6 माह बाद भी नवगठित 6 पंचायतों को नहीं मिले अपने भवन

पुरानी पँचायतों के कार्यालयों से ही चल रहा है काम,
जनता को हो रही है रोजाना परेशान : भूपेन्द्र

(सरकाघाट)रितेश चौहान

धर्मपुर विकास खण्ड के सजाओपीपलु ज़िला परिषद वार्ड से पूर्व में रहे ज़िला पार्षद भूपेंद्र सिंह ने छह महीने पहले बनाई गई नई ग्राम पंचायतों के कार्यालय अभी तक भी पुरानी जगह से ही चलाने पर एतराज़ जताया है।उन्होंने नवगठित ग्राम पंचायतों के कार्यालय जल्दी नये पँचायत केंद्रों से संचालित करने और सारा रिकार्ड जल्दी शिफ्ट करने की मांग की है।भूपेंद्र सिंह ने बताया कि पँचायत चुनावों से पुराने सजाओपीपलु व वर्तमान ग्रयोह ज़िला परिषद क्षेत्र में आने वाली चोलथरा ग्राम पंचायत से सरौन, भदेहड़ से देवगढ़, सजाओपीपलु से भराड़ी-पिपली और जोढन और डरवाड़ से घरवासड़ा नई पँचायतें बनाई गई हैं।लेक़िन अभी तक सभी नवगठित ग्राम पंचायतों का सारा कामकाज पुरानी पंचायतों के दफ्तरों से ही हो रहा है।

जिससे अभी तक इन नई पंचायतों के बनने का कोई लाभ व सुविधा जनता को उपलब्ध नहीं हो रही है।वास्तव में लोगों को इससे अभी परेशानी ज्यादा हो रही है कियूंकि पँचायत प्रधान, उप प्रधान व वार्ड पंच कुछ जगह तो नये किराये के भवन में बैठते हैं लेकिन पँचायत सचिव, ग्राम रोज़गार सेवक व तकनीकी सहायक तथा पँचायत का रिकार्ड पुरानी जगहों पर ही है। इसलिए लोगों को दो दो जगहों के चक्कर लगाने पड़ रहे है।उन्होंने बताया कि सरौन पँचायत का कार्यालय अभी तक चोलथरा में ही बना हुआ है और इस पँचायत में तो अभी तक नया भवन किराये पर भी नहीं लिया गया है।ऐसी ही स्थिति जोढन और पिपली भराड़ी पंचायतों की है जिनका रिकार्ड अभी तक भी सजाओपीपलु में ही है। नवगठित ग्राम पंचायतों में से केवल देवगढ़ पँचायत का कार्यालय और रिकार्ड ही चोलगढ़ में स्थापित किये गए कार्यलय में शिफ्ट हो पाया है।डरवाड़ पँचायत का कार्यालय पहले से ही घरवासड़ा में था लेकिन डरवाड़ पँचायत के लिये गये भवन में अभी रिकार्ड शिफ्ट नहीँ किया गया है इसलिये सभी प्रकार का कार्यालय सबंधी काम अभी भी घरवासड़ा से ही चल रहा है।पूर्व ज़िला पार्षद ने जल्दी से जल्दी नई पंचायतों को नये मुख्यालयों से संचालित करने की मांग की है और सारा रिकॉर्ड जल्दी शिफ्ट होने की भी मांग की है।उन्होंने सरकार से ये भी मांग की है कि नई बनाई गई पंचायतों के बराबर पँचायत सचिवों, ग्रामीण रोज़गार सेवकों और तकनीकी सहायकों की नियुक्ति की जाये ताकि मनरेगा मज़दूरों को निर्धारित 120 दिन का काम उपलब्ध हो सके और अन्य काम व स्कीमो का ज्यादा से ज़्यादा फ़ायदा लाभार्थियों को मिल सके।

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