बदहाल धर्मपुर अस्पताल,80 में से 62 पद खाली, बिस्तर बढ़ाने से समस्या का हल नहीं : भूपेंद्र

स्व्त्ंत्र हिमाचल

(सरकाघाट) रंजना ठाकुर

प्रदेश सरकार की उपेक्षा के कारण धर्मपुर का नागरिक अस्पताल बदहाली का दंश झेल रहा है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव एवं जिला परिषद सदस्य भूपेंद्र सिंह ने बताया कि इस अस्पताल की नहीं बल्कि पूरे विधानसभा के स्वास्थ्य केंद्रों की हालत खस्ता है।सौ बिस्तरों वाले धर्मपुर अस्पताल में कुल स्वीकृत 80 पदों में से 62 खाली पड़े हुए हैं।15 पद चिकित्सकों और 17 पद स्टॉफ नर्सों के रिक्त हैं। ब्लॉक कार्यकारिणी के रणताज राणा, कश्मीर सिंह, मिलाप चंदेल, बाला राम, करतार सिंह, रामचंद, प्रकाश वर्मा, प्रकाश सकलानी, लुदर सिंह, अरुण अत्रि, सुरेश शर्मा, मेहर सिंह और रूप चंद का कहना है कि धर्मपुर का अस्पताल एक डॉक्टर के हवाले है और राजनीतिक कारणों के चलते पांच डॉक्टर महज दो महीने में यहां से तबादला करा गए। चिकित्सकों की भारी कमी के चलते बीएमओ ने इस अस्पताल को संचालित करने के लिए जुगाड़ी व्यवस्था की है जिसके तहत अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के डॉक्टरों को यहां के लिए सप्ताह में दो तीन दिनों के लिए प्रतिनियुक्ति से काम चलाया जा रहा है।

जिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के डॉक्टर यहां भेजे जा रहे हैं उस क्षेत्र के मरीजों को भी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है। ज़िला पार्षद भूपेंद्र सिंह ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डरवाड़,सजाओपीपलु, टिहरा, चोलंगड़, स्योह,मढ़ी,कुम्हारड़ा, मंडप से डॉक्टरों से नागरिक अस्पताल धर्मपुर में बारी बारी सेवाएं ली जा रही हैं लेकिन धर्मपुर अस्पताल के लिए स्वीकृत 15 डॉक्टरों के पदों में से आज केवल मात्र एक डॉक्टर ही उपलब्ध है और उसी के सहारे ये अस्पताल चल रहा है।भूपेंद्र सिंह ने वर्तमान सरकार के वरिष्ठ मंत्री महेंद्र सिंह पर आरोप लगाया है कि वे अपने गृह क्षेत्र की जनता को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में नाकाम साबित हुए हैं और अपने गृह क्षेत्र के अस्पताल में ही डॉक्टर उपलब्ध नहीं करवा पा रहे हैं जो उनकी नाकामी को दर्शाती है।डॉक्टरों व अन्य सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों को पूरे खण्ड में कहीं भी पूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं हो रही हैं । सरकार केवल मात्र बिस्तरों की संख्या बढ़ाने की घोषणा करती रहती है ।संधोल और धर्मपुर में सौ सौ तथा टिहरा को पचास बिस्तरों का अस्पताल घोषित किया गया है लेकिन डॉक्टर व अन्य स्टाफ़ कहीं पर भी पूरा नहीं है और ख़ाली बिस्तरे ही मरीज़ों के ईलाज के लिए रखे गए हैं।

 

हैरानी की बात है कि 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एक्स-रे तक कि सुविधा उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि धर्मपुर में कायम की गई भय की राजनैतिक स्थिति के कारण दो तीन डॉक्टरों ने तो नौकरी से ही त्यागपत्र दे दिया है और कुछ ने यहां से ट्रांसफर करवा लिया।इस क्षेत्र में डॉक्टर व अन्य अधिकारी भी यहां आने से कतराते हैं जिसके लिए सीधे तौर पर यहां के मन्त्री जिम्मेदार हैं जो अपने गृह क्षेत्र में तीन सालों में जरूरत व सेंक्शन के अनुसार डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं करवा पाये हैं और कर्मचारियों के लिए काम करने का उचित माहौल तैयार नहीं करवा पाये हैं। जनता में वाहवाही लूटने के लिए संधोल, धर्मपुर और टिहरा में नागरिक अस्पताल बना दिये गए हैं लेकिन कहीं पर भी डॉक्टरों व अन्य स्टाफ़ के पूरे पद नहीं भरे गये हैं और न ही अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं।जिस कारण धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र की जनता को मजबूरी में हमीरपुर, टाण्डा, मंडी और शिमला तथा प्राईवेट अस्पतालों में मंहगे ईलाज करवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।माकपा ने सरकार से मांग की है कि धर्मपुर अस्पताल में खाली डॉक्टरों के पदों को जल्दी भरा जाए तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से यहां के लिए किये जा रहे डेपुटेशनों को रद्द किया जाये ताकि उन स्थानों पर भी जनता को स्वास्थ्य सेवाएं मिल सके।

 

हर महीने सीएमओ से लेकर सरकार तक करते है मांग : बीएमओ

बीएमओ संधोल डॉ अविनाश सिंह ने कहा की डॉक्टर और स्टाफ नर्स सहित जो भी पद रिक्त पड़े हैं उनको लेकर हर महीने रिक्त पद भरने की माँग की जाती है बल्कि सीएमओ मंडी और स्वास्थ्य विभाग को कई बार लिखा जा चुका है l भरोसा दिलाया है की जैसे ही नए डॉक्टर आएंगे रिक्त पड़े पद भर दिए जाएंगे l

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