देश की प्रतिभाओं को समाप्त करने का अभिशाप बना आरक्षण

स्वतंत्र हिमाचल

भारत वर्ष को आज़ाद हुए 74 वर्ष हो चुके हैं परन्तु आज भी सरकारें अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति व अल्पसंख्यक समुदाय के आस पास ही घुम रहीं हैं क्योंकि भारतीय राजनीतिज्ञों को देश के प्रगति से कुछ लेना देना नहीं है इनको सिर्फ़ राजनीति करनीं है चाहे वह स्वर्णों को दबा कर हो ,स्वर्णों को कुचल कर हो या गुमराह करके हो नहीं तो ऐटरोसिटी एक्ट के तहत जेल भेज कर हो ! हम लोग जिन्हें चुनाव जीता करके विधानसभा,लोकसभा व संसद में  भेजते हैं वहीं सदस्य अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए एक वर्ग यानि स्वर्णों को कुचलने के लिए नयें नये हथकंडे अपनाते है व भरपूर फ़ायदा उठाते हैं ।

आज देश के हर कोने से आरक्षण को हटाने की मुहिम चल पड़ी है व देश के हर कोने से जातिगत आरक्षण को पूर्ण रूप से समाप्त करने की मुहिम ज़ोर पकड़ती जा रही है! 14 अप्रैल को काला दिवस के रूप में सम्पूर्ण भारत वर्ष में मनाया जा रहा है हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में आरक्षण को लेकर भुख हड़ताल पर स्वर्णों के बच्चे बैठे हैं परन्तु सरकार के कान पर सुई तक नहीं रेंग रही है व भारत का चौथा स्तम्भ जो हर शहर गाँव की छोटी से छोटी बात हर जन तक पहचानते हैं व भी शिमला में बैठे सामान्य वर्ग संयुक्त मंच की बात को अख़बार में छापने से गुरेज़ कर रहे हैं ये है भारत का चोथा स्तम्भ इन के बच्चे भी तो प्रभावित हो रहें हैं आरक्षण से !

स्वर्णों के समानता के अधिकारों का हनन हो रहा है स्वर्णों द्वारा चुने हुए स्वर्णो राजनीतिज्ञों द्वारा स्वर्णों का उत्पीडन, क्या कहने देश के जहां पर 40 प्रतिशत  बाला व्यक्ति भारतीय प्रशासनिक अधिकारी वन जाता है व 85 प्रतिशत   बाला व्यक्ति सड़कों की ख़ाक छानता है ।
आरक्षण भारत में एक वर्ग को आजीवन दी जाने वाली भीख है जिनका उत्थान कभी नहीं होगा! यदि आरक्षण समाप्त नहीं हुआ तो जातिवाद को बढ़ावा मिलेगा व देश में अराजकता का माहौल बनेगा ! व आरक्षण गृह युद्ध में भी बदल सकता है इन्साफ़ के लिए व्यक्ति किसी भी हद से गुजर सकता है जब बात उसके बच्चों के भविष्य को लेकर हो

1–आरक्षण मुक्त भारत आन्दोलन !
2–भारतीय आरक्षण मुक्ति दल युवा मोर्चा लखनऊ!
3–सामान्य वर्ग संयुक्त मंच हिमाचल प्रदेश !

उपरोक्त सभी संगठन आरक्षण को पूर्ण रूप से ख़त्म करने के लिए पुरे ज़ोर शोर से लगे हुए हैं
राजनीतिज्ञ (नेता लोग)यदि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर
देश के बारे में सोचें तो आरक्षण /अत्याचार अधिनियम अनुसूचित जाति-जनजाति ऐक्ट
भारत वर्ष के लिए एक कलंक तो है ही साथ ही पिछड़ेपन का मुख्य कारण है
इस एक्ट के कारण हम विश्व में हंसी के पात्र हैं ।
आरक्षण को समाप्त करने के लिए एक साथ सदन में आवाज़ बुलंद करे तो क्या नहीं हो सकता है परन्तु यें ऐसा करेंगे क्योंकि ये हमारे (स्वर्णों) के बच्चों के भविष्य का सवाल है
यदि स्वर्णों के बच्चों का भविष्य बना नहीं सकते तो आरक्षण से भविष्य बिगाड़ने का अधिकार किसी को नहीं ।
परिवर्तन लाने के लिए सभी स्वर्णों को इकट्ठा होना होगा,आप से आप की सम्पत्ति व दौलत नहीं माँगी जा रही है बस एक जुट रहे, एक जुटता ही आरक्षण को ख़त्म कर सकतीं हैं!

आरक्षण समाजिक बुराई है इस का ख़ात्मा अनिवार्य है!

 

 

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