धर्मपुर डिपो में तीन सालों में एक भी नई बस उपलब्ध नहीं करवा पाये पावर फूल मंत्री

 

सरकाघाट डिपो से बसें धर्मपुर ले जाने बाद भी नहीं बदले हालत

44 बसें कम तो 45 कर्मचारियों के पद पड़े हैं ख़ाली

(सरकाघाट)रितेश चौहान

धर्मपुर स्थित हिमाचल पथ परिवहन निगम के डिपो में वर्तमान में 44 बसों की कमी है।वर्तमान में इस डिपो में कुल 47 बसें उपलब्ध हैं लेकिन अगर सभी रूटों पर औऱ जनता की ज़रूरत के अनुसार बसें चलानी पड़े तो इतनी ही बसें औऱ चाहिए।पूर्व ज़िला परिषद सदस्य भूपेंद्र सिंह ने बताया कि धर्मपुर में तीन साल पहले बस डिपो खोला गया था लेकिन यहां कर्मशाला केवल मात्र 4 कर्मचारी ही कार्यरत हैं और 27 पद ख़ाली पड़े हैं।इसी प्रकार कंडकटरों के भी 18 पद ख़ाली पड़े हैं।इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इस डिपो की हालत कैसी है।भूपेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले कुछ समय से यहाँ पर नई सड़कों का भी निर्माण हुआ है और उन पर बसें नहीं चल रही है और यदि किसी रूट पर बसें चलती भी हैं तो उन्हें वाया वाया करके चलाया जा रहा है जिससे जनता को भारी परेशानी होती है।बहुत से ऐसे रूट हैं जो कागज़ में तो हैं लेकिन उन पर बसें नहीं चलती हैं।उन्होंने कहा कि पिछले माह हिमाचल किसान सभा द्धारा आर एस धर्मपुर को सौंपे मांगपत्र के माध्यम से भी नई बसें चलाने की मांग की गई थी लेक़िन अभी तक उन रूटों पर बसें नहीं भेजी गई हैं।पूर्व पार्षद ने आरोप लगाया है कि धर्मपुर के विधायक व चार विभागों के मंत्री महेंद्र सिंह अपने चार साल के कार्यकाल में इस डिपो के लिए एक भी नई बस क्रय नहीं करवा पाये हैं उल्टा नये रूटों पर वे बसें चलाने के लिए झंडी जरूर दिखाते रहे हैं।

जो भी बसें यहां चल रही हैं वे सभी सरकाघाट डिपो से ही यहां के लिए ट्रांसफर की गई है जबकि होना तो यह चाहिए था कि नया डिपो बनने पर बसें भी नई ली जाती।सबसे चिंतनीय बात धर्मपुर की वर्कशाप की है जिसके निर्माण के लिए अभी तक अलग से स्थान चयनित नहीं किया गया है और मैकेनिकों व अन्य तकनीकी कर्मचारियों के 27 पद ख़ाली हैं और केवल मात्र चार मकैनिक ही पूरे डिपो का काम करने के लिए मजबूर हैं।उन्होंने ये भी बताया कि इस डिपो का कैश अभी तक भी सरकाघाट में ही जमा हो रहा है तो क्या ये डिपो सभी तक भी पूर्ण रूप से यहां से नहीं चल रहा है।सुनने में तो यह भी आया है कि इस डिपो और बस स्टैंड का एरिया बाढ़ संभावित क्षेत्र में होने के कारण इसे अनापति प्रमाण पत्र अभी तक नहीं मिला है।इसलिए मंत्री को ये सपष्ट करना चाहिए कि क्या ये डिपो सरकार द्धारा पूर्ण रूप में स्वीकृत कर दिया है या नहीं।इसके अलावा यहां ख़ाली पड़े पदों को तुरन्त भरा जाना चाहिए और नई बसें उपलब्ध कराने के लिए क़दम उठाना चाहिए।भूपेन्द्र सिंह ने ये भी बताया कि बहुत से प्राइवेट बसों के रूट जो कोरोना काल से पहले चलते थे वे आजकल बन्द हो गए हैं।इसलिए उन्हें रद्द किया जाए और उन पर निगम की बसें चलाई जाये।

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