नालागढ़ वन विभाग गर्मियों में जंगलो में आगजनी की घटनाओ को लेकर हुआ सतर्क

 

नालागढ़ के अंतर्गत आगजनी की घटनाओं की रोकथाम के लिए किये जा रहे है विशेष प्रयास
नालागढ़ के मंडलाधिकारी यशु दीप सिंह ने इस संबंध में आयोजित की प्रेस वार्ता

(बीबीएन)अजय रतन

वन मंडल नालागढ़ के अंतर्गत आगजनी की घटनाओं की रोकथाम के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं यह जानकारी वन मंडलाधिकारी नालागढ़ यशु दीप सिंह ने इस संबंध में आयोजित संवाददाता सम्मेलन के दौरान दी। उन्होंने बताया कि वन मंडल नालागढ़ के अंतर्गत सभी ग्राम पंचायतों में जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा आमजन को आगजनी की घटनाओं की रोकथाम के संबंध में विभिन्न माध्यमों से जागरूक किया जा रहा है। इस कड़ी में 7 अप्रैल 2022 से जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से बन मंडल नालागढ़ की 240 ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों स्वयंसेवी संस्थाओं तथा नंबरदारों को आगजनी की घटनाओं के रोकथाम के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की जा रही है। इसके अतिरिक्त वन प्रचार मंडल शिमला द्वारा भी इस विषय में कई जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में क्षेत्र के लोगों को बताया जा रहा है कि बिना वन परीक्षेत्र अधिकारी की सवीकृति के निजी खेत अथवा घासनी में आग लगाना मना है है तथा इस विषय में उलंघना करने पर दोषी व्यक्ति से 15 सौ रुपए प्रति बीघा की दर से जुर्माना वसूला जाएगा। यशु दीप सिंह ने बताया कि आगजनी की संभावनाओं के दृष्टिगत वन मंडल नालागढ़ के अंतर्गत विभिन्न जंगली क्षेत्रों को वर्गीकृत किया गया है जिसमें 13 जंगली क्षेत्र उच्च संवेदनशील 36 जंगली क्षेत्र मध्यम संवेदनशील तथा 50 जंगली क्षेत्र कम संवेदनशील हैं। उन्होंने जानकारी दी कि जंगलों को आग से बचाने के लिए वन विभाग द्वारा दीर्घकालिक प्रयास किए जा रहे हैं जिसके तहत इस वर्ष जिला सोलन में 30 हेक्टेयर भूमि पर चीड़ के पेड़ के जंगलों में चौड़ी पत्ती वाले पेड़ पौधे लगाए जा रहे हैं जो कि गर्मियों में हरे भरे होने के कारण जंगलों को आग से बचाने में परोक्ष रूप से महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। उन्होंने बताया कि वनों से संबंधित आगजनी की घटनाएं ज्यादातर लोगों को द्वारा निजी भूमि में लगाई गई आग के फैलने से होती हैं इससे न केवल वन संपदा का नुकसान होता है बल्कि पर्यावरण संतुलन भी बिगड़ता है। इसके अतिरिक्त जंगलों में आग लगने से कई प्रकार के छोटे बड़े जीव जंतुओं की भी जलकर मौत हो जाती है जिनका पर्यावरण संतुलन में प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने इलाका निवासियों से आग्रह किया है कि जंगलों को आग से बचाने के लिए जंगली क्षेत्रों के आसपास सूखी पत्तियों को हटाएं, सिगरेट या बीड़ी का इस्तेमाल करने के पश्चात जंगल में न फैंके तथा जंगली आग से संबंधित किसी भी घटना की सूचना तुरंत दूरभाष नंबर 01795223124 पर दें। यशु दीप सिंह ने जानकारी दी कि वन अधिनियम 1927 की धारा 26 व भारतीय दंड संहिता की धारा 435 के अंतर्गत जंगल या इसके आसपास आग लगाना कानूनी अपराध है जिसके तहत दोषी को 7 वर्ष तक का कारावास तथा ₹25000 जुर्माना किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वनों की रक्षा पर्यावरण से जुड़ा हुआ विषय है तथा इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को सामूहिक प्रयास करना होगा। यशु दीप सिंह ने समाज के सभी वर्गों से पर्यावरण तथा वन संरक्षण में हर संभव सहयोग देने की अपील की है।

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