शिमला

बिल्ड अप स्ट्रक्चर की लीज को सोलन में छूट, 2017 में बंद की थी परमिशन

 हिमाचल सरकार ने चुपचाप एक जिला के लिए दी अनुमति

 जहां टूटे सबसे ज्यादा नियम, वहीं के लिए परमिशन पर उठ रहे सवाल

स्वतंत्र हिमाचल

( शिमला)सुनीता भारद्वाज

 

हिमाचल प्रदेश में बिल्ड अप स्ट्रक्चर को लीज पर देने के बड़े गड़बड़झाले के बाद बंद हुई परमिशन को सरकार ने एक जिला के लिए खोल दिया है। सूत्रों के अनुसार सोलन जिला के लिए राजस्व विभाग ने यह परमिशन दे दी है, जिससे कई सवाल भी खडे़ हो गए हैं। हालांकि सरकार ने यहां पर निवेशकों को रिझाने के मकसद से ऐसा किया है, मगर जब पूरे प्रदेश में इसकी इजाजत देनी बंद कर दी गई थी, तो इसे एक जिला के लिए क्यों खोला गया, इस पर सवाल खड़े हो गए हैं।

वर्ष 2017 में तत्कालीन सरकार ने बने बनाए स्ट्रक्चर को उद्यमियों को लीज पर देने के लिए बंद कर दिया था, क्योंकि इससे सरकार को नुकसान हो रहा था। निवेशक यहां पर लोगों को इसके लिए जितना पैसा देते थे, एक तो उसका पता नहीं  चलता था कि वह कितनी राशि दे रहे हैं, दूसरा यहां नियमों की भी उल्लंघना हो रही थी। सरकार को राजस्व हानि के चलते यह निर्णय लिया गया था कि बिल्ड अप स्ट्रक्चर को लीज पर देना बंद किया जाए। ऐसा इसलिए भी किया गया था कि यहां पर कई निवेशकों ने जमीन की खरीद करने के बाद वहां निर्माण कार्य किया, मगर उन्होंने जिस उद्देश्य से जमीन ली थी, वह काम नहीं किया, जो कि नियमों के खिलाफ  था। ऐसे मामले सबसे ज्यादा थे भी उद्योग क्षेत्रों के, जिसमें सोलन जिला सबसे प्रमुख है।

इसे देखते हुए सरकार ने फैसला लिया और पूरे प्रदेश में ही बिल्ड अप स्ट्रक्चर को लीज पर देना बंद कर दिया था। मगर सूत्रों की मानें तो हाल ही में सरकार ने चुपचाप सोलन जिला के लिए इस तरह की परमिशन देने का निर्णय लिया है और इस पाबंदी को वहां के लिए हटा दिया गया। इससे कई सवाल खड़े हो गए हैं कि आखिर सरकार ने केवल एक जिला के लिए ऐसा क्यों किया है। सोलन जिला में ही, जबकि यह मामले सबसे ज्यादा थे और वहीं पर नियमों की अवहेलना भी जा रही थी, तो वर्तमान सरकार ने वहां के लिए परमिशन देने की बात क्यों मान ली।
कुछ विशेष लोगों को इसका लाभ पहुंचाने के लिए ऐसा किया गया होगा, यह भी माना जा सकता है। सोलन के अलावा किसी भी दूसरे जिला में अभी बिल्ड अप स्ट्रक्चर को लीज पर नहीं दिया जा सकता है।

यहां पर जमीन को लीज पर देने के मामले भी सामने आए हैं, जिसमें भी स्थानीय लोगों को गुमराह किया जा रहा था। इस पर भी सरकार ने रोक लगाई है। यहां कई लोगों से उनकी जमीनें लीज पर लेकर बड़े-बडे होटल बना लिए गए हैं, लेकिन नियमानुसार जो राजस्व सरकार को आना था, वह नहीं आ सका हैं। फिलहाल विपक्ष के लिए यह बड़ा मुद्दा है, जिस पर विधानसभा के बजट सत्र में मामला उठाया जा सकता है। इस पर विपक्ष के विधायक सवाल पूछने की तैयारी में हैं, जिस पर सरकार को जवाब देना होगा। सरकार क्या बताती है, यह सदन में साफ होगा, लेकिन बड़ी बात है कि किन कारणों से एक जिला के लिए यह परमिशन दी गई है। (एचडीएम)

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