आउटसोर्स वालों के लिए नीति बनाने वाले मंत्री के विभाग में सबसे ज्यादा शोषित हैं मज़दूर

 

जल शक्ति विभाग में रखे जा रहे हैं सौ रुपये दिहाड़ी पर मज़दूर

सीटू यूनियन ने सभी मजदूरों को सरकार द्धारा निर्धारित 300 रु दिहाड़ी और रैगुलर करने की नीति बनाने की उठाई माँग

(सरकाघाट )रितेश चौहान

जलशक्ति विभाग में आउटसोर्सिंग और विभाग द्धारा स्वयं रखे जा रहे मजदूरों को हिमाचल प्रदेश में सबसे कम मासिक वेतन दिया जा रहा है।जिसके चलते हज़ारों युवाओं व युवतियों का शोषण किया जा रहा है।ये बात मज़दूर संगठन सीटू के ज़िला प्रधान औऱ पूर्व जिला परिषद सदस्य ने कही।उन्होंने ने बताया कि जलशक्ति विभाग में आजकल मल्टी परपज़ वर्करों को तीन हज़ार रुपये मासिक अर्थात सौ रुपये दैनिक मज़दूरी पर भर्ती किया जा रहा है।इसके अलावा जलरक्षकों को मात्र एक सौ बीस रुपये दिहाड़ी अर्थात तीन हज़ार छह सौ रुपये मासिक वेतन दिया जा रहा है। पारा पंप  ऑपरेटरों और पारा फ़िटरों को 4600 मासिक औऱ 153 रु दैनिक दिया जा रहा है। इस प्रकार जलशक्ति विभाग द्धारा अकुशल औऱ कुशल मजदूरों का सबसे ज्यादा शोषण  हिमाचल प्रदेश में किया जा रहा है।इन मजदूरों को सरकार की न्यूनतम दिहाड़ी तीन सौ भी नहीं दी जा रही है।जबकि दूसरे विभागों में जो आउटसोर्स वर्कर और कर्मचारी नियुक्त हुए हैं उन्हें सरकार द्धारा निर्धारित तीन सौ रुपये दैनिक मज़दूरी अदा हो रही है।भूपेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले चार वर्षों में धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र में ही सैंकड़ों मज़दूर रखे गए हैं लेक़िन इन मजदूरों को इस विभाग के मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर द्धारा बनाई गई नीति के तहत ही इतना कम वेतन मिल रहा है।दूसरी तरफ इन मजदूरों को छह छह महीने तक कम्पनी वेतन जारी नहीं करती है।उन्होंने कहा कि अब इन्हीं जलशक्ति मंत्री को प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बनने वाली पालसी की मंत्रिमण्डलीय उप समिति का अध्यक्ष बनाया गया है जबकि उन्हीं ने सौ रुपये दिहाड़ी पर अपने विभाग में मज़दूर भर्ती करने की नीति बनाई है तो उनसे इन मजदूरों को न्याय मिलने की उम्मीद कम ही है। जलशक्ति मंत्री अपने विभाग में ही सबसे कम दिहाड़ी पर भर्तियां कर रहे हैं औऱ मजदूरों का शोषण कर रहे हैं।

सीटू के ज़िला प्रधान ने मांग की हैकि सभी विभागों कार्यरत कर्मचारियों व मजदूरों को सरकार द्धारा निर्धारित तीन सौ रु न्यूनतम मजदूरी अनिवार्य तौर पर मिलनी चाहिए।उन्होंने कहा कि जलशक्ति विभाग में जो भी टेंडर किये गए हैं उन्हें संशोधित किया जाये और सभी मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी अदा करने के नियम को लागू किया जाये।उन्होंने जलशक्ति मंत्री पर यह आरोप भी लगाया कि उन्होंने बड़ी चालाकी से कागजों में इन मजदूरों की डियूटी का समय छह घण्टे दर्शाया है ताकि वे उनके फ़ैसले को न्यायालय में चुनौती न दे सकें। लेकिन हक़ीक़त में इन पार्ट टाइम मजदूरों से विभाग पूरा दिन काम लेता है।सीटू ने सवाल खड़े किए हैं कि वर्तमान पालसी के तहत सौ रुपये से कौन मज़दूर अपना औऱ अपने परिवार का गुजारा कर सकता है।।इसलिए उन्होंने मांग की है कि इन सभी मजदूरों को न्यूनतम वेतन अदा किया जाये।उन्होंने ये भी आह्वान किया है कि वे इन सभी मजदूरों को उनके साथ हो रहे भेदभाव औऱ शोषण के ख़िलाफ़ यूनियन बना कर उन्हें जल्दी ही लामबंद करेंगे और ज़रूरत पड़ी तो संघर्ष का रास्ता भी अपनाएंगे।सीटू ने ये भी मांग की है कि सभी आउटसोर्स मजदूरों के लिए जल्दी पालसी बनाई जाए और इन सबको कंट्रेक्ट पर लाया जाए और फ़िर उन्हें रैगुलर किया जाये।

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