काँगड़ा

सरकार बदली निति बदली और प्रशिक्षण के बाद भी शारीरिक शिक्षक रह गए बेरोजगार: संदीप  घई

(कांगडा)मनोज कुमार

हिमाचल सरकार ने हम सभी बेरोजगारों को मान्यता प्राप्त संस्थानों के माध्यम से शारीरिक शिक्षा का प्रशिक्षण करवाया ताकि हमें रोजगार के अवसर प्राप्त हो सके और सरकारी स्कूलों में चल रहे खाली शारीरिक अध्यापकों के पदों की नियुक्ति हो सके मगर सरकार पिछले 4 वर्षों में एक भी शारीरिक शिक्षा का पद नहीं भर सकी बल्कि हिमाचल सरकार ने 5 दिसंबर 2018 को आरटीई एक्ट लागू कर दिया । जिसमें यह कंडीशन लगा दी गई कि मिडिल के जिन स्कूलों में 100 बच्चों की संख्या नहीं होगी, उसमें शारीरिक शिक्षा का पद नहीं भरा जाएगा।

 

इसकी जानकारी शारीरिक  अध्यापक संघ के  प्रदेशाध्यक्ष संदीप  घई व जिला अध्यक्ष अनिल धीमान ने  जारी प्रेस नोट मे दी। प्रदेश अध्यक्ष संदीप घई का कहना है कि क्या जिस स्कूल में 100 से कम बच्चे होंगे क्या उन स्कूलों के बच्चों को सरकार शारीरिक शिक्षा का ज्ञान नहीं करवाना चाहती उन बच्चों का क्या कसूर है ।हिमाचल सरकार ने अपने कार्यकाल में शारीरिक शिक्षा का एक भी पद नहीं भरा है। इस समय हिमाचल प्रदेश में शारीरिक शिक्षकों के मिडिल से लेकर सीनियर सेकेंडरी स्कूल तक लगभग 4000 से ज्यादा पद खाली चल रहे हैं यह जानकारी वर्तमान में माननीय शिक्षा मंत्री  गोविंद सिंह ठाकुर ने विधानसभा में दी थी। इसकी संख्या लगातार बढ़ रही है क्योंकि हर साल बहुत से शारीरिक शिक्षक अध्यापक रिटायर भी हो रहे हैं।

हम लगातार अपनी मांग माननीय शिक्षा मंत्री मुख्यमंत्री सभी मंत्री विधायकों अन्य मंत्री देश के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा केंद्रीय मंत्री देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी  को भी इसके बारे में अवगत करवा चुके हैं नरेंद्र मोदी  के कार्यालय से भी हिमाचल सरकार को इस पर कार्यवाही करने के आदेश प्राप्त हुए ,लेकिन उसके बाद भी आगे की कार्यवाही नहीं हो सकी ।अभी हाल ही में शिक्षा विभाग ने वित्त विभाग को 500 शारीरिक अध्यापकों के पदों को मंजूरी के लिए वित्त विभाग के पास भेजा है और वे वित्त विभाग हमारे माननीय मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर जी के पास है जब हम मुख्यमंत्री व शिक्षामंत्री से मिलते हैं तो हमें यह कह कर टाल दिया जाता है कि आपके पदों की भर्ती जल्द होगी लेकिन आज तक हमें झूठे आश्वासन ही मिलते आए अभी हाल ही में 6 मार्च को माननीय मुख्यमंत्री जी ने अपना चौथा बजट पेश किया उसमें उम्मीद थी कि हमारे शारीरिक अध्यापकों के पदों को सरकार अपने बजट में दिखाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बजट में शिक्षा विभाग में 4000 पद भरने को मंजूरी दी है लेकिन उसमें शारीरिक अध्यापक के पद है या नहीं इसका भी कोई पता नहीं।
बहुत से सरकारी स्कूल बिना शारीरिक अध्यापक से ही चलाए जा रहे हैं वहां पढ़ रहे बच्चे हर साल बिना शारीरिक अध्यापक से ही अपनी वार्षिक परीक्षाएं खेलकूद किए जा रहे हैं सरकार यह सब जानते हुए भी इसको नजरअंदाज कर रही है।

 

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