अटल बिहारी वाजपेई राजकीय महाविद्यालय बंगाणा में एक दिवसीय कार्यक्रम आयोजित

 

( बंगाणा)राकेश राणा

जिला ऊना उपमंडल बंगाणा क्षेत्र के अटल बिहारी बाजपेई राजकीय महाविद्यालय बंगाणा में राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा समसामयिक विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार की अध्यक्षता राजनीति विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सिकंदर नेगी ने की। इस समसामयिक सेमिनार का विषय भारत में बजट बनने की प्रक्रिया, वैश्वीकरण का भारत अर्थव्यवस्था पर प्रभाव , विश्व व्यापार संगठन, नव नव उपनिवेशवाद था। सबसे पहले फाइनल ईयर की छात्रा अलका ने बजट पर अपने प्रकाश डालते हुए कहा कि बजट का मतलब उस दस्तावेज से है जिसमें एक निश्चित समयावधि के लिए देश के आय-व्यय का अनुमानित ब्यौरा होता है। जहाँ मंत्री उसे संसद में स्वीकृति प्राप्त करने हेतु प्रस्तुत करता है।

भारत में वित्तीय वर्ष की अवधि 1 अप्रैल से 31 मार्च तक तय की गई है।इसके बाद बजट के प्रकार और इसके महत्व पर प्रकाश डालती कहा कि बजट का किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण स्थान होता है। बजट आर्थिक रूप से सहायक होने के साथ-साथ उस देश के निवासियों के सामाजिक कल्याण में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। इसीलिये बजट बनाना आवश्यक है। उसके बाद फाइनल ईयर की छात्रा कविता ने भारत में वैश्वीकरण के प्रभाव पर अपने विचार प्रकट करते कहा कि वैश्वीकरण एक सतत् चलने वाली प्रक्रिया है जिसमें दुनिया के सभी देश एक-दूसरे से आर्थिक, राजनीतिक तथा सांस्कृतिक रूप से जुड़े हुए हैं। इस प्रक्रिया में सभी संभव स्तरों पर वैश्विक संचार बढ़ता है तथा विश्व में एकरूपता और क्षेत्रीयता दोनों की प्रवृत्ति बढ़ती है।

इस प्रक्रिया में कुछ सकारात्मक और कुछ नकारात्मक प्रभाव विभिन्न क्षेत्रों में पडते हैं।इसके बाद दीक्षा ने नव साम्राज्यवाद पर अपने विचार प्रकट करते हुए कहां कि नवउपनिवेशवाद की धारणा के मानने वालों का सोचना है कि पूर्व में उपनिवेशी शक्तियों ने जो आर्थिक ढांचा बना रखा था उनका अब भी उन उपनिवेशों पर नियन्त्रण करने में इस्तेमाल किया जा रहा है।यूरोप के देशों ने एक लम्बे समय तक एशिया और अफ्रीका के देशों पर अपना साम्राज्यवादी जाल फेंकर उनका राजनीतिक व आर्थिक शोषण किया लेकिन उन देशों में उभरने वाले स्वतन्त्रता आन्दोलनों ने साम्राज्यवादी देशों के मनसूबों पर पानी फेर दिया। धीरे-धीरे एशिया और अफ्रीका के देश एक-एक करके साम्राज्यवादी चुंगल से मुक्ति पाने लगे। जब साम्राज्यवादी शक्तियों को अपने दिन लदते नजर आए तो उन्होंने औपनिवेशिक शोषण के नए नए तरीके तलाशने शुरू कर दिए।अवसर पर राजनीति विज्ञान विभाग अध्यक्ष प्रोफ़ेसर सिकंदर नेगी ने कहा कि इन सेमिनार का उद्देश्य छात्रों को विश्व भर में हो रहे हैं घटना के बारे में अवगत करवाना है, जिन से आगामी होने वाले प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए उन्हें काफी मददगार साबित होगा। इस अवसर पर राजनीति विज्ञान के उपाध्यक्ष नेहचल कौर आदि मौजूद थे।

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