अज्ञात बीमारी की वजह से मरी भेड़-बकरियां, चरवाहे को लाखों का नुकसान

 

रैला-2 के मझाण गाँव में भेड़ पालकों को अपनी सैंकड़ों भेड़-बकरियों की चिंता सताई

(सैंज) प्रेम सागर चौधरी

सैंज घाटी के पंचायत रैला-।। के मझाण गाँव में भेड़-बकरियां किसी अज्ञात बीमारी की चपेट में आने से मर रही हैं जिससे चरवाहे को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। पशुपालन विभाग की टीम अभी तक भेड़ों व बकरियों की जांच के लिए नहीं पहुँच पाई है। लेकिन चरवाहे के मुताबिक भेड़-बकरियों के मरने का क्रम जारी है।
यान सिंह तथा संगत राम की लगभग एक दर्जन भेड़-बकरियाँ इस अज्ञात बीमारी का शिकार हुई हैं। भेड़पालक के पास लगभग 200 भेड़ बकरियाँ हैं तथा उनमें से भी अधिकांश इस बीमारी की चपेट में आने की जद में हैं जिससे गाँव के लगभग एक दर्जन भेड़ पालकों को अपनी हज़ारों भेड़-बकरियों की चिंता सताने लगी है।


पशुपालन विभाग के कर्मचारी को इसकी सूचना देने का प्रयास किया गया लेकिन मोबाइल स्विच ऑफ होने पर पंचायत के प्रधान को सूचित किया गया। चरवाहे के मुताबिक भेड़-बकरियों के मरने का क्रम अभी भी जारी है। उसने बताया कि उसके पास दो सौ से अधिक भेड़ बकरियां थीं किंतु किसी अज्ञात बीमारी के कारण भेड़-बकरियां बीमार हो गईं और उनकी मौत होने लगी और अभी तक लगभग एक दर्जन भेड़-बकरियां मर चुकी हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि भेड़-बकरियों के मरने का क्रम नहीं रुक रहा है और यदि यही क्रम रहा तो उनकी सारी भेड़ बकरियों पर मुसीबत आ सकती है जिसका प्रत्यक्ष नुकसान उन्हें झेलना पड़ेगा। भेड़ पालकों बनवारी लाल, यान सिंह, संगत राम,ने प्रशासन से इसके त्वरित समाधान का आग्रह किया है ताकि भविष्य में इससे बचाव हो सके तथा मरी हुई भेड़ बकरियों से हुए नुकसान की आर्थिक सहायता की गुहार लगाई है। स्थानीय लोगों ने बताया कि पहले भी किसी अज्ञात बीमारी से लगभग 100 भेड़ बकरियाँ मर चुकी हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस अज्ञात बीमारी से फेफड़े ही जाम हो रहे हैं और उनके पेट फूलने के पश्चात् कुछ भेड़ों के पेट ही फट रहे हैं। पूर्व में मरी भेड़ बकरियों की पड़ताल में पशु चिकित्सकों ने उसे एक तरह के फ्लू का नाम दिया था, जिस कारण उस समय भेड़-बकरियां मरी थीं।

इस मामले को लेकर पशु चिकित्सा अधिकारी सैंज अश्मिता आनंद से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वह अस्वस्थ होने के कारण अवकाश में हैं और उन्हें मामले की सूचना पंचायत प्रधान ने दी है तथा इस बीमारी की पुष्टि होने के बाद ही इसके समाधान हेतु टीम को भेजा जाएगा ताकि भेड़ बकरियों के मरने के कारणों का पता लगाया जा सके। भेड़ पालकों से व्यक्तिगत बात करके बीमारी का पता लगाने के प्रयास किए जाएंगे ताकि आवश्यक दवाईयां समय पर पहुंचाई जा सके।

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