स्कूल की फीस को लेकर सरकार ले संज्ञान : पूर्ण चन्द

 

स्वतंत्र हिमाचल

(अंब )अविनाश

आम आदमी पार्टी प्रवक्ता पूर्ण चन्द ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए प्रदेश- वासियों से अपील की है कि स्कूल मे सिर्फ ट्यूशन फीस ही जमा करवाई जाए | और इस वक्तब्य पर सीधे सरकार को घेरा है की अपने आदेश पर पुनर्विचार करे और प्रदेश वासियों को अतिरिक्त बोझ तले न दबाया जाए | पार्टी प्रवक्ता ने कहा है की जब कोरोना महामारी के दौरान जब स्कूल की बसें , भवन , लैब या किसी अन्य तरह की किसी भी गतिबिधी मे जब बच्चे शामिल ही नहीं हुए तो फीस किस बात की ली जा रही है?

क्यों अभिभावकों को लूटा जा रहा है? अभिभावकों को भी चाहिए की आम आदमी पार्टी के साथ आकर सरकार को घेरा जाए ताकि प्रदेश सरकार इस तरह के तुगलगी फरमान न जारी करे | आम आदमी पारी, हिमाचल प्रदेश सरकार से यह भी जानना चाहती है की क्यों हर वार प्रदेश वासियों को दरकिनार कर पूंजीपतियों की ओर अपना रुख कर ले रही है ।आज तक के हर फैंसले में सरकार ने प्रदेश वासियों को दरकिनार किया है । इस महामारी के दौर मे बेरोजगारी व महंगाई की मार झेल रहे लोग क्यों इस बोझ तले दबाये जा रहे हैं? पूंजीपतियों का तो ध्यान तो रखा जा रहा है पर प्रदेश वासियो को सरकार ने अलग थलग कर दिया है ।इस तरह के आदेश यह सिद्ध करते है की सरकार सीधे और पर पूँजीपतियों का साथ दे रही या फिर ज़्यादातर स्कूल भी उन्ही के हैं ।

प्रदेश वासियों को यह समझना चाहिए कि अब सरकार कोरोना की आड़ में उनकी लूट कर रही है। बहुत लंबे समय से सरकार फीस को लेकर राजनीतिक षड्यंत्र कर रही है और इस पर कोई ठोस कदम नही उठा ले पाना शिक्षा मंत्री की व सरकार दोनो की नाकामी है । हाल ही में दिए आदेश के अनुसार सरकार अभिवाभको से लिखित में ले रही कि बच्चों को सकूल भेजना उन्ही की जिम्मेदारी है जब प्रदेश वासियों को यह निर्णय लेना है तो सरकार का फीस के मामले में भी दखल अंदाजी नही करनी चाहिए ।फीस देना या न देना अभिवाभको का निर्णय होना चाहिये । अगर सरकार को आगे आना है तो इसके लिए की निजी स्कूलों में काम करने वाले अध्यापको को दी जाने बाली सैलरी पर काम करे । आम आदमी पार्टी जानना चाहती है कि सरकार के इनके लिए क्या ठोस कदम उठा रही है ।यदि इस सब पर यदि कोई संज्ञान नही ले सकती या कोई भी निर्णय लेने असमर्थ है तो शिक्षा मंत्री व मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना चाहिए । क्योंकि सरकार पूरी तरह से आमजन के हितों की रक्षा करने में फेल रही

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