कुल्लू

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में आजीविका सुनिश्चित कर रहा आनी विकास खंड

इस साल आनी विकास खंड में तय लक्ष्य से अधिक बनाए स्वंय सहायता समूह

2255000 रुपए का फंड चालू वित्त वर्ष में स्वंय सहायता समूहों को हो चुका है वितरित

 

स्वतंत्र हिमाचल
(आनी) विनय गोस्वामी

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के लक्ष्यों को हासिल करने और ग्रामीण आजीविका को सुनिश्चित करने के लिए जहां सरकार प्रयासरत है वहीं विकास खंड आनी भी इस कार्य में कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग कर रहा है। खंड विकास कार्यालय आनी की इस योजना के तहत गंभीरता इससे पता चलती है कि बीते एक साल में तय लक्ष्य से अधिक स्वंय सहायता समूह के गठन को मंजूरी दी गई है। इन समूहों न सिर्फ मंजूरी दी गई है बल्कि इनको अभी तक स्टार्ट अप फंड और रिवालविंग फंड के तहत करीब 22 लाख 55 हजार की राशि भी वितरित की जा चुकी है। इस फंड के द्वारा महिलाएं विभिन्न प्रकार के स्वरोजगार से जुड़कर अपनी आजीविका को सुनिश्चित कर रही हैं।

इस साल मार्च तक विकास खंड के तहत 75 स्वंय सहायता समूह बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था लेकिन 120 समूहों का गठन कर लिया गया है। इसको स्टार्ट अप फंड भी बांट दिया गया है। विकास खंड के तहत कुल 221 स्वंय सहायता समूह राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत पंजीकृत हो चुके हैं। ये स्वंय सहायता समूह कृषि संबंधि गतिविधियों, हस्त शिल्प कला और अन्य प्रकार के लघु व्यवसाय के तहत अपनी आजीविका प्राप्त कर रहे हैं।

खंड विकास कार्यालय की ओर से इस योजना में स्टार्ट अप फंड के तहत 2500 रुपए प्रति समूह और छह माह बाद रिवाल्विंग फंड के तहत 15000 रुपए राशि वितरित की जाती है। महिलाओं द्वारा बनाए गए समूहों में समूहों के भीतर आतंरिक ऋण की भी व्यवस्था रहती है। खंड विकास अधिकारी जीसी पाठक का कहना है कि इस योजना को सिरे चढ़ाने के लिए खंड विकास कार्यालय प्रशासन कृत संकल्प है। इस वित्त वर्ष में योजना के तहत अधिकतर लक्ष्य पूरे किए गए हैं और स्वंय सहायता समूहों का गठन लक्ष्य से अधिक किया गया है। आगामी समय में योजना के तहत महिलाओं के उत्थान के लिए दृढ़ता से कार्य किया जाएगा।

32 लाख रुपए का ऋण बांटा, 43.5 लाख का लक्ष्य

 

विकास खंड आनी द्वारा बैंकों के माध्यम से इसी योजना के तहत इस साल अभी तक महिलाओं के स्वंय सहायता समूहों को व्यवसाय करने के लिए 32 लाख रुपए तक का ऋण भी वितरित करवा चुका है। खंड द्वारा 43.5 लाख रुपए का ऋण योजना के तहत वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके चलते महिलाओं को खुद के व्यवसाय कर महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण का रास्ता जहां खुला है वहीं महिलाओं का भी आत्मनिर्भर होने के प्रति रुझान बढ़ा है।

5 लाख तक ऋण की है सुविधा

 

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वंय सहायता समूहों को व्यवसाय करने के लिए 5 लाख रुपए तक के ऋण का प्रावधान है। शुरुआत में खंड विकास कार्यालय के तहत 1 लाख रुपए का ऋण पात्र स्वंय सहायता समूह को वितरित किया जाता है। यदि ऋण वापसी में स्वंय सहायता समूह नियमों का पालन करता है तो इसके पश्चात 3 लाख रुपए का ऋण समूहों को वितरित किया जा सकता है। इसी तरह 5 लाख रुपए तक का ऋण योजना के तहत स्वंय सहायता समूह प्राप्त कर सकते हैं।

स्वंय सहायता समूह में हों कम से कम 5 महिलाएं

 

स्वंय सहायता समूह बनाने के लिए कम से कम 5 महिलाओं का होना जरूरी है। समूह में पदाधिकारियों के चयन के बाद स्वंय की गतिविधियां निर्धारित करें। इसके पश्चात पंजीकरण के लिए खंड विकास कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है। स्टार्ट अप फंड समूहों को पंजीकरण के तुरंत बाद दिया जाता है ताकि महिलाओं को अपनी गतिविधियों को चलाने के लिए सहायता मिल सके।

क्या है राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन – ग्रामीण विकास मंत्रालय का उददेश्य ग्रामीण गरीब परिवारों को देश की मुख्यधारा से जोड़ना और विभिन्न कार्यक्रमों के जरिये उनकी गरीबी दूर करना है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने जून, 2011 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) की शुरूआत की थी।

29 मार्च, 2016 से एनआरएलएम का नाम बदल कर डीएवाई-एनआरएलएम (दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) कर दिया गया हैं एवं उक्त कार्यक्रम, सरकार का गरीब, विशेष रूप से महिलाओं हेतु मजबूत संस्थानों के निर्माण एवं वित्तीय सेवाओं और आजीविका सेवाओं से इन्हे जोड़ने का प्रमुख कार्यक्रम है।

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