मंडी

गुणों की खान है कचनार (कराले) की कलियां और फूल

 

स्वतंत्र हिमाचल
(जोगिंदरनगर) अंकित कुमार

हमारे आसपास प्रकृति में कई पेड़ पौधे हैं जो औषधीय गुणों से भरपूर हैं। हमारी प्रकृति ने हमें ऐसी कई औषधियां दी हैं, जिनके बारे में अगर हमें ज्ञान हो जाए, तो हम कई जानलेवा बीमारियों को अपने पास भी ना भटकने दें। कुदरत ने कई पेड़ पौधों को औषधीय गुणों से भरपूर रखा है। इन्हीं में से एक कचनार का पेड़ है जो हर तरह से लाभदायक है। यह ज्यादातर जंगली इलाकों में पाया जाता है। हर साल फरवरी-मार्च के महीने में ये पेड़ पूरी तरह फूलों से लद जाता है। मंडी जिला की स्थानीय भाषा में इसे कराले कहते हैं। मंडी जिला के अधिकांश क्षेत्रों में भी आजकल कचनार के पेड़ फूलों और कलियों से लदे हैं।

कचनार के फूलों की कली लंबी, हरी व गुलाबी रंग की होती है। इसकी कई प्रजातियां होती हैं। इनमें गुलाबी कचनार बेहद लाभकारी होता है। आयुर्वेद में इसे बेहद चमत्कारी और औषधीय गुणों से भरपूर वृक्ष माना जाता है। इसके फूल, पत्तियां, तना और जड़ यानि सभी चीजें किसी न किसी बीमारी का निराकरण करने में बेहद लाभकारी हैं। कचनार के फूल और कलियां वात रोग, जोड़ों के दर्द के लिए विशेष लाभकारी है।

इस वृक्ष की जानकारी रखने वालों का मानना है कि, आमतौर पर इसकी कलियों की सब्जी बनाई जाती है। साथ ही, इसके फूलों का रायता बनाया जाता है, जो खाने में स्वादिष्ट तो होता ही है, साथ ही इससे रक्त पित्त, फोड़े, फुंसियों की समस्या भी ठीक होती है। जानकारों का कहना है कि, ये बात बिल्कुल सत्य है कि, अगर कचनार की विषेशताएं लोगों को पता चल जाएं, तो आमतौर पर जंगली इलाकों में मिल जाने वाला ये वृक्ष दुर्लभ की श्रेणी में आ जाएगा।

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