शिमला

निजी स्कूलों की फीस का होगा हिसाब-किताब

शिक्षा निदेशालय में 31 अक्तूबर तक भेजना होगा फीस का ब्यौरा

 

 

प्रदेश के सभी संस्थानों पर फीस के ऑडिट की शर्त होगी लागू, शिक्षा निदेशालय में 31 अक्तूबर तक भेजना होगा फीस का ब्यौरा

स्वतंत्र हिमाचल

(शिमला)सुनीता भारद्वाज

लंबे समय से फीस को लेकर चल रहा विवाद अब खत्म हो जाएगा। सरकार व विभाग ने निजी स्कूलों पर फीस के ऑडिट की शर्त लागू कर दी है। शिक्षा विभाग ने प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टीच्यूशनल रेगुलेशन एक्ट-1997 के एक्ट में प्रावधान कर दिया है। वहीं, सभी प्राइवेट स्कूलों को आदेश जारी कर दिए है कि हर साल 31 अक्तूबर से पहले उन्हें अपने स्कूल की ऑडिट रिपोर्ट भेजनी होगी। विभाग ने निजी शिक्षा नियामक अधिनियम 1997 के चैप्टर-3 के 10 व 11 नियम का हवाला देते हुए सभी स्कूलों के लिए ऑडिट रिपोर्ट भेजना अनिवार्य किया है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस एक्ट के तहत प्राइवेट स्कूलों को पहले से ही हर साल यह ऑडिट भेज देना चाहिए था, लेकिन किसी भी स्कूल से इस तरह की रिपोर्ट नहीं आई है। अब अगर हर साल तय समय पर यह रिपोर्ट स्कूलों से जमा नहीं होगी, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

बता दें कि लंबे समय से प्राइवेट स्कूलों के फीस का मामला प्रदेश में गरमाया हुआ था। निजी स्कूलों के फीस बढ़ोतरी को लेकर अभिभावक व स्कूल प्रबंधन के बीच काफी मतभेद भी देखा गया। हैरानी इस बात की है कि कोविड काल में प्राइवेट स्कूलों पर एक्स्ट्रा फीस लेने के आरोप भी अभिभावकों ने लगाए हैं। फिलहाल इस विवाद को खत्म करने के लिए शिक्षा विभाग का यह फैसला कितना सही साबित होता है, यह देखना अहम होगा।  इससे पहले भी निजी स्कूलों की फीस को लेकर मचे घमासान के बीच हिमाचल प्रदेश सरकार ने फीस नियंत्रित करने के लिए वर्ष 1997 के एक्ट के प्रावधानों को लागू करने की बात कही थी।

 

हाल ही में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस पर अनौपचारिक बातचीत हुई। कैबिनेट ने शिक्षा विभाग को एक्ट के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने को लेकर हरी झंडी दी थी। विभागीय अधिकारियों ने सरकार से मंजूरी मिलते ही विधि विभाग को मामला भेजा था। अब कानूनी राय लेने के बाद ही शिक्षा विभाग ने मंगलवार को प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टीच्यूशनल रेगुलेशन एक्ट के 1997 के नियमों का हवाला देकर निजी स्कूलों के लिए इसे अनिवार्य किया है।

निजी शिक्षण संस्थान (नियामक) एक्ट-1997 के तहत निजी स्कूलों को ऑडिट की व्यवस्था की करनी होगी। ऐसे में चिह्नित दुकानों से ही किताबें और वर्दी की खरीद के लिए निजी स्कूल दबाव नहीं बना पाएंगे। एक्ट के नियम सख्ती से लागू होने के बाद अब निजी स्कूलों को फीस और फंड सहित शिक्षकों का ब्यौरा सरकार को देना होगा। हालांकि फीस स्कूल खुद तय करेंगे, लेकिन फीस पर नियंत्रण रखने के लिए सरकार कोई फार्मूला जल्द तैयार करेगी।

अब फीस बढ़ोतरी पर रहेगी शिक्षा विभाग की नजर

शिक्षा विभाग की ओर से मंगलवार को जारी की गई अधिसचना के अनुसार निजी स्कूलों को उपनिदेशकों के माध्यम से ऑडिट रिपोर्ट भेजनी होगी। वहीं, 31 अक्तबूर से पहले निदेशालय में ऑडिट पहुंचाना अनिवार्य किया है। शिक्षा विभाग ने इसके लिए जिला उपनिदेशकों को भी निर्देश दिए हैं कि वह समय पर निजी स्कूलों को रिपोर्ट भेजने के लिए आगाह कर दें। अगर निजी स्कूल शिक्षा विभाग की इस शर्त को सख्ती से लेते हैं, तो ऐसे में हर साल कितनी फीस बढ़ाई जा रही है, इस पर विभाग की नजर रहेगी।

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