मंडी

करसोग में करवाचौथ पर एकत्रित हुई महिलाएं

 

स्वतंत्र हिमाचल (चुराग) राज ठाकुर

करवा-चौथ कार्तिक पक्ष की चंद्रोदयव्यापिनी तिथी में मनाया जाता है।यह स्त्रियों का मुख्य त्योहार है।सौभाग्यवती स्त्रियां अपने पति की रक्षा के लिए यह व्रत करती हैं।रात्रि में शिव,चंद्रमा,स्वामी कार्तिकेय आदि के चित्रों एवं सुहाग की वस्तुओं की पूजा करती हैं।

 

सुकेत की ऐतिहासिक नगरी पांगणा मे महिलाओं ने आस-पड़ोस की महिलाओं के छोटे-छोटे समूह बनाकर करवा-चौथ की व्रत कथा का श्रवण कर स्वंय को धन्य किया।चंद्र दर्शन के बाद अर्घ्या देकर पति दर्शन कर प्रभु से पति व परिजनों की दीर्घायु की कामना कर सासु माँ को वस्त्र व राशि प्रदान कर आशीर्वाद प्राप्त किया।इस अवसर पर महिलाओं ने परस्पर मिट्टी के करवो का आदान प्रदान भी किया।पांडवों के संकट को टालने के लिए भगवान श्री कृष्णा के कहने पर द्रौपदी ने करवा-चौथ का यह व्रत किया था।अंततः पांडव विजयी हुए थे।सौभाग्य, पुत्र-पौत्रदि और धन-धान्यों के इच्छुक महिलाओं को यह व्रत विधि पूर्वक करना चाहिए।

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