शिमला

हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड के नालागढ़ स्थित पुस्तक वितरण,सूचना एवं मार्गदर्शन केंद्र को सोलन शिफ्ट करने का किया विरोध

(बद्दी) राकेश ठाकुर

बीबीएन क्षेत्र की 20 पंचायतों, के बीडीसी व जिला परिषद के सदस्यों ने हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड के नालागढ़ स्थित पुस्तक वितरण,सूचना एवं मार्गदर्शन केंद्र को बन्द कर सोलन शिफ्ट करने का विरोध किया है। पँचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा बीबीएन में स्थित सैंकड़ों स्कूलों की सुविधा केे लिए वर्ष 2014 में नालागढ़ में यह सेल डिपू खोला गया था व इस डिपू से इलाके केे दर्जनों स्कूल पाठ्यक्रम की पुस्तकों व अन्य जानकरियाँँ ग्रहण करते थे लेकिन विभाग द्वारा अब इसेे बन्द करने के फरमान से लोगों में निराशा व भारी रोष है। वहीं क्षेत्र में स्थित तीन शिक्षा खण्ड के हजारों छात्रों, अभिभावकों व अध्यापकों को पुस्तकें प्राप्त करने व बोर्ड से सम्बंधित फॉर्म व परीक्षा तथा परिणाम आदि की जानकारी व मार्गदर्शन भी मिल रहा था।

वहीं विभाग द्वारा इसे बंद करने के विरोध मे क्षेत्र की 20 पंचायतों के प्रतिनिधियों के इलावा विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष गुरदयाल ठाकुर व अन्य लोगों नेे एक हस्ताक्षर युक्त प्रति बोर्ड के अध्यक्ष ,शिक्षा मंत्री व मुख्य मन्न्त्री से नालागढ़ के इस वितरण केंद्र को सोलन डिपो में समायोजित करने के आदेशों को तुरंत रदद् करने की मांग की है। अन्यथा क्षेत्र के लोगो को स्कूलों से सम्बन्धित कार्य करवने के लिए 80 से 120 किलोमीटर का सफर तय करके सोलन जाना पड़ेगा।

जिससे पूरा दिन लगेगा, व गाड़ियों को हरियाणा का टैक्स व दो तीन जगह टोल प्लाजा भी देना होगा। गाड़ियों का खर्चा व अध्यापकों का टीए/डीए का अलग से हजारों रुपये का खर्चा विभाग को देना पड़ेगा। इसके अतिरिक्त नालागढ़ में 22 बीघा जमीन शिक्षा विभाग के नाम है जबकि सोलन में बोर्ड का डिपो किराए के भवन में चल रहा है।वहाँ पर पुस्तकों के भंडारण के लिए चौथी मंजिल पर गोदाम है, लोडिंग का बहुत खर्चा होता है तथा वहां गाड़ियों की पार्किंग की बहुत बडी समस्या है। स्कुलों के अध्यापकों को पुस्तकें व अन्य जानकारी लेने के लिए बोर्ड कार्यालय बार बार जाना होता है।

जन प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि औऱ सुविधायें नहीं दे सकती तो जो पूर्व सरकार द्वारा दी गई है उसे वापिस लेने का कोई हक नहीं है। इनका कहना है कि बोर्ड ने यदि अपना निर्णय वापिस नहीं लिया तो बीबीएन के लोगों को मजबूरन आंदोलन का रास्ता अख्तियार करना पड़ेगा।

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