मंडी

भाषा कला संस्कृति विभाग मंडी द्वारा 8 मार्च को पांगणा में होगा पारंपरिक लोकगाथा का आयोजन

ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण पर मंथन का भी किया जाएगा आयोजन

 

 

स्वतंत्र हिमाचल (चुराग)राज ठाकुर

पांगणा मण्डी जिला ही नहीं अपितु हिमाचल प्रदेश का प्रसिद्ध गांव है।यहां के उप-गांव बाग में गुग्गा गाथाओं का मौखिक भंडार है। इसी गांव के परस राम भुट्टा और कलीराम दोघरी एवम उनके साथी कलाकार पीढ़ी दर पीढ़ी श्रवण गाथा गायन करते आ रहे हैं। भाषा विभाग मंडी जिला अधिकारी रेवती सैनी लंबे समय से संस्कृति व कला के संरक्षण प्रयास कर रही हैं। जब उनको इस गाथा का पता चला तो इसके संरक्षण लिए वह आगे आई। भाषा विभाग मंडी द्वारा 8 मार्च 2021 को ऐतिहासिक नगरी पांगणा के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में इस गाथा का आयोजन किया जा रहा है।
इस आयोजन में इतिहासकार और एवम् शिक्षा विभाग हिमाचल में प्रधानाचार्य डाक्टर हिमेन्द्र बाली,सेवानिवृत उप-मण्डलाअधिकारी(ना) डाक्टर किशोरीलाल शर्मा,शोद्धार्थी गगनदीप,संस्कृति मर्मज्ञ डा. जगदीश शर्मा वक्ता होंगे।विशेष अतिथि के तौर पर जिला भाषा अधिकारी रेवती सैनी शिरकत करेंगी।कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला परिषद सदस्य चेतन गुलेरिया,सह-अध्यक्ष बंसीलाल कौंडल और पांगणा पंचायत के प्रधान बसंत लाल चौहान होंगे।


भाषा,कला और संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का संयोजन व्यापार मंडल पांगणा तथा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पांगणा के प्रधानाचार्य संजय कुमार के सक्रिय सहयोग से किया जा रहा है।ग्राम पंचायत पांगणा के उप-प्रधान सुरेश शर्मा व सभी सदस्य, प्राध्यापक ललित ठाकुर व अन्य अध्यापक ,पंचायत समिति सदस्य पांगणा चरण दास,पंचायत समिति सदस्य सोरता नरेश चौहान,सेवानिवृत कर्मचारी संघ पांगणा के अध्यक्ष धर्म प्रकाश शर्मा,सेवानिवृत अधिषाशी अभियंता के डी चौहान,साहित्यकार सुरभित बाली रैना,अध्यापक किशोरीलाल शर्मा,सुकेत की पारंपरिक लोक गायिका विमला चौहान सहित साहित्य व पुरातत्व प्रेमी तथा स्थानीय वासी कार्यक्रम में भाग लेंगे।
डा. जगदीश शर्मा और कार्यक्रम के स्थानीय संयोजक व्यापार मंडल पांगणा के प्रधान सुमित गुप्ता ने कहा कि सिया,ऐंचली,जति,हणु,माड़,नैहरी कुल्ह जैसे अनेक गीतों के साथ भारतीयता से ऊबकर पश्चिमी सभ्यता की चकाचौंध में बूढ़े माता-पिता को वृद्धाश्रम में धकेलते दिग्भ्रांत समाज की दिशा बदलने के लिए वास्तबारा(श्रवण गाथा) का शिक्षाप्रद गाथा गायन सदियों से चली आ रही “माता तीर्थ पिता तीर्थ”की बहुत ही अनूठी संस्कार सम्मपन्न परम्परा का आलोक फैलाता ज्योति पुञ्ज है।लेकिन कितने शर्म की बात है कि आज इस गाथा का गायन पांगणा के किसी भी घर के आंगन में नहीं हुआ।चलचित्र रूपी जहर से आज हमारी संस्कृति बिखरती जा रही है।प्रतिष्ठा है तो पाश्चात्य रहन-सहन,पहनावे,पाश्चात्य गीतों व पाश्चात्य मूल्यों की। यही कारण है कि हमारी गौरवपूर्ण लोक संस्कृति का क्षय हो रहा है।
अधिक जानकारी देते हुए हिमेंदर बाली जी बताते हैं कि वास्तबारा बाग गांव के नाथ समुदाय द्वारा आयोजित किए जाने वाला एक लोक उत्सव है।इसका आयोजन माघ माह में होता है।वास्तबारा का सम्बन्ध मातृ-पितृ भक्त श्रवण कुमार से है।यह मातृ पितृ भक्त वैश्य ऋषिपुत्र श्रवण कुमार की कीर्तिगाथा है।श्रवण कुमार की अनजाने में राजा दशरथ द्वारा चलाए गए शब्दबेधी वाण से सरयू के तट पर मृत्यु हो गयी थी।मातृ-पितृ भक्त श्रवण अपने माता पिता को चार धाम यात्रा पर वाहंगी में बिठाकर ले जा रहे थे।मातृ-पितृ भक्त श्रवण के वृद्ध-दुर्बल तपस्वी अंधे मां-बाप ने श्रवण के मरने के बाद अयोध्या के राजा दशरथ को शाप दिया था कि पुत्र के वियोग में जिस तरह हम व्याकुल हैं उसी तरह पुत्र की वियोग जनित व्याकुलता से तुम्हारे भी प्राण जाएंगे।इस प्रकार वेवैश्य ऋषि दंपति राजा दशरथ को शाप देकर करूणायुक्त विलाप करते हुए दोनो स्वर्ग सिधार गए।भारतीय सभ्यता का अनुकरण करने वालों को हेय की दृष्टि से देखा जाता है और उसी का परिणाम है आज विघटित होते परिवार,राजनीतिक खेमों में विघटित होता समाज, विघटित होती मातृ-पितृ भक्ति की भावना।पाश्चात्य संस्कृति और बढ़ती राजनीतिक गुलामी का परिणाम जानते हैं क्या हुआ है-उचछृंखल यौन संबंध,विवाहेतर संबंध,बलात्कार,भाई-भाई के खून के प्यासे होने की घटनाएं,दो भाइयों के बीच वृद्ध मां -बाप का बंटवारा और मां-बाप से वसीहत करवाकर परिवारों में बढ़ती फूट तथा अंत में वृद्ध आश्रमों में तिल-तिल कर मरते मां-बाप,जो नित्यप्रति समाचारों की सुर्खियां बनती हैं।ऐसे में लगातार गाँव-गाँव मीलों पैदल चलकर हर गाँव के आंगन में वास्तवारा गाथा को गाने वाले की झोली जब रात तक भी नहीं भरती,मीलों के सफर के बाद एक मजदूर तक की दैनिकी नहीं बन पाती तो हर आदमी के गलत तरीके से किया अर्थोपार्जन नेक कार्यों में नहीं लगता ऐसे में वास्तबारा को भी पैसे की खनक में गायब होने से कोई नहीं बचा सकता।
इस अवसर पर पुरातत्व संरक्षण पर आधारित गोष्ठी का भी आयोजन किया जाएगा।इस दौरान हिमाचल के इतिहास में सुकेत रियासत के अग्रणी योगदान तथा सुकेत रियासत की एक मात्र कलात्मक धरोहर सुकेत अधिष्ठात्री राज-राजेश्वरी महामाया पांगणा के स्मारक के संरक्षण पर आधारित शोद्धार्थी गगनदीप के वृतचित्र का प्रदर्शन भी किया जाएगा।

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