पौराणिक दृष्टि से सरेउलसर झील में दफ़न हैं कई राज

 सरेऊलसर झील में पाण्डवों का उगाया धान आज भी है मौजूद

स्वतंत्र हिमाचल
(आनी) विनय गोस्वामी

कुल्लू पर्यटन की दृष्टि से विश्वभर में सुप्रसिद्ध है। यहां अनेक पर्यटन स्थल हैं। देश-विदेश के पर्यटक यहां आकर भरपूर आनंद उठाते हैं जो यहां की अपार प्राकृतिक सुंदरता में खो जाते हैं। कुल्लू के आनी उपमंडल में सरेऊलसर नामक एकमात्र ऐसा स्थल है,जहाँ पर्यटक इसका नाम सुनते ही दर्शन करने की इच्छा से खींचे चले आते हैं।बताया जाता है कि सरेऊलसर (sareulasar lake) में पाण्डव आये थे उन्होंने यहाँ धान उगाया था। धान की डालियाँ आज भी इस झील में दिखाई पड़ती हैं जो यहाँ एकमात्र अवशेष के रूप में उपलब्ध है।

सरेउलसर झील जलोडीजोत से लगभग 3 किलोमीटर दूर सड़क के किनारे हैं।यहां की खूबसूरत एवं मनमोहक झील चारों ओर के वृक्षों से आच्छादित अपनी प्राकृतिक छटा को बिखेरे हुए हैं। सर्दियों में विशेषकर बर्फवारी के समय यहां पर जाना दुर्लभ होता है परंतु गर्मियों के मौसम में इस ठंडे स्थान का भ्रमण करने से पर्यटक अपने आप को रोक नहीं पाते।
यह झील बारहों महीने साफ सुथरी रहती तै।बृक्ष का एक भी पत्ता इस पर नजर नहीं आता क्योंकिं यहॉ आभी नाम की चिडिया रहती है जो पत्ता गिरते ही झील से उठा लेती है। झील की स्वच्छता यहाँ प्रकृति का कमाल है जो आभी नामक चिड़िया करती रहती है।

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(sareulasar lake)

इस झील के किनारे बूढ़ी नागिन की एक बड़ी पत्थर प्रतिमा है , यहां आकर श्रद्धालु बूढ़ी नागिन की पूजा अर्चना करके अपनी मनोकामना पूर्ण करने की इच्छा से घी दूध को भेंट करते हैं तथा झील के पानी को स्नान आदि के लिए ग्रहण करके लोग पाप मुक्त होते हैं। सरेऊलसर पर्यटन की दृष्टि से जितना रमणीक व दर्शनीय है उतना धार्मिक दृष्टि से भी नैसर्गिक है। इसके प्राचीन इतिहास की रोचक बात यह है कि यहां पांडवों ने धान उगाया था। झील के पिछली तरफ एक चट्टान पर धान की डालियां आज भी 12 महीना हरी-भरी दिखाई पड़ती हुई प्राचीन काल की साक्षी है।

पर्यटक यहाँ खूब लुत्फ उठाते हैं वे रात्रि ठहराव के लिए या तो जलोडीजोत में ठहरते हैं या विश्रामगृह खनाग में रूकते हैं। अधिकतर पर्यटक टैंट लगाकर अपनी चादर कम्बल से ही रात्रि पड़ाव डालते हैं। यहां खाने पीने की सुविधा है । सरेऊलसर में पर्यटक शांतिमय वातावरण में प्राकृतिक सौंदर्य का खूब आनंद बटोरते हैं । जनता की मांग है कि प्रदेश सरकार यहां बिजली, पानी की मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध करवाये तथा पर्यटकों को रात्रि ठहराव के लिए सराय भवन इत्यादि का निर्माण करे ताकि पर्यटन की दृष्टि से श्रेष्ठ पर्यटन स्थल बन सके।

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