हिमाचल प्रदेश सरकार पशुपालन विभाग कर्मचारियों की समस्याओं व मांगो को गंभीरता से ले अन्यथा प्रदेश के वेटरनरी फार्मासिस्ट संघर्ष के लिए रहे तैयार : दिनेश नेगी

पशुपालन विभाग मे दिए मोबाइल टेब कि हो विजिलेंस जांच: हरीश ठाकुर

(नालागढ़)सतनाम सैनी

पशु पालन विभाग कर्मचारी महासंघ हिमाचल प्रदेश के वेटरनरी फार्मासिस्ट ने सरकार व पशुपालन विभाग को आगाह किया है कि वह कर्मचारी की समस्याओं को गंभीरता से लें अन्यथा कर्मचारियों को सड़कों पर उतरना पड़ेगा जिसकी जिम्मेवारी विभाग व सरकार की होगी। पशुपालन विभाग कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष दिनेश नेगी ने प्रेस के माध्यम से सरकार व विभाग को चेताया है कि फील्ड में लगे वेटरनरी फार्मासिस्ट, कर्मचारियों की समस्याओं को सुना जाए।

नेगी ने कहा है कि सरकार की जितने भी स्कीमें पशुपालकों को पहुंचाई जाती है उसमें अहम भूमिका वेटरनरी फार्मासिस्ट की होती है जिसमें कृत्रिम गर्भाधान करना, पशुओं का कान में टैग लगाना जिस से पशु मालिक की पहचान व उस टैग नंबर को आधार कार्ड से लिंक करना, बीमारियों का टीकाकरण जैसे मुंह खुर, गलघोंटू, भेड बकरियों में पी पी आर टीकाकरण, बंध्याकरण , घर द्वार तक पशुओं का इलाज करना व पशुपालकों के कृषि कार्ड बनाना व पशुपालन विभाग की गतिविधियों को पूर्ण रूप से पशु पालकों तक पहुंचाना और उसे पूरा करना, हिमाचल प्रदेश के वेटरनरी फार्मासिस्ट कर रहे हैं । परंतु बड़े अफसोस की बात है हिमाचल सरकार वेटरनरी फार्मासिस्ट कर्मचारियों को सरकारी सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवा रही है।पशु गणना में दिए टैब खराब व घटिया क्वालिटी के खरीदे गए है व कार्य करने के लिए नेट कनेक्टिविटी ,सिम कार्ड भी नहीं दी है ।

अधिकारियों द्वारा वेटरनरी फार्मासिस्ट को अपने निजी फोन से सरकारी ऐप डाउनलोड करने के लिए बाध्य किए जा रहा है ।जिसमें कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है सरकार ने कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं किया तो जल्द ही संघ को संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ेगा इसकी जिम्मेवारी विभाग व सरकार की होगी । महासंघ ने कई बार हिमाचल सरकार , पशु पालन मंत्री वीरेन्द्र कंवर, निदेशक पशु पालन विभाग को प्रेस के माध्यम से लिखित/मौखिक तौर पर कई बार अवगत कराया गया । संघ ने कहा है कि कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है ओर वेटनरी फार्मासिस्ट से सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। संघ ने हिमाचल प्रदेश के सभी कर्मचारियों से आग्रह किया है कि अपने निजी मोबाइलों से सरकारी कार्य तब तक ना करें जब तक हिमाचल सरकार या पशु पालन विभाग मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई तो जल्द ही कर्मचारियों संघर्ष का रास्ता अपनाने के लिए तैयार रहें। जिसकी जल्दी संघर्ष के लिए रणनीति बनाई जा रही है।

संघ ने कहा है कि पशु गणना में दिए मोबाइल टेबलेट की विजिलेंस जांच होनी चाहिए ताकि जिन अधिकारियों ने मोबाइल टैब खरीदने में गोलमाल किया है ,सरकार उच्च स्तरीय जांच कराएं।फार्मासिस्ट संघर्ष के लिए सड़कों पर उतर आएंगे जिसकी जिम्मेवारी सरकार व विभाग की होगी: दिनेश नेगी

पशु पालन विभाग कर्मचारी महासंघ हिमाचल प्रदेश के वेटरनरी फार्मासिस्ट ने सरकार व पशुपालन विभाग को आगाह किया है कि वह कर्मचारी की समस्याओं को गंभीरता से लें अन्यथा कर्मचारियों को सड़कों पर उतरना पड़ेगा जिसकी जिम्मेवारी विभाग व सरकार की होगी। पशुपालन विभाग कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष दिनेश नेगी ने प्रेस के माध्यम से सरकार व विभाग को चेताया है कि फील्ड में लगे वेटरनरी फार्मासिस्ट, कर्मचारियों की समस्याओं को सुना जाए। नेगी ने कहा है कि सरकार की जितने भी स्कीमें पशुपालकों को पहुंचाई जाती है उसमें अहम भूमिका वेटरनरी फार्मासिस्ट की होती है जिसमें कृत्रिम गर्भाधान करना, पशुओं का कान में टैग लगाना जिस से पशु मालिक की पहचान व उस टैग नंबर को आधार कार्ड से लिंक करना, बीमारियों का टीकाकरण जैसे मुंह खुर, गलघोंटू, भेड बकरियों में पी पी आर टीकाकरण, बंध्याकरण , घर द्वार तक पशुओं का इलाज करना व पशुपालकों के कृषि कार्ड बनाना व पशुपालन विभाग की गतिविधियों को पूर्ण रूप से पशु पालकों तक पहुंचाना और उसे पूरा करना, हिमाचल प्रदेश के वेटरनरी फार्मासिस्ट कर रहे हैं । परंतु बड़े अफसोस की बात है हिमाचल सरकार वेटरनरी फार्मासिस्ट कर्मचारियों को सरकारी सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवा रही है।पशु गणना में दिए टैब खराब व घटिया क्वालिटी के खरीदे गए है व कार्य करने के लिए नेट कनेक्टिविटी ,सिम कार्ड भी नहीं दी है ।
अधिकारियों द्वारा वेटरनरी फार्मासिस्ट को अपने निजी फोन से सरकारी ऐप डाउनलोड करने के लिए बाध्य किए जा रहा है ।जिसमें कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है सरकार ने कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं किया तो जल्द ही संघ को संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ेगा इसकी जिम्मेवारी विभाग व सरकार की होगी । महासंघ ने कई बार हिमाचल सरकार , पशु पालन मंत्री वीरेन्द्र कंवर, निदेशक पशु पालन विभाग को प्रेस के माध्यम से लिखित/मौखिक तौर पर कई बार अवगत कराया गया । संघ ने कहा है कि कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है ओर वेटनरी फार्मासिस्ट से सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। संघ ने हिमाचल प्रदेश के सभी कर्मचारियों से आग्रह किया है कि अपने निजी मोबाइल से सरकारी कार्य तब तक ना करें जब तक हिमाचल सरकार या पशु पालन विभाग मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई तो जल्द ही कर्मचारियों संघर्ष का रास्ता अपनाने के लिए तैयार रहें। जिसकी जल्दी संघर्ष के लिए रणनीति बनाई जा रही है।
संघ ने कहा है कि पशु गणना में दिए मोबाइल टेबलेट की विजिलेंस जांच होनी चाहिए ताकि जिन अधिकारियों ने मोबाइल टैब खरीदने में गोलमाल किया है ,सरकार उच्च स्तरीय जांच कराएं।

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