प्राकृतिक झरनों के सुमधुर संगीत से गूंज रही है सैंज घाटी, पर्यटकों के लिए बना आकर्षण का केंद्र

 

(सैंज)प्रेम सागर चौधरी

झरनों के सुमधुर संगीत से गूंज रही सैंज घाटी पर्यटकों के लिए बना आकर्षण का केंद्र शांघड़ को प्राकृतिक धरोहरों यूं ही नहीं कहा जाता है। सैंज घाटी में सघन देवदार जंगलों के बीच से बहती नदी में मिलते झरनों की धाराएं अद्भुत सम्मोहन बिखेरती हैं।
ठंडे पानी के छोटे-बड़े झरने पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। एक ओर सैंज घाटी के बीचों-बीच बह रही पिन पार्वती नदी की शांत अविरल धारा आनंदित कर रही है तो दूसरी ओर पूरी घाटी में झरनों, प्रपातों की छटा देखते ही बनती है। इसमें कुल्लु मुख्यालय से 60 किलोमीटर शांघड़ की पवित्र मंदिर के साथ मैदान प्राकृतिक धरोहरों में मिनी स्विजरलैंड का दर्जा प्राप्त हुआ है। शांघड़ से 4 किलोमीटर की दूरी पर वरशांघड़ में अपनी छटा बिखरता झरना पर्यटकों को आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

 

गगन चूमते हिम शिखर वादियों से गुलजार शांघड़ प्राकृतिक धरोहरों से खुब लबरेज हैं। सैंज घाटी में सघन देवदार जंगलों के बीच से बहती नदी में मिलती झरनों की धाराएं अद्भुत सम्मोहन बिखेरती हैं। इनका सौंदर्यपान करने के लिए पर्यटक इनके निकट अवश्य ठहरते हैं। झरनों के धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व से भी परिचित हो सकेंगे। हालांकि आजकल कोरोना महामारी में स्थानीय पंचायत ने भी पर्यटकों की आवाजाही पर रोक लगा रखी है और वैश्विक महामारी में पर्यटकों ने भी बाहर घूमने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई दे रही है ।

सैंज घाटी में शांघड़ ,वरशांघड़ और धराली के बीच स्थित यह झरना अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है। सैंज घाटी पर्यटकों के रंग में रंग रही हैं और यहां ग्रामीण लोग विदेशी पर्यटकों को होम स्टे के माध्यम से रात्रि विश्राम कराते हैं। इसी से लोगों में उनकी आजीविका भी चलती हैं।
अब आलम यह है कि एक-दूसरे का पूर्ण सहयोग होने के बावजूद जहां ग्रामीण फर्राटेदार अंग्रेजी का प्रयोग करते हैं, वहीं विदेशी लोग मिठासभरी हिंदी और पहाड़ी बोलने का प्रयास भी करते हैं। रक्तिसर व थिणी के लिए ट्रैकिंग रूट जाता है इसलिए बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक यहां होम स्टे की व्यवस्था बनाए हुए हैं। यहां के ग्रमीण बताते हैं कि पर्यटक गाँव वालों के साथ रोजमर्रा के काम भी करते हैं और खाने में ठेठ पहाड़ी व्यजंन का ही लुत्फ़ लेते हैं।

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