ग्राम पंचायत अम्ब टिल्ला झेल रही है पिछड़ेपन का दंस

स्वतंत्र हिमाचल

(अंब)अविनाश

आजादी के बहुत सालों बाद आज भी अम्ब उपमंडल तहसील मुख्यालय की अम्ब टिल्ला पंचायत पिछड़ेपन का शिकार है। जबकि इस पंचायत में विकासोन्मुखी इबारत लिखी जा सकती थी। यहां पर पुलिस की बटालियन समेत अनेकों विकासोन्मुखी कार्य सम्पादित करवाये जा सकते हैं। लोगों का कहना है कि और कुछ सम्भव नहीं तो कम से कम कारागार का निर्माण तो यहां करवाया जा सकता था। आज भी लोगों को अम्ब टिल्ला पंचायत में सर्वांगीण विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दरकार है।


माता चिंतपूर्णी के लिए जिला ऊना के चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र का दलोह गांव हमीरपुर जिला से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बहुत बड़ा वैकल्पिक मार्ग सिद्ध हो सकता था। वहीं पर दलोह गांव पिछड़ेपन का शिकार होकर परित्यक्त बन चुका है। अम्ब उपमंडल के पिछड़े गांवों की पंक्ति में दलोह गांव से पलायन कर चुके ग्रामीणों का पुनर्वास करवाया जा सकता है।

आज भी अम्ब उपमंडल के दुर्लभ भोगोलिक परिस्थितियों के घेरे में बसे दलोह को विकास होने का इंतज़ार है। इस गांव को सामान्य मूलभूत सुविधाओं को बहाल करवाने हेतु दो नये पुलों की दरकार है। अगर हिमाचल प्रदेश सरकार दलोह गांव के लिए दोनों ओर से यानि एक चौआर की तरफ से व दूसरा सपोरी-गंगोटी की तरफ से निर्मित करवाती है तो दलोह गांव में समग्र क्रांति का सूत्रपात करवाया जा सकता है। अभी तक सरकार की नजरें इनायत दलोह गांव की ओर नहीं हो रही है। यह बहुत बड़ी विकास बाधा है। यहां दोनों ओर से दलोह खड्ड पर दलोह गांव को पुल ना होने से दलोह सीनीयर सैकेंडरी स्कूल बंद होने के कगार पर है। दलोह गांव के लिए पुल और सड़क के अभाव ने ग्रामीणों के लिए बहुत बड़ी समस्या पैदा कर रखी है।
जिला ऊना हिमाचल प्रदेश का चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र सबसे पिछड़ा हुआ है। आजादी के बाद आज दिन तक दलोह गांव को मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध करवाने में सरकारों की नाकामयाबी यहां की हालत ब्यान करती है। अम्ब तहसील से दलोह गांव की दूरी मात्र 15 किलोमीटर है। यहां के लिए कोई बस सुविधा उपलब्ध नहीं है। यही कारण है कि अम्ब उपमंडल के अन्तर्गत अम्ब टिल्ला पंचायत का दलोह सबसे पिछड़ा व दुर्गम क्षेत्र माना जाता है। दलोह गांव के पिछड़ेपन का सबसे बड़ा कारण दलोह खड्ड पर पुल निर्माण का नहीं होना ही आंका जा सकता है। दलोह के लगते सभी कनियारी, रड़ोह,चौआर,सपोरी-गंगोटी आदि गांवों से बरसात में उफनती दलोह खड्ड से सटे रास्तों का सम्पर्क टूट जाता है। यही कारण है कि आज तक अम्ब तहसील उपमंडल से अम्ब-टिल्ला व दलोह गांव के लिए कोई भी स्थाई बस सुविधा बहाल नहीं करवाई जा सकी। दलोह गांव का राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय दलोह के छात्र छात्राओं और वहां जाने वाले स्कूल स्टाफ के लिए यह इलाका बदहाली का पर्याय है। नतीजतन दलोह स्कूल से विद्यार्थियों की लगातार घटती संख्या है जोकि वर्तमान में एक सौ से भी घटकर सिमट गई है। यही क्रम जारी रहा तो आने वाले समय में सरकार शिक्षा विभाग को मजबूरन दलोह स्कूल को बंद करना पड़ सकता है। किसी भी सरकार ने दलोह गांव को इसकी बदहाली से उभारने की कोई भी विकासात्मक गतिविधियों को कोई नीतिगत योजना साकार नहीं कराई गई। दलोह के पिछड़ेपन का मूल कारण दलोह खड्ड पर चौआर अथवा सपोरी-गंगोटी से पुल निर्माण ना होना पाया गया है। नतीजतन सभी ग्रामीण दलोह और इसके निकटवर्ती गांवों से धीरे धीरे पलायन करके अन्यत्र बसते चले गए। ग्रामीणों का मानना है कि आज भी सरकार प्राथमिक आधार पर दलोह गांव के लिए दोनों तरफ यानि चौआर सपोरी-गंगोटी की ओर से दलोह खड्ड पर दो पुलों का निर्माण किया जाता है तो दलोह गांव सर्वांगीण विकास की मुख्यधारा से जुड़ जायेगा। इन दो पुलों के निर्माण से राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय दलोह पर बंद होने के कगार पर छाये हुए खतरे के मंडराते बादल भी छंट जायेंगे। स्थानीय इलाकावासियों की मांग है कि अगर सरकार दलोह खड्ड पर इन दो पुलों के निर्माण के लिए स्वीकृति और बजट प्रावधान उपलब्ध कराती है तो दलोह गांव का कायाकल्प हो कर विकासोन्मुखी नई इबारत लिखी जायेगी। अतः हिमाचल प्रदेश सरकार को दरिया दिली दिखाते हुए दलोह गांव की दलोह खड्ड पर दो पुलों का निर्माण शीघ्रातिशीघ्र करवाना चाहिए।

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