मंडी

2014 के बाद की सभी बीमा पॉलिसियों को जी.एस.टी के दायरे से रखा जाए बाहर : राकेश चौहान

अभिकर्ताओं ने की पॉलिसी धारकों को मिलने वाले बोनस में बढ़ोतरी की मांग

(जोगिंदर नगर)क्रांति सूद

भारतीय जीवन बीमा निगम राष्ट्रीय अभिकर्ता संगठन के आवाहन पर निगम के साथ जुड़े हुए हैं। लगभग 40 करोड़ बीमा धारकों और इस निगम की रीड की हड्डी लगभग 12 लाख अभिकर्ता के हितों की अनदेखी पर निगम प्रबंधन और केंद्र सरकार से अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी रखा है। ये बात उत्तर भारत के अभिकर्ता संगठन महासचिव राकेश चौहान ने जारी ब्यान में कही। उन्होंने कहा कि अभिकर्ता संगठन लगातार यह मांग कर रहा है की पॉलिसी धारकों को मिलने वाले बोनस में बढ़ोतरी हो, तथा जनवरी 2014 के बाद बीमा पॉलिसियों को जी .एस. टी. के दायरे में लाया है,

उन सभी बीमा पॉलिसियों को जी.एस.टी के दायरे से बाहर रखा जाए, डायरेक्ट मार्केटिंग और ऑनलाइन बीमा पॉलिसी की बिक्री पर रिवेट को खत्म करें , बीमा अभिकर्ताओं को कमीशन आई.आर.डी.ए के द्वारा अनुमोदित दर से दिया जाए ,सी. एल .आई .ए के लिए 3 वर्षों तक न्यूनतम व्यवसाय की शर्तों पर छूट दी जाए, नॉन क्लब सदस्यों को भी मेडिक्लेम के साथ जोड़ा जाए, अभीकर्ताओं की ग्रेचटी को भी ग्रेच्टी अधिनियम के तहत लाया जाए।

साथ ही उसकी सीमा लगभग 20 लाख की जाए। उन्होंने बताया कि इन लंबित मांगों पर आज 23 मार्च को पूरे देश में अभिकर्ताओं के द्वारा रेस्ट डे के रूप में मनाया गया। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी 15 मार्च 2021 को देश के अभिकर्ताओं के द्वारा स्थानीय ब्रांच प्रबंधक के माध्यम से चेयरमैन भारतीय जीवन बीमा निगम को अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन भेजा गया है तथा शाखा के बाहर एक घंटा विरोध प्रदर्शन किया गया था।

उन्होंने कहा कि निगम प्रबंधन और सरकार को देश के 12 लाख अभिकर्ताओं ने चेताया है कि जल्द हमारी ओर पॉलिसी धारकों की मांगों पर निर्णय ले उसे नजरंदाज न करे अन्यथा आंदोलन लगातार चलता रहेगा। उन्होंने कहा कि आगामी वित्त वर्ष में भी कई तरह का व्यवसायिक नुकसान निगम को हो सकते है। आज इस देश की सबसे बड़ी वित्तीय कंपनी को सबसे ऊपर रखने वाले 12 लाख अभिकर्ता और लगभग 40 करोड़ पॉलिसी धारको की आवाज को राष्ट्रीय अभिकर्ता संगठन ने निगम प्रबंधन और केंद्र सरकार के समक्ष उठाया है। उनका अटूट विश्वास निगम प्रबंधन और उनकी कार्यशैली पर बना रहे ताकि भविष्य में विश्व की सबसे बड़ी बीमा कंपनी के अस्तित्व को खतरा पैदा ना हो ।

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