राशन महंगी और शराब सस्ती करना सरकार के जनता विरोधी फ़ैसले : हिमाचल किसान सभा खंड इकाई निरमंड

 

 

स्वतंत्र हिमाचल
(आनी) विनय गोस्वामी

 

हिमाचल किसान सभा खंड इकाई निरमंड ने प्रदेश सरकार द्वारा रोजमर्रा व आम जनता के उपयोग में होने वाले सरसों के तेल की कीमत बढ़ाने व शराब की कीमत घटाने की बात की नीति की कड़े शब्दों में निंदा करती है।

प्रदेश सरकार के मंत्रीमंडल द्वारा लिए गए निर्णय से यह पता चलता है कि यह सरकार आम जनता के प्रति कितनी संवेदनशील है।

किसान सभा जिला महासचिव देवकी नंद ,निरमण्ड ब्लॉक के अध्यक्ष पूर्ण ठाकुर, सचिव जगदीश ने एक संयुक्त बयान में कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा नई आवकारी नीति के तहत अब प्रदेश मे शराब सस्ती होगी व भूख मिटाने व जिंदा रहने के लिए सस्ता राशन मुहैया कराने से अपने हाथ पीछे खींच रही है, डिपुओं में मिलने वाले सरसों के दाम में 57 रुपये की बढ़ोतरी कर आम जनता पर आर्थिक बोझ डाला है।


उन्होंने कहा कि कहां तो सरकार को इस संकट के समय मे सस्ता राशन मुहैया करवाना चाहिए था परंतु यह सरकार आपदा में अवसर ढूंढ कर जनता विरोधी फैसले लेकर आम जनता की कमर तोड़ने पर तुली हुई है।
उन्होंने कहा कि यह सरकार का जनविरोधी फैसला है।

ऐसे वक़्त में जब एक तरफ प्रदेश की जनता कोरोना महामारी की मार झेल रही है, लाखों लोगों का रोजगार चला गया है, मनरेगा में रोजगार नहीं मिल रहा है ऐसे वक्त मे प्रदेश सरकार महगाई बढ़ाकर आम जनता पर आर्थिक बोझ डाल रही है।ऐसे समय में प्रदेश सरकार को आम जनता के रोजमरा की वस्तुओं की कीमतें कम करनी चाहिए थी,डिपुओं में मिलने वाले राशन की मात्रा बढ़ानी चाहिए थी लेकिन इस सरकार ने डिपुओं में मिलने वाले सरसों के तेल। की कीमत 160 रुपये कर दी है और बाजार मे इसके दाम 200 के पार हो गए हैं।डिपुओं मे मिलने वाली दालों के दाम भी बढ़ा दिए हैं।

उन्होंने कहा कि किसान सभा प्रदेश सरकार से कोरोना महामारी के समय पत्येक व्यक्ति के लिए अगले 6 महीने तक 10 किलो राशन ,कोरोना के कारण बेरोजगार हुये लोगों के लिये 7500 रुपये प्रति माह दिया जाए,मनरेगा में 120 दिन का रोज़गार देना सुनिश्चित किया जाए तथा ओलावृष्टि व तूफान से हुए नुकसान का मुआवजा किसानों व बागवानों को दिया जाए।

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