कुल्लू

कागजों में ही झूल रहा बिजली महादेव रोप-वे

घोषणा के बाद कई बार हुए निरीक्षण, अब तक शुरू नहीं हुआ प्रोजेक्ट

(कुल्लू)सुरेश भारद्वाज

कागजों से बाहर बिजली महादेव रोप-वे नहीं निकल पा रहा है। घोषणा से लेकर अब तक न जाने कितने निरीक्षण हुए होंगे, लेकिन धरातल पर अभी तक प्रोजेक्ट उतर नहीं पाया है। सियासत तक ही बिजली महादेव रोप-वे पिछले कई सालों से सिमित है। अभी तक तो अप्रोच रोड तक खोलने की कागजी कार्रवाई और निरीक्षण पूरा नहीं हो पाया है। हैरानी की बात यह है कि बिजली महादेव रोप-वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में शुमार है,  लेकिन इसके बावजूद अब तक बिजली महादेव रोप-वे कागजों में ही झूल रहा है।

हालांकि जब हिमाचल विधानसभा चुनाव का बिगुल बजा था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुल्लू आए थे, तो उन्होंने इस दौरान भी बिजली महादेव का जिक्र किया था। रोप-वे को लेकर पीएम प्रदेश सरकार से फीडबैक भी लेते रहे, लेकिन सरकार का लंबा अरसा बीत गया है, लेकिन अड़चन कहां रही है, यह स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है।

मंदिर कमेटी की हदबंदी पर बन गई है सहमति

मंदिर कमेटी की हदबंदी पर सहमति बन गई है। मंदिर परिसर की हद से बाहर यानी 70 मीटर नीचे रोप-वे बनेगा। जहां पहले प्रशासन और कंपनी द्वारा रोप-वे लगाने के लिए जगह चयनित की थी, वह मंदिर परिसर एरिया में आ गया था और कमेटी ने आपत्ति जताई थी। कमेटी मंदिर परिसर से 70 मीटर नीचे रोप-वे को लेकर नाराज नहीं थी। इस कमेटी ने मंदिर परिसर से करीब 70 मीटर नीचे चयनित की गई साइट को ठीक बताया और साइट विजिट कर उस पर मुहर लगा दी गई है।

सरकार से फिर करेंगे बात

पूर्व सांसद महेश्वर सिंह का कहना है कि यदि यह रोप-वे पेछा से लगता है, तो इससे खराहल घाटी के लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान होने थे। यह डिमांड पेछा के लोगों ने की थी और उपायुक्त से भी मिले थे। वहीं, रोप-वे के कार्य को अमलीजामा पहनाने और लोगों की डिमांड पूरा करने के लिए सरकार के समक्ष फिर बात रखी जाएगी।

कोरोना महामारी भी देरी की बड़ी वजह

बीते वर्ष कोरोना वायरस के कारण प्रदेश में कर्फ्यू लगने से 150 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले बिजली महादेव रोप-वे पर ब्रेक लगी रही। पहले जगह को लेकर काफी विवाद रहा, इसके बाद तत्कालीन उपायुक्त कुल्लू ने इस विवाद को सुलझाया। इसके बाद टीम ने सर्वेक्षण किया, तो जहां रोप-वे बनाया जाना था, वह जमीन मंदिर की थी। मंदिर कमेटी ने मंदिर से रोप-वे को दूर से बनाने की मांग की। फिर सर्वेक्षण हुआ, जिसमें मंदिर से 70 मीटर दूरी पर रोप-वे बनेगा। अब सर्वेंक्षण पूरा तो हो गया, लेकिन एकाएक कोरोना के चलते यह प्रोजेक्ट लटका रहा।
दो किलोमीटर लंबा होगा, एक घंटे में 600 लोग जाएंगे

बिजली महादेव मंदिर तक करीब दो किलोमीटर लंबा रोप-वे बनना प्रस्तावित है। रोप-वे से खराहल घाटी के बिजली महादेव को धार्मिक पर्यटन से जोड़ने की योजना है। प्रस्तावित योजना के तहत रोप-वे से एक घंटे के भीतर 600 लोगों को मंदिर तक ले जाने की क्षमता होगी।

पहले डेढ़ किलोमीटर अप्रोच रोड और पार्किंग बनेगी

तलोगी-बिजली महादेव रोप-वे बनने से पहले अप्रोच रोड और पार्किंग बनेगी। जानकारी के मुताबिक अभी एक-डे़ढ किलोमीटर बनने वाले अप्रोच रोड की कागजी औपचारिकताएं की जा रही हैं। पहले अप्रोच रोड बनाया जाएगा।

उषा ब्रेको कंपनी करेगी निर्माण

उषा ब्रेको कंपनी इस रोप-वे का निर्माण कार्य करेगी। कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर मनमित ने बताया कि ऑनलाइन एमसीए मामले को 12 दिसंबर, 2020 को ऑनलाइन अपलोड किया गया है। कंपनी इसका कार्य करेगी। तलोगी से बिजली महादेव रोप-वे बनेगा। नौ फरवरी को राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया गया।

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