आनी

किसी जन्नत से कम नहीं रघुपुरगढ़ का पांडव खेत

स्वतंत्र हिमाचल
(आनी) विनय गोस्वामी

 

जिला कुल्लू में रमणीक और पौराणिक स्थलों क़ी भरमार है,जिला कुल्लू के आंतरिक और बाह्य सिराज में अनेक देवी देवताओं व ऋषि मुनियों के नाम से बहुत से धार्मिक स्थल हैं।
बाह्य सिराज में पांडवों के भ्रमण के बहुत से साक्ष्य आज भी मौजूद हैं।
एक ऐसा ही स्थान आज भी
उपमंडल आनी के रघुपुरगढ़ के आँचल में स्थित है, जिसका संबंध पांडवों से है, और यही स्थान पांडव खेत के नाम से विख्यात है।


हिमालय भ्रमण के दौरान पांडव यहां इस जगह रुके थे, कहते हैं कि इस पांडवों में इस जगह किसी बात के लिए आपस में कुछ मन मुटाव हुआ और भीम ने गुस्से अपऩे एक पांव से इस स्थान पर इतने जोर से प्रहार किया था जिससे तकरीबन 300 मीटर के दायरे का यह पूरा क्षेत्र हिलने लगा डुलऩे लगा, यही कारण है कि जंगल के बीचोबीच 300 मीटर का यह समतल मैदान चलने से हिलने डुलने लगता है, मानों मैदान में घास के नीचे दलदल हो, लेकिन हक़ीक़त में यहां ऐसा कुछ भी नहीं।

इस मैदान में वही धान (धाननुमा घास)उगा है,जो सरेउलसर झील के पास भी है, कहते हैं कि यह धान (धानुमा घास) पांडवों ने यहां लगाया था, यही कारण है कि इस जगह क़ो पांडव खेत कहते हैं।

इस समतल मैदान के चारों तरफ़ झुरमुट बान प्रजाति के खरशुओं के पेड हैं, जो इस जगह क़ी खूबसूरती क़ो चार चाँद लगाते हैं।

कैसे पहुंचें पांडव खेत:-

जिला कुल्लू उपमंडल आनी के 10280 फुट क़ी ऊंचाई पर स्थित जलोड़ी दर्रे से ऐतिहासिक रघुपुर गढ़ से होते हुए तक़रीबन 5 कि.मी. के उतराई चढ़ाई वाले सफ़र के बाद इस खूबसूरत जगह पहुंचते हैं,जहां रघुपुर की तलहटी में आपको एक छोटी मगर खूबसूरत झील के दीदार भी होते हैं।

पर्यटन क़ी दृष्टि से यह खूबसूरत स्थान विकसित हो सकता है, अगर इस खूबसूरत और पौराणिक स्थल क़ी तरफ़ ध्यान दिया जाए ।

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