काँगड़ा

गरीब किसान व मध्यमवर्गीय जनता के लिए सरकार का बजट निराशाजनक : रमेश राॅव

स्वतंत्र हिमाचल
( बैजनाथ)विजय कुमार

प्रदेश सचिव रमेश राॅव ने कहा कि और 2021का बजट.निराशाजनक गरीब,किसान व मध्यमवर्गीय जनता के लिए जनविरोधी बजट सरकार ने पेस किया,अब सरकार गरीब की जेब की दुश्मन बन चुकी हैं l पहलें ही देश कोविड19 के चलते बेरोजगारी और महंगाई आग में झुलस रहा है..आज रोज मरा की चीजों के दाम आसमान छु रहे हैं, उपर से डीजल और पेट्रोल में जो एक्स्ट्रा सेस लगाया इससे आने बालें समय में कीमतें और ज्यादा बड़ेगी जिससे देश में मंहगाई विकराल रूप धारण कर लेगी, और आम जनता पर इसका बोझ और ज्यादा पड़ेगा, पहले इस सरकार ने रसोई गैस की कीमतें बढा कर आम जनता पर बोझ डाला है, आज दालों के रेट आसमान छु रहे,खाने के तेल का रेट, दो सौ रुपये के करीब पहुँच चुका रिफाइंड का रेट,दुगुना हो चुका है,.. हाल में हर चाय कम्पनी ने सौ रुपये पर kg हर चाय के रेट बढ़ाएं है, इसी तरह हर कंपनी ने हर प्रोडक्ट के रेट बढ़ाएं है,

हर चीज आम जनता की खरीद से बहार होती जा रही है l सरकार को पूजीपतियों की चिंता छोड़ आम व गरीब जनता के लिए महगाई से राहत के लिए बजट में कुछ राहत पेक्ज देती या डीजल की कीमतें कम करती, जिससे महगाई में थोड़ा लगाम तो लगता l
डिपुओं में मिलने बाली हर चीज के रेट राज्य सरकारों ने पहले से ही बड़ा दिये जबकि कृषि क्षेत्र में इस कोरोना काल में एक कृषि ऐसा क्षेत्र रहा ,जहा किसान ने मेहंनत करना न छोड़ी फरपूर् फसल की पैदावार हुई है, फिर सरकार महगाई रोकने क्यु नाकाम साबित हुई l
इस बजट से आम जनता आस् लगाए बेठे थी,उनकी उमीदों पर केंद्र सरकार खरा नहीं उतर पाई, केंद्र सरकार सिर्फ देश की संपत्तियों व परिसंपत्तियों को पूंजीपतियों के हवाले कर में लगी रही है और बजट में उन्हीं की भलाई का ध्यान रखा गया l

उन्होंने कहा कि इस बजट की सबसे बड़ी बात यह उभर कर आई है कि देश की अर्थव्यवस्था आगे बढ़े या न बढ़े लेकिन देश की संपत्तियों और परिसंपत्तियों को बेचना है।
सूत्रों के मुताबिक इस बजट में 2 सरकारी बैंको का निजीकरण करने का एलान हुआ। पूर्व प्रधानमंत्री  इंदिरा गांधी  ने दलित,पीड़ित,शोषित,वंचित समाज की आर्थिक मजबूती के लिए बैंको का राष्ट्रीयकरण किया था। कांग्रेस के निर्णय सदैव जनता के हित में रहे हैं,अबकी सरकार जनता विरोधी है।

छोटे व मझौले कारोबारी, व्यापारी, और हजारों लाखों की संख्या में कोरोना काल में अपनी नौकरियां गवा चुके जो घरों में बैठे है, नौकरीपेशा वाले लोग, देश,के युवा, मध्यमवर्गीय परिवार सरकार के बजट पर आस टिकाए बैठे थे, बजट से कुछ राहत मिलती तो अपने परिवारों के साथ छोटे मोटे लघुउद्योग धंदे चला कर , परिवार का हाथ बंटा कर अपने परिवार को गतिमान बनाएंगे, पर आम जनता जनविरोधी बजट सब की नींद गवा चुका है  फिर मोदी सरकार आत्मनिर्भर भारत की डींगें हांक रही है। जहा अमीर, सिर्फ अमीर होता जा रहा और मध्यमवर्गीय गरीब, और गरीब को कोई पूछने बाला ही नहीं है,इसके के साथ स्वास्थ्य व रक्षा बजट में बढ़ोतरी की जानी जरुरी थी, जो कि नहीं की गई है।]

रोजगार के सृजन के लिए किसानों व कामगारों की मदद का बजट 2021 में कोई विशेष जिक्र नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ठीक ही बोल रहे हैं कि ऐसा बजट कम ही देखने को मिलता है। क्योंकि ऐसा जनविरोधी बजट आज तक के इतिहास में कभी इस देश में पेश नहीं किया गया है। हैरानी यह है कि जिन करदाताओं के दम पर बची खुची देश की अर्थव्यवस्था चल रही है।

उनको सरकार ने इस बजट में फुटी कौडी की राहत की घोषणा नहीं की है। महंगाई व महामारी से आम आदमी का जनजीवन दुश्वार है और केंद्र सरकार बजट में न ही कोरोना मुक्त टीका फ्री की बात कही जो कि सरकार की जिम्मेदारी बनती है हर देश के नागरिक की महामारी से रक्षा हेतु फ्री टीकाकरण करवाएं ll
उन्होंने कहा कि देश की चरमराई अर्थव्यवस्था को ठीक करने के लिए असाधारण बजट की जरूरत थी मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ है।

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