हेडलाइन्स निर्माण एवं मैनेजमेंट की हिमाचल सरकार ने किया शिक्षा व्यवस्था का बंटाधार

कथित घोटालों, गड़बड़ियों,एवं अनियमितताओं की लिखी गई मोटी किताब

(कांगडा)मनोज  कुमार

आम आदमी पार्टी, हिमाचल प्रदेश इकाई ने सूबे की जय राम सरकार पर नियमित रूप से शिक्षा व्यवस्था में उठ रहे कथित घोटालों के आरोपों को लेकर जोरदार सियासी हमला बोला है। शिक्षा विभाग में व्याप्त कई तरह की धांधलियों, अनियमितताओं, घोटालों व गड़बड़ियों के चलते शिक्षा व्यवस्था का बंटाधार हो चुका है। आये दिन विभिन्न प्रकार के कथित आरोपों की एक भारी भरकम मोटी किताब लिखी जा चुकी है। हाल ही में हिमाचल प्रदेश के समग्र शिक्षा अभियान से किताबों की खरीद में करोड़ों रुपये के घोटाले के आरोप देश के प्रमुख प्रकाशक संघों ने अपने शिकायत पत्र में लगाये हैं और यह मामला राजभवन से लेकर राज्य सचिवालय तक पहुंच गया है।

आम आदमी पार्टी के राज्य प्रवक्ता श्री कल्याण भण्डारी ने बताया कि उक्त शिकायत पत्र में पिछले साल बिना टेंडर प्रक्रिया के चेहतों को करोड़ों रुपये का सरकारी सप्लाई आर्डर दिया गया है। क़ुछ लोगों को फायदा देने के लिए कथित रूप से एक फर्जीबाड़ा समग्र शिक्षा विभाग में चल रहा है और भारत सरकार द्वारा निर्धारित डिस्काउंट नियमों को ताक पर रख राज्य सरकार को भी करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा है। ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार में बैठे रसूखदार किरदार अपनी भूमिका निभा रहे हैं और प्रदेश सरकार ऑंख मूंद कर बैठे तमाशा देखने में व्यस्त है।

कल्याण भण्डारी ने प्रदेश सरकार पर  शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त करने के आरोपों की झड़ी लगाते हुए कहा कि वर्तमान सरकार पहले छात्रवृत्ति के घोटाले और फिर वर्दी घोटाले के आरोपों से घिर चुकी है जिसका माकूल जवाब सूबे की जनता को आज तक नहीं मिल सका है। जय राम सरकार पहली सरकार है जो राज्य के लाखों विद्यार्थियों को वर्दी उपलब्ध नहीं करवा सकी और बचे करोड़ों रुपये का हिसाब किताब देने में नाकामयाब रही है। घटिया किस्म की वर्दी व स्कूल बैग मुहैया कराने के आरोप भी वर्तमान सरकार पर लग चुके हैं। पिछले दो शैक्षणिक सत्र के बीस हजार से ज्यादा प्रदेश के मेधावी छात्रों को लैपटॉप मिलने का बेसब्री से इंतजार है और 2020-21 के सत्र को मिला कर यह संख्या तीस हजार से भी अधिक होने वाली है।

 

ऐसे में डिजिटल डिवाइड को मिटाने का प्रदेश सरकार का दावा खोखला है। नई शिक्षा नीति को लागू करने की दिशा में केवल अधिसूचना जारी कर इतिश्री कर ली गई और धरातल पर रती भर भी व्यवहारिक काम नहीं हुआ। व्यवसायिक शिक्षा के नाम पर 80 से ज्यादा स्कूलों में वोकेशनल ट्रेड शुरू करने की बात हेडलाइन्स तक ही सीमित रह गई और राज्य के आधा दर्जन सरकारी महाविद्यालयों में बी0वॉक पाठ्यक्रम आरम्भ करना प्रदेश सरकार का अधिकारिक जुमला साबित हुआ। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि ऐसे में वर्तमान सरकार का लगभग चार साल तक का कार्यकाल प्रिंट व डिजीटल मीडिया की सुर्खियों के निर्माण व हेडलाइन्स मैनेजमेंट तक सिमट कर रह गया है। लिहाजा शिक्षा व्यवस्था का बंटाधार हो गया है।

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