ग्राम पंचायत देवरा व साथ लगती पंचायतो के निवासी सीमेंट कम्पनी के खिलाफ पर्यावरण सुरक्षा को लेकर मोर्चा खोलने को तैयार

स्वतन्त्र हिमाचल
(अर्की)कृष्णरघुवंशी

उपमंडल अर्की की देवरा पंचायत के ग्राम देवरा जोकि कांगू रिजर्व फारेस्ट के अंदर आता है उसमे लगभग 880 करोड़ की लागत से लगभग 1295 बीघा भूमि पर एशीयन कंक्रीट एन्ड सीमेंट (एसीएल) कम्पनी लिमिटेड 840 बीघा सरकारी व 455 बीघा निजी भूमि पर प्लांट लगाने वाली है। इस जिसके चलते पंचायत के वो लोग जिन्हें इस कम्पनी से सीधा लाभ प्राप्त होना है वो इस कम्पनी के लगने के इच्छुक है लेकिन कम्पनी द्वारा दिये जाने वाले भूमि के मुआवजे व अन्य कई मुद्दों पर सहमति न होने पर वह लोग अड़े हुए है।

दूसरी ओर ग्राम पंचायत देवरा के साथ लगती अन्य पंचायत के वो निवासी जो कम्पनी लगने से होने वाले प्रदूषण,पर्यावरण,संस्कृति एवं शांति के नाश के साथ होने वाली बीमारियों व अन्य नुकसान से सीधे प्रभावित होंगे वह इसके बारे में चिंतित एवम कम्पनी लगने से रुष्ट है। ज्ञात रहे कि जिला सोलन के अर्की विधान सभा क्षेत्र में पहले ही दो बड़ी सीमेंट कम्पनिया लगी है तथा साथ ही एक चुना पत्थर कम्पनी भी लगने को तैयार है।तथा अब एक और सीमेंट कम्पनी लगाने की स्वीकृति सरकार ने दे दी। पहले लगी दो सीमेंट कम्पनियों से होने वाले खनन,प्रदूषण,पर्यावरण नुकसान के चलते बाघा व दाड़लाघाट के साथ आसपास के क्षेत्र की आबोहवा बदल गई है वही देवरा में लगने वाले सीमेंट प्लांट से जहाँ पर्यावरण का नाश होगा वहीं जो जंगली पशु पक्षी इस रिजर्व फारेस्ट में निर्भय विचरण करते है उनका शिकार आदि भी निर्बाध रूप से अवैध शिकार होने लगेगा।

साथ ही शांत जंगल मे छोटे बड़े वाहनों के रात दिन आवागमन के लिए सड़क निर्माण मलबे, धूल एवम शोरगुल से स्थानीय जड़ीबूटियां व जंगल की शांति खत्म हो जाएगी। इसके साथ ही खनन के लिये किये जाने वाले धमाको से आस पास के ग्रामो में उपलब्ध प्राकृतिक जल स्रोत भी लुप्त हो जाये जिसके कारण जंगली जानवरों के अलावा स्थानीय लोगो को भी पानी की कमी हो जाएगी। साथ ही प्लांट में कार्य होने से निकलने वाली धूल से खेती एवम पशु आहार के रूप में उगने वाले चारे के पौधे एवम घास खत्म होने के पूरे आसार है। लोगो का कहना है कि यदि कोई स्थानीय गरीब आदमी इस कांगू रिजर्व जंगल मे अपने घर के लिए जलावन लकड़ी लाता है तो रिजर्व फारेस्ट का नियम बता कर उसकी डी आर काटी जाती है यहां तक कि गलती से कोई पेड़ कट जाए तो पुलिस में मुकदमा तक दर्ज कर दिया जाता है और इस कम्पनी के लगने से पूर्व ही जाने कितने इमारती व अन्य विभिन्न प्रजाति के वृक्षो को खुर्द बुर्द कर दिया गया है और  किया जाएगा

इस बारे में विभाग,प्रसाशन व सरकार चुप्पी साधे है।हालांकि इस कम्पनी के लगने से कुछ लोगो व सरमायेदारो को तो खुलकर आर्थिक लाभ होगा लेकिन पर्यावरण,प्रदूषण से होने वाले नुकसान तथा बीमारियों से स्थानीय पंचायत एवं साथ लगती पंचायतों के ग्रामनिवासियो को भुगतना पड़ेगा।

यह सब देखते हुए चलते स्थानीय पंचायत एवम आसपास के गांवो के लोगो ने सरकार से जनहित के साथ पर्यावरण को देखते हुये मांग की है कि इस कम्पनी को ना लगने दिया जाए। लोगो का कहना है कि वह शीघ्र ही एक समिति गठित कर कम्पनी लगने के खिलाफ एक मुहिम जारी कर जल्द ही ग्रीन ट्रिब्यूनल एवम महामहिम राज्यपाल से गुहार लगाने का मन बना चुके है।की यह सीमेंट कम्पनी ना लगे ।ताकि पर्यावरण एवं जंगल तथा जंगल मे निर्बाध रूप से विचरण करने जानवर सुरक्षित रह सके

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