मंडी

मिसाल : कनेर गाँव को आज़ादी के 73 साल बाद मिली सड़क

प्रदेश भर में मिसाल बने फतेहपुर पंचायत प्रधान
पहले किया अपने खर्चे पर सिंचाई योजना का निर्माण अब अपने ख़र्चे से निर्मित की सड़क

(सरकाघाट)रितेश चौहान

भारतीय सेना से रिटायर्ड सरकाघाट उपमंडल की फतेहपुर पंचायत के प्रधान अपने कार्यों की बदौलत प्रदेश भर के जनप्रतिनिधियों में एक मिसाल बने हैं l प्रधान द्वारा अपने पैसे से ना सिर्फ पंचायत की सिंचाई समस्या का समाधान किया बल्कि दशकों से राजनीतिक लारे लप्पो का शिकार बनी सड़क का भी खुद निर्माण करवाकर सैकड़ों ग्रामीणों को राहत प्रदान की है l पंचायत प्रधान द्वारा अपने पूर्व के कार्यकाल में इस सड़क के निर्माण को लेकर विधायक से लेकर कई विभागों से पत्राचार किया था कार्यकाल पूरा हो गया लेकिन सड़क नहीं बन पाई l

प्रधान ने हाल ही मैं संपन्न पंचायत चुनावों में वायदा किया था कि वह दशकों से जो सड़क ना बन पाई उसे वह तीन महीनों में तैयार करवा कर देंगे l फतेहपुर पंचायत प्रधान विधि चंद द्वारा पंचायत के लोगों को साथ लेकर स्थानीय विधायक के साथ-साथ खंड विकास अधिकारी और लोक निर्माण विभाग से संपर्क किया लेकिन जब उन्होंने लंबी विभागीय प्रक्रिया का हवाला दिया तो प्रधान ने स्वयं ही निर्माण कार्य करने की ठान ली और 1 महीने में ग्रामीणों के अथक परिश्रम के बाद करीब ₹84 हज़ार अपनी जेब से खर्च करके गांव को सड़क से जोड़ दिया l अब पंचायत के कनेर गांव को आज़ाद के 73 साल बाद सड़क नसीब हुई है l

गांव में सड़क पहुंचते ही ग्रामीण खुशी से फूले नहीं समा पा रहे हैं l प्रधान विधिचन्द की अगुवाई में ग्रामीणों ने इस सड़क के निर्माण कार्य को अंजाम दिया है। पंचायत प्रधान ने बताया कि कनेर गाँव फतेहपुर पंचायत के किनारे पर स्थित है और करीब 300 लोगों की आबादी वाले इस गाँव के लोगों को रसोईगैस के सिलेंडर अपने कंधे पर उठाकर लाने पड़ते थे।साथ ही गांव में यदि कोई व्यक्ति बीमारी से ग्रस्त हो जाता था तो उसे पालकी में उठाकर फतेहपुर तक सड़क किनारे लाना पड़ता था l ग्रामीणों नें पंचायत प्रधान का इस कार्य को करने के लिए आभार जताया है।

अपने पैसों से बनवा चुके हैं सिंचाई योजना पंचायत प्रधान गांव की सड़क निर्माण से पहले करीब 3 दशकों पुरानी सिंचाई योजना जो सड़क निर्माण और मलबे की भेंट चढ़ गई थी l अपने खर्चे पर जेसीबी मशीन लगाकर दोबारा इस योजना को ढूंढ निकाला और लोगों के लिए इस योजना को जीवंत किया l 50 हज़ार रुपए पल्ले से खर्च कर पंचायत के सैकड़ों लोगों की आजीविका बन चुकी है l इस सिंचाई योजना का पानी आज गांव के सैकड़ों लोगों के खेतों की जीविका का साधन भी बना हुआ है l

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