काँगड़ा

आस्था : बाबा सिद्ध चानो जी के दरबार मिलती है सब विकारों से मुक्ति

उत्तर भारत के लोगों की अटूट आस्था और न्याय के प्रतीक,नहीं मिल रहा हो न्याय तो यहां मिलता है न्याय

(कांगड़ा)मनोज कुमार

कांगड़ा जिले के धरोहर गाँव परागपुर के निकट स्थित बाबा सिद्ध चानो जी का मंदिर डाँगड़ा गांव् में है।जिनको इस कलयुग में न्याय का देवता माना जाता है। । मंदिर में सुबह और शाम  आरती की जाती है। इस दरबार का भेद आज तक कोई नही जान सका ।बाबा चानो सिद्ध – उत्तर भारत के लोगों की अटूट आस्था और न्याय के प्रतीक हैं जिसका कार्य नहीं बनता, जो कोर्ट के झंझटो से मुक्त होना चाहता है, या किसी पर बुरी शक्ति का साया हो तो बाबा जी के दरबार में इन सब विकारों से मुक्ति मिलती है। बाबा सिद्ध चानो जी को इस कलयुग में न्याय का देवता माना जाता है। बाबा का दरबार कलयुग में साक्षात भगवान का दरबार है।यहां बाबा सिद्ध चानो को न्याय के देवता के रूप में पूजा जाता है।

पुजारी वर्ग के अनुसार…….

मंदिर के पुजारियों की मानें तो बाबा सिद्ध चानो जी का मंदिर 400 वर्षो से भी पुराना है। लोगो की मान्यता यह है कि जिसका कार्य कहीं नहीं बनता, कोर्ट के झंझट से मुक्त होने के लिए और दुखों से मुक्ति पाने के लिए लोग बाबाजी के दरवाजे आते हैं।
बाबा सिद्ध चानो जी द्वारा आज से काफी वर्ष पहले परागपुर गाँव मे प्रकट हुए थे बाबा ने अपने विश्राम का स्थान एक ऊंचे वृक्ष के नीचे रखा था। बाबा के विश्राम करने से पहले वह वृक्ष बिल्कुल सूखा हुआ था, लेकिन बाबा जी स्थान ग्रहण करते ही आज वह वृक्ष हरा भरा हो गया है।लोग नई फसल का ओरा चढ़ाकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। घर में सुख और समृद्धि के लिए बाबा सिद्ध चानो के मंदिर में प्रार्थना करते हैं।


बाबा सिद्ध चानो जी के उत्तर भारत में बहुत से मंदिर है।  वैसे तो इन मंदिरों में हर दिन ही भक्तों का तांता लगा रहता है लेकिन मंगलवार और शनिवार के दिन यहां आने वाले भक्तों की संख्या कई गुणा बढ़ जाती है।बाबा सिद्ध चानो को न्याय का देवता और सच्ची सरकार के रूप में पूजा जाता है, कहते हैं जिस किसी व्यक्ति को कहीं न्याय नहीं मिलता उसे बाबा के दरबार में न्याय जरूर मिलता है।

क्या है कथा…….
कहा जाता है कि बाबा सिद्ध चानो के दर में सच्चे मन से मन्नत मांगी जाए तो वो हमेशा पूरी होती है। बाबा सिद्ध चानो इतने दयालु हैं कि वह अपने दरबार में सच्ची श्रद्धा से मन्नत मांगने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की पुकार उसी वक्त सुनकर अपना फैसला सुना देते हैं। यही कारण है कि बाबा के दर हिमाचल भर से ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों से भी भक्त खींचे चले आते हैं। इस मंदिर के बारे में एक कथा प्रचलित है। चाणूर नाम के एक मल्लयोद्धा की पत्नी का नाम लूणा था। चाणूर को मल्ल सम्राट की उपाधि हासिल थी, जिससे उसका नाम दूर-दूर तक मशहूर था। भगवान श्रीकृष्ण ने चाणूर को वरदान दिया कि तुम कलियुग में बाबा सिद्ध चानो के नाम से विख्यात होगें व जो भी भक्त आपके दरबार में कोई मन्नत मांगेगा तुरंत उसकी मनोकामना पूरी होगी। तब से लेकर आज तक जो कोई भी चानो सिद्ध मंदिर में पुकार करता है उसको इन्साफ जरूर मिलता है।यही कारण है कि बाबा के दर हिमाचल भर से ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों से भी भक्त खींचे चले आते हैं।

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