वार्ड सदस्यों को मासिक मानदेय, मोबाईल औऱ भत्ता देने की मांग

ऑनलाइन हाज़री लगाना अव्यवहारिक फ़ैसला : भूपेन्द्र सिंह

स्वतंत्र हिमाचल
(धर्मपुर) डी आर कटवाल

पंचायती राज संस्थाओं में चुने जाने वाले वार्ड सदस्य विकास कार्यों को अमली जामा पहनाने के गांव स्तर पर काम करते हैं।उन्ही के माध्यम से मनरेगा योजना के तहत मज़दूरों से कार्य करवाने का दायित्व सौंपा गया है।जिसके तहत वर्ष में उनको सभी पंजीकृत मजदूरों को 120 दिन का काम मुहैया कराना होता है।अब हिमाचल प्रदेश सरकार ने मनरेगा योजना के तहत काम करने वाले मजदूरों की दो समय ऑनलाईन हाज़री लगाने का फ़रमान किया है जिसके चलते अब उन्हें सुबह और शाम को सभी मज़दूरों के समूह में फ़ोटो लेकर बेबसाईट पर अपलोड करने अनिवार्य कर दिये गए हैं।इस फैसले को अव्यवहारिक बताते हुए पूर्व ज़िला परिषद सदस्य भूपेंद्र सिंह ने इसे वापिस लेने की मांग की है।उन्होंने बताया की एक मस्ट्रोल के मजदूरों को अलग अलग स्थानों पर कार्य सौंपा जाता है और उन्हें सुबह और शाम एक स्थान पर इकठ्ठा करना तर्कसंगत नहीं है।दूसरा बहुत से वार्ड सदस्यों के पास आई फ़ोन नहीं हैं इसलिए विभाग को उन्हें आई फ़ोन ख़रीद कर उपलब्ध कराने चाहिये। बहुत से बार्ड सदस्यों को इनका इस्तेमाल भी नहीं करते हैं साथ ही जिनके पास ये फ़ोन है भी उन्हें बच्चों की ऑनलाईन क्लासें लगाने में प्रयोग किया जा रहा है।।इसलिए विभाग को सभी वार्ड सदस्यों को आंगनवाड़ी और आशा वर्करों की तर्ज़ पर आई फ़ोन उपलब्ध कराने चाहिए और उन्हें हर माह रिचार्ज कराने के लिए अतिरिक्त राशी उपलब्ध करानी चाहिए।भूपेंद्र सिंह ने ये भी मांग की है कि वार्ड पंचों को हर माह फ़िक्स मानदेय देना चाहिए क्योंकि वर्तमान में उन्हें केवल दो मीटिंगों में भाग लेने की एवज़ में पांच सौ रुपये मिलते हैं जो किसी भी तरीके से पर्याप्त नहीं हैं।

भूपेंद्र सिंह ने बताया कि वार्ड सदस्यों को मनरेगा के अलावा अन्य मदों के तहत पंचायतों में आने वाली धनराशी को भी विकास कार्यों पर खर्च करना पड़ता है साथ ही जनता के अन्य कार्यों में भी मदद करनी पड़ती है।इस तरह वे फुलटाइम वर्कर की तरह ही काम करते हैं इसलिए उन्हें सरकार को हर माह निशिचित मानदेय अदा करना चाहिए।उन्होंने मनरेगा मजदूरों व अन्य मजदूरों की हाज़री में भेदभावपूर्ण तरीका अपनाये जाने पर भी सवाल खड़े किए हैं।ये बात गौरतलब है कि एक तरफ़ मनरेगा मजदूरों को अन्य मजदूरों को मिलने वाली 300 रु दिहाड़ी की तुलना में केवल 203 रु ही दिये जाते हैं और ये मज़दूरी भी कार्यों की एसेसमेंट करने के बाद दी जाती है।जिस कारण बहुत बार उन्हें निर्धारीत दिहाड़ी से कम ही मज़दूरी मिलती है।जबकि मनरेगा में सत्तर-अस्सी साल वाले बृद्ध भी कार्य करते हैं इसलिए उनके कार्यों की तुलना युवा मजदूरों के बराबर नहीं हो सकती है।लेकिन हिमाचल सरकार मनरेगा मजदूरों के कार्यों की असेसमेंट लोक निर्माण विभाग के शेड्यूल से की जा रही है। जबकि मनरेगा मज़दूरों के काम की असेस्मेंट के लिए अलग औऱ हल्के मापदंड होने चाहिए।मनरेगा मजदूरों को काम करने के लिए औजार न मिलने और मिस्त्री का प्रावधान न होने के कारण भी प्रोग्रेस कम आती है।इसलिए सरकार को मनरेगा मजदूरों को अन्य मजदूरों के बराबर तीन सौ रुपये दिहाड़ी तथा काम करने के लिए औजार उपलब्ध कराने चाहिए और उन्हें आठ घंटे काम करने पर पूरी दिहाड़ी मिलनी चाहिए।

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