कोरोना वैक्सीन के लिए जनप्रतिनिधियों को फ़्रंटलाईन वर्कर किया जाए घोषित : नरेश

जनप्रतिनिधियों से भेदभाव कर रही सरकार

(सरकाघाट)रितेश चौहान

प्रदेश सरकार द्वारा पंचायत प्रतिनिधियों को कोरोना वैक्सीन के लिए 18 से 45 साल की श्रेणियों शामिल ना करके उनसे साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है l यह बात ग्राम पंचायत मसेरन के युवा प्रधान एवं सरकाघाट बार के पूर्व उपाध्यक्ष एडवोकेट नरेश शर्मा द्वारा जारी प्रेस ब्यान मे कही l उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने पंचायत प्रतिनिधियों के कंधो पर हर प्रकार की जिम्मेदारी डाल दी है l यहां तक की कोरोना महामारी के दौर में वे लगातार अपनी सेवाएं दे रहे है l उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के तहत पंचायत प्रतिनिधि ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण से आइसोलेट हुए लोगों को दवाइयां व अन्य जरूरत का सामान मुहैया करवाना हो या फिर पंचायतों में टीकाकरण करवाना हो इन सब काम की जिम्मेदारी तो सरकार नें उन्हें डाल दी है l परंतु अधिकतर युवा पंचायत प्रतिनिधियों को इस श्रेणी से दूर रख कर उनके जख्मों पर नमक छिड़क दिया है l

 

एडवोकेट नरेश शर्मा ने कहा की हिमाचल सरकार द्वारा सरकारी और प्राइवेट सेक्टर की 22 श्रेणियों कोकोरोना वैक्सीन के लिए फ्रंटलाइन वर्कर घोषित किया है जिसके तहत इन श्रेणियों के वर्गों के अलावा निजी या फिर सरकारी शिक्षा संस्थानों के सभी कर्मचारियों को भी शामिल कर लिया गया है l जिन्हें 18-45 वर्ग में वैक्सीनेशन में प्राथमिकता दी जा रही है l इन श्रेणियों को केन्द्र के खर्चे पर वैक्सीनेशन प्रदेश सरकार लगाएगी लेकिन ना केंद्र ना ही प्रदेश सरकार ने 18 से 45 वर्ष के युवा पंचायत जनप्रतिनिधियों के बारे में कोई भी विचार किया है जो कि निंदनीय है l उन्होंने कहा जब भी पंचायत में किसी कोरोना संक्रमित की मृत्यु हो जाती है तो पंचायत प्रतिनिधि वहां उसके जलाने तक का बीड़ा उठाते हैं l उन्होंने सरकार से मांग की है की हिमाचल प्रदेश ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के तहत समस्त पंचायत प्रधान उपप्रधान वार्ड मेंबर पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सबको वैक्सीनेशन करवाई जाए और उन्हें फ्रंटलाइन वर्कर घोषित किया जाए l

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