कोरोना संकट के बीच चौंतड़ा ब्लॉक में 93 नए लोगों ने मनरेगा को बनाया रोजगार का जरिया

चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 58 हजार मानव कार्य दिवस अर्जित, गत वर्ष के मुकाबले 278 प्रतिशत अधिक
अब तक कुल 4089 लोगों को मुहैया करवाया है रोजगार जिसमें महिलाओं की है 91 प्रतिशत भागीदारी

(जोगिन्दर नगर)क्रांति सूद

वैश्विक महामारी कोविड 19 संकट के बीच आज इन्सान एक तरफ जहां जिंदगी व मौत से लड़ रहा है तो दूसरी ओर रोजगार का भी गंभीर संकट पैदा हो रहा है। कोरोना महामारी की रोकथाम को लगाए जा रहे लॉकडाउन व कोरोना कफर्यू के बीच सैंकड़ों ऐसे परिवार भी हैं जो दूसरे प्रदेशों में रोजी रोटी के धंधे व नौकरियों को छोडक़र अपने घर वापिस पहुंचे हैं। ऐसे परिवारों एवं लोगों के लिए महात्मा गांधी रोजगार गांरटी (मनरेगा) योजना सहारा प्रदान कर रही है। अकेले मंडी जिला के चौंतड़ा विकास खंड की ही बात करें तो चालू वित्तीय वर्ष के पहले दो माह के दौरान ही 93 ऐसे नये जॉब कॉर्ड होल्डर इस योजना के साथ न केवल जुड़े हैं बल्कि उनके लिए आज मनरेगा रोजगार का जरिया भी बना है।


मनरेगा की दृष्टि से चौंतड़ा विकास खंड की बात करें तो चालू वित्तीय वर्ष के महज दो माह के भीतर ही 58, 039 मानव कार्य दिवस अर्जित कर लिये गए हैं जो गत वित्तीय वर्ष के तहत निर्धारित लक्ष्य से 278 प्रतिशत अधिक है। ऐसे में निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि मनरेगा इस कोविड संकट काल में ग्रामीणों के लिए रोजगार का एक बड़ा जरिया साबित हो रही है। इन सब के बीच सबसे अहम बात यह है कि इस अवधि के दौरान अर्जित कुल मानव दिवसों में से अकेले महिलाओं ने ही 50 हजार 654 मानव दिवस अर्जित किये हैं जो कुल प्रतिशत का लगभग 88 प्रतिशत है। आंकड़ों की बात करें तो चौंतड़ा ब्लॉक में कुल 20 हजार 351 मनरेगा जॉब कार्ड होल्डर हैं जिनमें से चालू वित्तीय वर्ष के दौरान अब तक 4089 को रोजगार उपलब्ध करवाया गया है जिनमें अकेले 3 हजार 741 महिलाएं शामिल हैं जो कुल का लगभग 91 प्रतिशत है। ऐसे में ग्रामीण महिलाओं के लिए मनरेगा रोजगार का एक अहम जरिया भी साबित हो रहा है।

यही नहीं गत दो माह के दौरान मनरेगा के माध्यम से 706 मस्टरोल जारी किये गए हैं। जिनमें अप्रैल माह के दौरान 411 जिसमें पहले पखवाड़े में 179 व दूसरे पखवाड़े में 232 मस्टरोल जबकि मई माह के दौरान अब तक 295 मस्टरोल जारी हो चुके हैं जिसमें पहले पखवाड़े में 187 जबकि दूसरे पखवाड़े में अब तक 108 मस्टरोल शामिल हैं। मनरेगा के तहत वर्तमान में कुल 1231 कार्य चल रहे हैं तथा अब तक लगभग 1 करोड 70 लाख रूपये की राशि व्यय की जा चुकी है। इस तरह मनरेगा न केवल ग्रामीण लोगों के लिए कोविड 19 के इस संकट भरे समय में रोजगार प्रदान करने में सहायक सिद्ध हो रही है बल्कि जिन लोगों की रोजी रोटी कोरोना संकट के बीच चली गई, आज उनका ये सहारा भी बन रही है।

क्या कहते हैं अधिकारी

इस संबंध में खंड विकास अधिकारी, चौंतड़ा विवेक चौहान का कहना है कि वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान ब्लॉक की 42 ग्राम पंचायतों में 93 नए लोगों को न केवल जॉब कार्ड जारी किये गए हैं बल्कि उन्हे मनरेगा के तहत रोजगार भी उपलब्ध करवाया गया है। उन्होने बताया कि अब तक दो माह के भीतर ही ब्लॉक में कुल 58,039 मानव कार्य दिवस अर्जित कर लिये गए हैं जो निर्धारित लक्ष्य से 274 प्रतिशत अधिक है। इस अवधि के दौरान महिलाओं की भागीदारी लगभग 91 प्रतिशत दर्ज की गई है।

 

जिला परिषद सदस्य कुशाल भारद्वाज द्वारा जल शक्ति विभाग के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलने के बाद विभाग ने आज ही मनारु स्थित हैण्ड पम्प को जरुरी मशीनरी और सामग्री भेज कर ठीक करवा दिया। कुशाल भारद्वाज ने कहा कि जब तक उनके जिला परिषद के वार्ड के एक घर में भी पानी की समस्या है, वे विभाग को कटघरे में खड़ा करते रहेंगे और अपना संघर्ष जारी रखेंगे। फिलहाल इस हैंड पम्प को ठीक करवाने के लिए उन्होंने जलशक्ति विभाग के अधिकारीयों व कर्मचारियों का धन्यवाद भी किया

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