मुखर्जी ,उपाध्याय,अटल,आडवाणी के बाद मोदी और अमित शाह ने किया कमाल : कँवर

कभी भाजपा के  दो सांसदों पर हंसने वाली कांग्रेस पार्टी का आज जनता ने किया अस्तित्व खत्म,
भाजपा स्थापना दिवस के कुटलैहड़ कार्यक्रम में विशाल  जनसभा को सम्बोधित करते बोले कँवर
(राकेश राणा)बंगाणा
कुटलैहड़ विस् क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी का स्थापना दिवस बड़ी धूमधाम से मनाया। बही कैबिनट मन्त्री वीरेंद्र कँवर ने शिरकत करके जहाँ कुटलैहड़ भाजपा के कार्य कर्ताओ को बधाई देते हुए कहा भारतीय जनता पार्टी अपने स्वर्णिम काल में स्थापना दिवस मना रही है। छह अप्रैल 1980 को स्थापित बीजेपी ने 42 सालों का सफर पूरा कर लिया है। इस दौरान उसने तमाम उतार-चढ़ाव देख। कँवर ने सम्बोधन में कहा कि 1980 में शुरू हुई भारतीय जनता पार्टी  की विकास यात्रा देखते ही देखते कई पड़ावों व मंजिलों को तय कर चुकी है। कभी दो सांसदों वाली यह पार्टी आज की तारीख दूसरे सहयोगी दलों के लिए दो-चार सांसद व विधायक जितवा रही है। 6 अप्रैल को बीजेपी अपना स्थापना वर्ष मनाती रही है। 42 साल की हो चुकी यह पार्टी अपनी विकास यात्रा में कई महत्वपूर्ण और याद गार पल देखें। कँवर ने कहा कि छह अप्रैल 1980 को बीजेपी की स्थापना की गई थी। जनता पार्टी से अलग होकर एक ऐसे दल की नींव रखी गई जो भारतीय राजनीति में हिंदूत्व की राजनीति करने वाली पार्टी के रूप में विख्यात हुई है। कँवर ने कहा कि बीजेपी के पहले अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी थे। श्याम प्रसाद मुखर्जी दीनदयाल उपाध्याय , डॉ.बलराज मधोक  वाली भारतीय जनसंघ  का ही नया रूप बीजेपी को माना जाता है। जनसंघ का जनता पार्टी में विलय होने के कुछ ही सालों बाद वैचारिक मतभेद उभरकर सामने आने लगे। इसके बाद अलग संगठन बनाने का फैसला किया गया।
बीजेपी की नींव पड़ी।जनसंघ की स्थापना डॉ.श्याम प्रसाद मुखर्जी ने साल 1951 में की थी। इसका चुनाव चिन्ह दीपक हुआ करता था। जनता पार्टी में जनसंघ के विलय के बाद भी जनसंघ के सदस्य आरएसएस की सदस्यता नहीं छोड़े। जनता पार्टी के कई नेताओं को दो संगठनों की सदस्यता पर आपत्ति होती रहती थी। यही जनसंघ से जनता पार्टी में गए नेताओं के अलग होने की मुख्य वजह बनी। दरअसल, 1925 में डॉ हेडगवार ने राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ की स्थापाना की थी। आरएसएस को बीजेपी का मातृ संगठन माना जाता है। बीजेपी के नेता आरएसएस से अनिवार्य रूप से जुड़े रहते हैं। कँवर ने कहा कि जनसंघ हो या बीजेपी, यहां जोड़ियां काफी फेमस रही हैं। डॉ.श्याम प्रसाद मुखर्जी व दीनदयाल उपाध्याय की जोड़ी जनसंघ काल में प्रसिद्ध रही तो बीजेपी के उदय के बाद अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी की जोड़ी की कोई काट नहीं थी। नई भाजपा में नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी सबसे हिट मानी जा रही है। अटल-आडवाणी के युग के बाद मोदी-शाह के नेतृत्व में ही बीजेपी सबसे अधिक ताकतवर हुई है। कँवर ने कहा कि बीजेपी अपने स्थापना के बाद शुरूआत के पहले दशक में कड़े संघर्ष के दौर से गुजरी। जनसंघ के दीपक चुनाव चिन्ह के बाद भारतीय जनता पार्टी को कमल का फूल आवंटित हुआ। लेकिन कमल के फूल पर बीजेपी को चुनाव मैदान में उतरने का मौका 1984 में मिल सका। हालांकि, अपने पहले चुनाव में बीजेपी को कोई खास सफलता नहीं मिली। इसके महज दो सांसद ही जीतकर संसद में पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि रथ यात्रा ने बीजेपी को सत्ता का स्वाद चखाया। बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या तक की रथ यात्रा भारतीय राजनीति को बदलने में मुख्य भूमिका तो निभाई ही, पार्टी को भी सत्ता प्राप्ति की राह दिखला दी। यह वह दौर था जब वीपी सिंह के नेतृत्व वाले जनता दल को मंडल की राजनीति से फायदा पहुंच रहा था तो बीजेपी के एक हिंदूवादी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई। उन्होंने कहा कि आडवाणी के अयोध्या आंदोलन से धार्मिक ध्रुवीकरण को मजबूती मिला। आडवाणी की यात्रा के दौरान सांप्रदायिक दंगे भी हुए लेकिन धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण ने बीजेपी को फायदा पहुंचाया। हालांकि, 1989 में बीजेपी दो से 89 सीटों तक का सफर तय कर चुकी थी। लेकिन तब वह वीपी सिंह के जनता दल के साथ मिलकर चुनाव मैदान में थी।कँवर ने कहा कि अडवाणी की रथयात्रा अपना काम कर चुका था। देश में धार्मिक आधार पर वोटों का ध्रुवीकरण शुरू हो चुका था। लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में राममंदिर आंदोलन तेज हो चुका था। और फिर आई 6 दिसंबर, 1992 की तारीख थी। छह दिसंबर को अयोध्या में बाबरी ढांचा गिरा दिया गया। ढांचा तोड़ने का आरोप बीजेपी के कई बड़े नेताओं पर लगा, इसमें आडवाणी, कल्याण सिंह, उमा भारती, मुरलीमनोहर जोशी आदि थे। बीजेपी के तीन राज्यो की सरकारों को बर्खास्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि 1996 का वह साल भी आया जब दो सांसदों वाली पार्टी लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी थी। राष्ट्रपति ने बीजेपी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में केंद्र की सत्ता का बागडोर बीजेपी के हाथ में आया। लेकिन 13 दिनों में यह सरकार गिर गई।
उन्होंने कहा कि दो साल बाद एक बार फिर अटल बिहारी बाजपेयी के नेतृत्व में बीजेपी को सरकार बनाने का मौका मिला। 1998 में बनी यह सरकार 13 महीने चली। कई दलों के सहयोग से सरकार का गठन किया गया था लेकिन सफलता नहीं मिली। 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एक बार फिर लोकसभा का चुनाव भाजपा ने लड़ा। लेकिन बीजेपी इस बार 20 दलों से अधिक के साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ी। इस गठबंधन को 294 सीटों पर जीत मिली, जिसमें अकेले बीजेपी के 182 सांसद जीते थे। अटल जी तीसरी बार प्रधानमंत्री बनें लेकिन इस बार अपना कार्यकाल उन्होंने पूरा किया।उन्होंने कहा कि हालांकि, 2004 और 2009 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को सरकार बनाने वाला जनादेश नहीं मिला।
वह विपक्ष में बैठी। यह वह दौर था जब अटल बिहारी वाजपेयी अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा कर राजनीति से सन्यास ले चुके थे। वह आडवाणी के नेतृत्व में चुनाव में जाने का ऐलान कर चुके थे। उन्होंने कहा कि अटल सरकार के कार्यकाल पूरा होने के बाद लालकृष्ण आडवाणी को पीएम के चेहरे के रूप में पेश किया गया लेकिन बीजेपी को 2004 और 2009 में सरकार बनाने लायक जनादेश नहीं मिला। 2014 आते-आते बीजेपी में चेहरा बदलने की मांग जोर पकड़ चुकी थी। 2014 के आम चुनाव के पहले गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को बीजेपी संगठन ने प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया। एक नए युग की शुरूआत हो चुकी थी। 2014 के आम चुनाव हुए, दस साल से सत्ता संभाल रही डॉ.मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार को जनता नकार चुकी थी। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए गठबंधन को जनता ने प्रचंड बहुमत से जीत दिलाया। बीजेपी 282 सीटों के साथ सरकार बनाई, नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनें। 2019 में बीजेपी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक बार फिर केंद्र की सरकार में आई। यही नहीं कांग्रेस देश के विभिन्न राज्यों से सिमटती गई और बीजेपी एक-एककर राज्यों की सरकारें भी बनाती गई। आज 42 साल की इस यात्रा में बीजेपी सबसे ताकतवर राजनीतिक दल के रूप में उभर चुकी है।
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कँवर ने कहा कि पूर्व यूपीए सरकारों के समय ही कश्मीर भारत के लिए नासूर बनाकर जम्मू कश्मीर को अलग देश बनाने का काम किया गया। जिसमें जम्मू कश्मीर का अपना निशान अपना संबिधान तैयार किया गया। और कश्मीर का अलग प्रधानमंत्री बनने के लिए जोर आजमाइश शुरू हुई। लेकिन एनडीए ने इसे स्वीकार नहीं किया। और देश ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने कश्मीर से धारा 370 ओर 35 ए खत्म करके पूरे देश मे एक निशान तिरंगा एक संबिधान एबम कानून को लागू करके इस नासूर को खत्म किया है। इस मौके पर भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मदन राणा, हिम्फेड निदेशक चरणजीत शर्मा, कुटलैहड़ भाजपा महामंत्री मास्टर रमेश शर्मा, जिला भाजपा एससी मोर्चा के अध्यक्ष सुरम सिंह,मिल्क फेड निदेशक राजेन्द्र मलांगढ़ कुटलैहड़ भाजपा मंडल के उपाध्यक्ष राज कुमार राणा, बीडीसी सदस्य राजेन्द्र रिंकू,सतीश धीमान,प्रकाश धीमान, शोशल मीडिया अध्यक्ष सुशील रिंकू,बीडीसी राज कुमार, किसान मोर्चा अध्यक्ष बलबंत बर्मा, के अलाबा सभी प्रोकोष्ठों के अध्यक्ष सदस्य पंचायत प्रधान उपप्रधान एबम सैंकड़ो भाजपा कार्यकर्ता मौजूद थे।

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