प्रकाश चंद कोरोना कर्फ्यू के बीच काफल व देसी फल बेच चला रहे जिंदगी

(जोगिन्दर नगर)क्रांति सूद

वैश्विक महामारी कोविड 19 के इस कठिन समय में जहां इंसान कोरोना संक्रमण से अपनी जिंदगी को बचाने में अपने घरों में कैद होने को विवश हुआ है तो वहीं जिंदगी चलती रहे इसके लिए रोजी रोटी का जुगाड़ भी बेहद जरूरी है। ऐसे में कोरोना कर्फ्यू के बीच जोगिन्दर नगर क्षेत्र के समखेतर निवासी 42 वर्षीय प्रकाश चंद इन दिनों काफल व अन्य देसी फल इत्यादि बेचकर अपनी व परिवार की जिंदगी को हांक रहे हैं। जोगिन्दर नगर के थाना चौक में अस्थाई दुकान लगाकर प्रकाश चंद इन दिनों स्थानीय लोगों को देसी व जंगली फल काफल, पलम, आडू के साथ-साथ बुरांस के फूल, रस व चटनी इत्यादि बेच कर परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।


जब इस बारे प्रकाश चंद से बातचीत की तो उनका कहना है कि जोगिन्दर नगर के थाना चौक में वह पिछले लगभग 8-9 वर्षों से अस्थाई दुकान लगाकर अपने परिवार की आजीविका को चला रहे हैं। वे अपनी इस अस्थाई दुकान में देसी फल व अन्य मौसमी खाने-पीने के सामान की ही बिक्री करते हैं। इन दिनों वे प्राकृतिक फल काफल के साथ-साथ पलम, आडू, खुमानी इत्यादि को बेच कर परिवार की आजीविका को आगे बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा दूसरे मौसम में देसी लहुसन, दालें, कोदरा, अखरोट इत्यादि बेचकर वे अपनी रोजी रोटी का जुगाड़ कर लेते हैं।
उनका कहना है कि कोरोना महामारी के इस कठिन समय में पिछले वर्ष लगे लॉकडाउन एवं वर्तमान में कोरोना कर्फ्यू के बीच भी वे लगातार निर्धारित समय के लिए अपनी अस्थाई दुकान लगाते रहे हैं। इस बीच उन्हे अस्थाई दुकान से उन्हे इतनी आमदनी हो जाती रही है जिससे परिवार का पालन-पोषण सही तरीके से हो जाए। उनका कहना है कि वे इस अस्थाई दुकान के लिए प्रतिदिन स्थानीय नगर परिषद को निर्धारित किराये का भी भुगतान करते हैं। कुल मिलाकर कोरोना महामारी के इस संकट भरे दौर में भी जिंदगी का सफर चलता रहे इसके लिए प्रकाश चंद निरन्तर प्रयासरत हैं। साथ ही वे अपने ग्राहकों से फेस मास्क पहनने एवं पर्याप्त सामाजिक दूरी की अनुपालना के लिए भी आग्रह करते रहते हैं ताकि कोरोना महामारी से सभी का जीवन सुरक्षित रह सके।

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