमें से 727 मज़दूर ग्राम पंचायतों के माध्यम से और 115 मज़दूर शिमला क्लिंनवेज कम्पनी के माध्य्म से रखे गए हैं।लेक़िन इन सभी मज़दूरों को सरकार व विभाग ने बड़ी चालाकी से आठ घंटे के बजाये छह घण्टे के लिए नियुक्त किया है और उन्हें पारा वर्कर का दर्जा दिया गया है जिन्हें निर्धारित तीन सौ रुपये दिहाड़ी न देकर एक सौ से डेढ़ सौ रुपये दैनिक मज़दूरी दी जाती है।इस प्रकार धर्मपुर में जलशक्ति विभाग में लगाये गए लगभग एक हज़ार मज़दूरों का भविष्य अंधकार में है। कियूंकि इनके लिए सरकार की कोई पाल्सी नहीं बना रही है और जो पालसी बन भी रही है वो आठ घंटे काम करने वाले ऑउटसोर्सिंग मजदूरों के लिए है।मज़दूर संगठन सीटू के जिला अध्यक्ष व पूर्व ज़िला पार्षद भूपेंद्र सिंह ने बताया कि जलशक्ति विभाग इन मज़दूरों की नियुक्तियों के बारे में भी सही सूचना इन मजदूरों व पंचायतों को नहीं दे रहा है।विभाग द्धारा रखे गए इन मज़दूरों को कभी आउटसोर्सिंग कंपनी तो कभी ग्राम पंचायतों के माध्य्म से नियुक्त होने की बात कही जाती है।बहुत से मजदूरों को महीने के अंत में पँचयतों से कार्य करने का प्रमाण पत्र लेने के लिए कहा जाता है तो वहीं दूसरी तरफ पँचायतों को उनके दैनिक कार्यों की जानकारी न होते हुए भी प्रमाण पत्र देना पड़ता है।उन्होंने बताया कि बहुत से पँचायत प्रधान असमंजस में हैं कि वे किस आधार पर इन मजदूरों को डियूटी सर्टिफिकेट जारी करें जबकि वे उनकी न तो हाज़री लगाते हैं और न ही काम करवाते हैं।लेक़िन राजनैतिक दबाब के चलते वे इसका विरोध नहीं कर पा रहे हैं।भूपेंद्र सिंह ने कहा कि नियमानुसार इन सब मजदूरों की हाज़री दैनिक आधार परविभागीय रजिस्टर पर लगनी चाहिए और उसी के आधार पर उन्हें वेतन जारी होना चाहिए।लेक़िन जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह के नेतृत्व वाले इस विभाग ने बड़ी चालाकी से इन मजदूरों को नियुक्त किया है जो काम तो विभागीय अधिकारियों के दिशा निर्देश पर करते हैं लेकिन डियूटी प्रमाण पत्र पंचायतों से जारी करवा कर इन्हें पँचायत के अधीन दर्शाया गया है ताकि ये रैगुलर न हो सकें।प्रदेश सरकार ऑउटसोर्स मजदूरों के लिए नीति बनाने की बात कर रही है जिसके लिए जलशक्ति मंत्री की अध्यक्षता में कमेटी भी बनी हुई है। लेकिन जब तक जलशक्ति विभाग में लगाये गए हज़ारों मज़दूर पूर्ण मज़दूर की श्रेणी में नहीं आते हैं तब तक वे इस पालसी से बाहर ही रहेंगे। कियूंकि इनकी डियूटी कागज़ों में छह घण्टे ही दर्शायी गयी है और इन्हें पार्ट टाइम मज़दूर कहा गया है।इसलिये अगर सरकार ऑउटसोर्सिंग मजदूरों के लिए कोई नीति बनाती भी है तो जलशक्ति विभाग के ये पार्ट टाइम मज़दूर उससे वंचित रह जाएंगे।इसी कारण इन मजदूरों को सरकार द्धारा निर्धारित तीन सौ रुपये दिहाड़ी भी नहीं मिल रही है और इन्हें एक सौ से पौने दो सौ रुपये दिहाड़ी ही मिलती है।इस प्रकार जलशक्ति विभाग ने प्रदेश के हज़ारों युवाओं के साथ रोज़गार के नाम पर भद्दा मजाक किया है और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।मज़दूर संगठन सीटू के ज़िला प्रधान ने सरकार से मांग की है कि इन सभी मजदूरों को पूर्ण मज़दूर का दर्जा दिया जाए और उन्हें सरकार द्धारा निर्धारित 350 रु दिहाड़ी और 10500 रु मासिक वेतन दिया जाये।सभी मजदूरों को विभाग के अंतर्गत लाया जाये और उनकी हाज़री विभागीय कर्मचारियों के माध्यम से लगाई जाए और सत्यापित कर्यवाई जाये।सभी मजदूरों को नियुक्ति पत्र जारी किए जाएं और पहचान पत्र भी जारी किए जाएं।मजदूरों को हर माह की 7 तारीख तक वेतन जारी किया जाए और भविष्य निधि फण्ड का नम्बर दिये जायें।भूपेंद्र सिंह ने बताया कि उनका संगठन जलशक्ति विभाग में कार्यरत आउटसोर्स मजदूरों व कर्मचारियों को उनके भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ और शोषण के ख़िलाफ़ एकजुट होकर संगठित होने की अपील करता है जिसमें सीटू उनकी पूरी मदद करेगा।

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