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ईजीएस की तर्ज पर नॉन रेजिडेंट स्पेशल ट्रेनर्स को भी राहत दे प्रदेश सरकार

(बद्दी)राकेश ठाकुर

प्रारंभिक शिक्षा विभाग में पिछले 9 वर्षों से एसएससी और एनजीओ के माध्यम से कार्यरत नॉन रेजिडेंट स्पेशल ट्रेनर ने सरकार से इजीएस अनुदेशकों की तर्ज पर उन्हें भी राहत देने की मांग की है।  हिमाचल सरकार ने 148 ईजीएस अनुदेशकों को जेबीटी बनाने का निर्णय लिया है जबकि नॉन रेजिडेंट स्पेशल ट्रेनर भी इन्हीं के समकक्ष है।

ऐसे में इनको भी ग्रामीण विद्या उपासक में परिवर्तित किया जाए। राज रानी, इंदु कुमारी, ज्योति और करतार ने बताया कि  मौजूदा समय में शिक्षा विभाग में 111 नॉन रेजिडेंट स्पेशल ट्रेनर्स कार्यरत हैं जो सभी पात्रता पूरी करते हैं। इन्होंने बताया कि सभी ट्रेनर्स बीएड और टैट पास है लेकिन सरकार बीते कई सालों से नॉन रेजिडेंट स्पेशल ट्रेनर्स को नजरअंदाज कर रही है हालांकि कई बार नॉन रेजिडेंट स्पेशल ट्रेनर्स ने सरकार के यह मांग उठाई है लेकिन सरकार ने अभी तक  इस पर कोई कदम नहीं उठाया है।

यह ट्रेनर्स स्कूल ना जाने वाले बच्चों को पढ़ाते हैं। प्रदेश में चल रहे कई केंद्रों में यह ट्रेनर्स बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं। इनका काम ऐसे बच्चों को ढूंढना है जो किन्ही कारणों से स्कूल से किनारा करते हैं। इस समय प्रदेश में लगभग 2000 से अधिक बच्चे इन केंद्रों में पढ़ाई कर रहे हैं।

करोना कॉल जैसी भयंकर बीमारी के दौरान भी ये  बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं।  गौरतलब है कि पिछले 9 वर्षों से आरटीई एक्ट 2009 के तहत नियुक्त ये ट्रेनर्स यह शिक्षा विभाग में सेवा दे रहे हैं और अब ये प्रदेश सरकार से मांग कर रहे हैं कि इन्हें भी किसी पॉलिसी के तहत लाया जाए।

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