आनी

पत्रकार को जान से मारने की धमकी देने वाले के खिलाफ की जाए कड़ी कार्यवाही

प्रेस क्लब ऑफ आनी ने प्रदेश सरकार और प्रदेश पुलिस प्रमुख से की मांग

 

 

 

स्वतंत्र हिमाचल
(आनी) विनय गोस्वामी

 

प्रदेश सरकार द्वारा यूं तो खनन माफिया और नशा माफिया को कुचलने के वादा और दावा किया गया था। लेकिन आये दिन देखने मे आ रहा है कि माफियाओं द्वारा कभी हिमाचल प्रदेश में कभी तेज तर्रार अफसरों तो कभी निर्भीक पत्रकारिता कर सामाजिक बुराईयों को उजागर करने वाले पत्रकारों को जान से मारने की धमकियां दी जाती आ रही हैं।

हाल ही में ऊना जिला के गगरेट के दैनिक समाचार पत्र के पत्रकार अविनाश विद्रोही द्वारा नशा माफिया के खिलाफ समाचार को छापने पर तथाकथित नेता द्वारा जान से मारने की धमकी देने का मामला प्रकाश में आया है। जिसकी पूरे प्रदेश भर में कड़ी निंदा की जा रही है।

वहीं प्रेस क्लब ऑफ आनी ने भी पत्रकार अविनाश विद्रोही को धमकाने वाले मामले पर कड़ा संज्ञान लेने की मांग की है।

प्रेस क्लब ऑफ आनी के अध्यक्ष जितेंद्र गुप्ता , वरिष्ठ सदस्य एवं चेयरमैन छविंद्र शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष शिवराज शर्मा, उपाध्यक्ष हरिकृष्ण शर्मा, आशीष शर्मा,यशपाल ठाकुर, महासचिव चमन शर्मा, कोषाध्यक्ष विनोद ठाकुर, मीडिया प्रभारी राकेश बिन्नी शर्मा, प्रवक्ता हितेश भारती,
सहसचिव विनय गोस्वामी,दिले राम भारद्वाज सहित भारत भूषण, पूजा गुप्ता आदि सभी सदस्यों ने संयुक्त बयान में प्रदेश सरकार से मांग की है कि इस मामले में और भविष्य में ऐसे किसी भी मामले में संलिप्त लोगों को संरक्षण न देकर कड़ी कार्यवाही अमल में लाई जाए।

उन्होंने कहा कि एक ओर तो प्रदेश सरकार और पुलिस प्रमुख द्वारा नशा माफिया के खिलाफ अभियान छेड़ा गया है वहीं नशा माफिया के खिलाफ पुलिस प्रशासन और सरकार का साथ देने वाले पत्रकारों को जान से मारने की सरेआम धमकियां दी जा रही, जो शांत प्रदेश कहे जाने वाले हिमाचल के लिए शर्म,चिंता और सोचने की बात है।

प्रेस क्लब ऑफ आनी ने कहा है कि प्रदेश भर के पत्रकार संघों को ऐसे हर मामले में एकजुटता दिखानी होगी और साथ ही प्रदेश सरकार और पुलिस प्रमुख से मांग की है कि अविनाश विद्रोही को जान से मारने की धमकी देने वालों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही अमल में लाकर एक सबक पेश किया जाए। ताकि भविष्य में पत्रकारों को बेवजह धमकाने की कोई हिम्मत न करे।

क्योंकि अगर किसी भी व्यक्ति को किसी भी प्रकाशित या प्रसारित समाचार से कोई आपत्ति है तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का कदम उठाए न कि पत्रकार को जान से मारने की धमकियां दे।

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