हिमाचल का पेंटर शुभम तरेडिया अपनी आवाज़ से देश वासियों को करेगा मोहित

इन्दौरा उपमण्डल के इंदपुर गांव का रहने वाला है शुभम तरेडिया

 

(इंदौरा)अजय शर्मा

संगीत वह साधना है जिससे मानव ही नहीं अपितु धरा पर मौजूद सारे पशु – पक्षी तक झूम उठते हैं। इसका उदाहरण स्वयं श्री कृष्ण जी हैं जो अपनी बांसुरी की धुन पर प्राणियों के साथ पशु – पक्षियों तक को अपने बस में कर लेते थे।

भगवान को संगीत के माध्यम से भक्तों तक ने अपने बस में कर के दिखाया है।
ऐसे ही जूनून के साथ देश व प्रदेश में कई लोग हुए हैं जिन्होंने अपनी आवाज के दम पर भगवान रूपी श्रोताओं को वश में किया और अपनी मधुर आवाज में लोगों को मंत्रमुग्ध किया।Shubham Taredia शुभम तरेडिया विधान सभा इंदौरा,इन्दौरा

देश प्रदेश में मधुर आवाज के कितने ही लोग हुए जिन्हें या तो मौका नहीं मिला या साधन संपन्न न होने के चलते उनका टैलेंट दम तोड़ गया। लेकिन सच्ची लगन व मधुर आवाज के दम पर कई प्रतिभावान गायकों ने अपना नाम इतिहास में दर्ज करवा लिया।
ऐसा ही एक गायक आजकल अपनी आवाज के दम पर एंड टीवी के सीज़न – 2 में पहुंचने में कामयाब हुआ है।

बात कर रहें हैं शुभम तरेडिया (shubham taredia)पुत्र शाम लाल की जो विधान सभा इंदौरा के इंदपुर गांव से संबंधित है।

इन्दौरा विधान सभा के शुभम तरेडिया(shubham taredia) को बचपन से ही गायकी का शौक था, लेकिन संसाधनों के अभाव के चलते वह गायकी की बारीकियां व सुर ताल में पारंगत नहीं हो पाया। पिता के गुजरने के बाद एक समय ऐसा भी आया कि जब सब लोग भविष्य के सपने संजोने में लगे होते है उसे लोगों के घरों में मेहनत मजदूरी करके पेट पालने तक कि नौबत आ गई।

लोगों के घरों में दिन में रंग – रोगन का काम करने के बाद घर पर रियाज करने का वक्त तक नहीं मिलता था, बावजूद इसके जब भी किसी की मधुर आवाज उसे सुनाई देती तो मन उस आवाज की तरफ बरबस ही खींचा जाता।

बचपन की 10 +2 तक की पढ़ाई स्थानीय स्कूल में करने के बाद 2013 में पिता का साया भी सर से जाता रहा, जो हमेशा उसे एक गायक के रूप में देखना चाहते थे। उनके सपने व कुछ कर गुजरने के जूनून ने इस कलाकार को और शक्ति दी और लोगों के घरों में मेहनत करके काम करते हुए पैसा इकट्ठा किया और वॉयस ऑफ पंजाब के डायरेक्टर तेजवंत किट्टू की एकेडमी जोकि उसे इंटरनेट पर सर्च करने के बाद मिली उसे लुधियाना जाकर ज्वॉइन कर लिया।

2 साल तक उनसे बहुत कुछ सीखा। जीवन के इस सफर में बहुत ही कटु और अच्छे अनुभव भी मिले, सतगुरु जी ने उसके बारे में कुछ अच्छा ही सोचा होगा तभी वह अवश्य पूरा होने के कगार पर है।
संघर्ष करने के बाद आज यह गायक इस मुकाम तक पहुंचने में सफल हो पाया है कि कई बार मास्टर सलीम के साथ भी स्टेज शो में जा चुका है।

शुभम तरेडिया(shubham taredia) मास्टर सलीम को अपना गुरु मानते हुए अपना बेहतर करने की हर वक्त कोशिश में रहता है। भेंट वार्ता के दौरान इस आवाज की प्रतिभा के मालिक ने बताया कि मेरी जगह कोई और इंसान होता तो शायद इतने संघर्षों के बाद शायद अब तक अपना गायकी के प्रति लगाव छोड़ चुका होता लेकिन भगवान को पाने के लिए भक्तों ने अपनी जान तक दाव पर लगाई है इसी आशय के साथ मेरा संगीत के प्रति लगाव है।संगीत ही मेरा सब कुछ है और यही मेरी अंतिम सांस तक मेरे साथ होगा।

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