मंडी

इस वर्ष प्रदेश में 28 मार्च 2021 को मनाया जाएगा होली का त्यौहार : लेखराज शर्मा

(जोगिंदर नगर)क्रांति सूद

प्रसिद्ध हस्तरेखा विशेषज्ञ एवं ज्योतिषाचार्य कैप्टन डॉक्टर लेखराज शर्मा ने बताया कि होली का त्यौहार रंगों का त्योहार है इस दिन लोग एक दूसरे पर रंग फेंकते हैं और गुलाल लगाते हैं होली का उत्सव दो प्रकार से मनाया जाता है कुछ लोग रात्रि में लकड़ियां झाड़ झंखाड़ एकत्र कर उसमें आग लगा देते हैं और समूह में होकर गीत गाते हैं।

उन्होंने कहा कि आग जलाने की प्रथा होलिका दहन की याद दिलाती है। लोग रात में आतिशबाजी आदि चला कर भी अपनी खुशी प्रकट करते हैं होली मनाने की दूसरी प्रथा आज सारे समाज में प्रचलित है होली वाले दिन लोग प्रातः काल से दोपहर 12:00 बजे तक अपने हाथों में लाल व हरे व पीले रंग का गुलाल लिए हुए परस्पर प्रेम भाव से गले मिलते हैं। इस दिन किसी प्रकार का भेदभाव नहीं रखा जाता किसी अपरिचित को भी गुलाल मल कर अपने हृदय के नजदीक लाया जाता है।

वैसे तो हर त्यौहार का अपना एक रंग होता है,जिसे आनंद या उल्लास कहते हैं, लेकिन हरे पीले लाल गुलाबी आदि असल रंगों का भी एक त्यौहार पूरी दुनिया में हिंदू धर्म के मनाने वाले मनाते हैं। यह होली का त्यौहार इसमें एक और रंगों के माध्यम से संस्कृति के रंग में रंग कर सारी भिनंताएं मिट जाती हैं, और सब एक रंग के हो जाते हैं वहीं दूसरी ओर धार्मिक रूप से भी होली बहुत महत्वपूर्ण है।

मान्यता है कि इस दिन स्वयं को ही भगवान मान बैठे हिरण्यकशियपू ने भगवान की भक्ति में लीन अपने ही पुत्र प्रहलाद को अपनी बहन होलिका के जरिए जिंदा जला देना चाहा था,लेकिन भगवान ने भक्त पर अपनी कृपा की और प्रहलाद के लिए बनाई चिता में स्वयं होलिका जल मरी इसलिए इस दिन होलिका दहन की परंपरा भी है।

उन्होंने बताया कि होलिका दहन से अगले दिन रंगों से खेला जाता है इसलिए इसे रंग वाली होली और दुल्हनडी भी कहा जाता है। शारदा ज्योतिष निकेतन के प्रमुख कैप्टन डॉक्टर लेखराज शर्मा के अनुसार इस वर्ष होली का त्यौहार हिमाचल प्रदेश में 28 मार्च 2021 को मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल होलिका दहन 28मार्च को सायं 6 बजे कर 30 मिनट से लेकर रात 8:56 तक किया जा सकता है

हिंदू धर्म ग्रंथों और भारतीय वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार होलिका दहन या पूजन भद्रा के मुख्य को त्याग करके करना शुभ फलदायक होता है। उल्लेखनीय है कि फागुन महीने की पूर्णिमा से पहले प्रदोष काल में होलिका दहन करने की परंपरा है। उन्होंने कहा कि 28 मार्च को पूर्णिमा उदय व्यापिन है जबकि उत्तर प्रदेश मथुरा बृंदावन हरियाणा दिल्ली आदि प्रदेशों में होलिका दहन के बाद ही अगले दिन 29 मार्च सोमवार को होली पर्व श्रद्धा और उल्लास पूर्वक मनाया जाएगा।

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