मंडी

जयराम सरकार का मनरेगा मज़दूरों से भद्दा मजाक : भूपेंद्र

मात्र पांच रुपये दिहाड़ी बढ़ाना न्यायोचित नहीँ

(सरकाघाट)रितेश चौहान

सीटू से सबन्धित हिमाचल प्रदेश मनरेगा एवं निर्माण मज़दूर फेडरेशन ने हिमाचल सरकार द्धारा मनरेगा मज़दूरों की दिहाड़ी 198 रुपये से बढ़ाकर 203 रु करने के फ़ैसले को दुर्भाग्यपूर्ण और अन्यायपूर्ण बताया है।फेडरेशन के राज्य महासचिव व पूर्व ज़िला पार्षद भूपेंद्र सिंह द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने मनरेगा मज़दूरों के दैनिक वेतन में मात्र 5 रु की बढ़ोतरी की घोषणा की है जो एक प्रकार से मनरेगा मज़दूरों के साथ भद्दा मजाक है जिसकी मज़दूर यूनियन कड़ी निंदा करती है और मांग करती है कि मनरेगा मज़दूरों को न्यून्तम 300 रु दैनिक मज़दूरी दी जाये।

भूपेंद्र सिंह ने केंद्र व राज्य की भाजपा सरकार पर मनरेगा योजना को कमज़ोर करने का आरोप लगाया है जो लगातार मनरेगा के बजट में कटौती कर रही है जिस कारण मज़दूरों को 100 दिन का काम नहीं मिल रहा है।वहीं दूसरी तरफ हिमाचल प्रदेश में जयराम के नेतृत्व वाली सरकार तो मनरेगा मज़दूरों का बड़ी बेशर्मी से शोषण करने में लगी है जो उन्हें हिमाचल प्रदेश में अन्य मज़दूरों के बराबर दिहाड़ी भी अदा नहीँ कर रही है।

कियूंकि हिमाचल प्रदेश में अन्य सरकारी विभागों के मज़दूरों को 1 अप्रैल से 300 रु दिहाड़ी देने की घोषणा सरकार ने की है लेकिन ये बड़ी हैरानी औऱ भेदभावपूर्ण फैसला सरकार का है कि वह एक प्रदेश में एक समान काम के लिए एक बराबर वेतन नहीं दे रही है और एक समान वेतन नियम लागू नहीं कर रही है।मनरेगा मज़दूर जो आठ घंटे काम करते हैं और दूसरे दिहाड़ीदार भी आठ घंटे ही काम करते हैं लेकिन मनरेगा मज़दूरों को 97 रु दिन का कम दिया जा रहा है।

जिससे प्रदेश के 13 लाख परिवार व 25 लाख मनरेगा मज़दूरों का शोषण कर रही है और उसमें भी नब्बे प्रतिशत महिलाएं हैं जो मनरेगा में काम करती हैं इसप्रकार ये सरकार महिलाओं के साथ भेदभावपूर्ण व्यबहार कर रही है और उनका शोषण कर रही है।भूपेंद्र सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री ने ये बढ़ोतरी भी 17 मार्च को शिमला विधानसभा पर मज़दूरों की विशाल प्रदर्शन के बाद कि है जिसका आयोजन सीटू ने किया था और दिहाड़ी बढ़ाने के बारे में मुख्यमंत्री को माँगपत्र दिया था और चर्चा भी की थी लेकिन ये बढ़ोतरी तो मज़दूरों का मज़ाक उड़ाने जैसी हरक़त है।इसलिये मज़दूर फेडरेशन की मांग है कि इसे बढ़ाकर एक समान 300 रुपये किया जाये।इसके अलावा ये भी मांग है कि मनरेगा के लिए बजट बढ़ाया जाये और साल में दो सौ दिन के काम का प्रावधान किया जाये।साथ ही मज़दूरों को साप्ताहिक अवकाश दिया जाये और काम करने के लिए औजार भी दिये जायें तथा काम के बाद पैमाइस करने का नियम निरस्त किया जाये।

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