सेब पर मौसम की मार

कम फसल होने से बागवान परेशान

(सैंज) प्रेम सागर चौधरी

मौसम की मार की वजह से हिमाचल में इस साल सेब की फसल बहुत कमजोर है। जुलाई महीने से सेब सीजन शुरू होने वाला है। राज्य में सेब की कमजोर फसल होने से सेब बागवान परेशानी में हैं। शिमला, किन्नौर, कुल्लू और चंबा आदि जिलों के कई क्षेत्रों में इस बार 50 से 70 फीसदी तक फसल कम है।

माना जा रहा है कि ऐसे हालात में राज्य में सेब की दो करोड़ पेटियां भी नहीं हो पाएंगी। राज्य बागव सेब उत्पादन क्षे पहुंच पाएगा 50 से 70 प्रतिशत
ऐसे हालात में राज्य में सेब की दो करोड़ पेटियां भी नहीं हो पाएंगी। राज्य बागवानी विभाग इसका आकलन मे लगा है कि इस बार सेब की फसल की क्या स्थिति है।

शिमला में एक करोड़ पेटी तक नहीं पहुंचेगा उत्पादन

जिला शिमला में इस बार सेब सीजन एक करोड़ पेटी से भी कम में सिमट जाएगा। बीते साल जिले में कम फसल के बावजूद एक करोड़ 25 लाख सेब पेटी का उत्पादन हुआ था। इस बार सेब उत्पादन में एक चौथाई की गिरावट का आकलन किया गया है। जून में सेब ड्रॉपिंग के बाद इन आंकड़ों में और गिरावट आएगी।

बागवानों पर बीते कई सालों से मौसम की मार पड़ रही है। फ्लावरिंग के दौरान मौसम में भारी बदलाव पाया गया है। तापमान का उतार-चढ़ाव इसका मुख्य कारण माना जा रहा है। इसके साथ सर्दियों में जिले में बर्फबारी न होना भी इस साल कम पैदावार का कारण रहा है। सेब उत्पादन क्षेत्रों में भारी ओलावृष्टि से भी उत्पादन में गिरावट आई है।

कुल्लू में 40 लाख पेटियों से भी कम पैदावार के आसार

बागवानी के लिए मशहूर कुल्लू घाटी के बागवानों को लगातार दूसरी साल ओलावृष्टि, अंधड़ और चिलिंग ऑवर्स पूरे न होने का खामियाजा भुगतना पड़ा है। इस बार भी गत साल के मुकाबले सेब की पैदावार में कमी होने की आशंका है। जिले में आमतौर पर एक करोड़ सेब पेटियों का उत्पादन होता है।

पिछले साल कुल्लू में करीब 45 लाख सेब पेटियों का उत्पादन हुआ। इस साल उत्पादन 40 लाख पेटियों से भी कम रहने का अनुमान है। जून महीने में होने वाली ड्रॉपिंग सूखे के कारण बागवानों की परेशानी बढ़ा सकती है। जून के बाद विभाग अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगा।

किन्नौर में 20 लाख से कम पेटियां हो पाएंगी

किन्नौर जिले की नकदी फसल सेब इस बार मंडियों में कम ही पहुंच पाएगा। पिछले कुछ साल के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो किन्नौर में हर वर्ष किसी न किसी कारण से हर साल सेब की पैदावार कम होती जा रही है। जिले में हर साल कम हो रही सेब पैदावार भी बागवानों के लिए भी चिंता का विषय है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2020 में 25 लाख 99 हजार 190 पेटियां देश की विभिन्न मंडियों में पहुंचीं। इस वर्ष यह पैदावार उद्यान विभाग के आंकड़ों के हिसाब से घटकर 20 लाख में सिमट सकती है।

चंबा में 50 से 70 फीसदी तक कम होगा उत्पादन

जिले में इस बार सेब उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में करीब 50 से 70 प्रतिशत कम रहेगा। पैदावार कम होने का कारण फ्लावरिंग के दौरान मौसम का अनुकूल न रहना है। जिले में करीब दस हजार हेक्टेयर भूमि में सेब का उद्यान होता है।

उपमंडल भरमौर में सबसे ज्यादा सेब की पैदावार होती है। इस बार पैदावार पिछले साल की तुलता में कम होगी। इस बार खासकर फ्लावरिंग के दौरान मौसम सेब की पैदावार के अनुकूल नहीं रहा है। इसके चलते पचास से 70 प्रतिशत पैदावार कम होगी।

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