कुल्लू

नहीं बनने देंगे प्रोजेक्ट,उत्तराखंड त्रासदी से सहमे लोगों ने बैठक कर लिया निर्णय

स्वतंत्र हिमाचल (कुल्लू)सुरेश भारद्वाज


उत्तराखंड में अलखनंदा घाटी में ग्लेशियर के कारण बांध टूटने से जो तबाही का मंजर पेश आया है, उसे देखते हुए जनजातीय जिला लाहुल-स्पीति के गौशाल पंचायत के ग्रामीणों ने चंद्रभागा घाटी में प्रस्तावित जल विद्युत परियोजनाओं को न बनने देने का प्रण लिया।  गौशाल पंचायत के पूर्व प्रधान मेघ सिंह ने कहा कि लाहुल जैसी घाटी जोकि ग्लेशियर टूटने और एवलांच गिरने से हिमालय क्षेत्र में सबसे ज्यादा प्रभावित रहता है। वहां पर सरकार 56 जलविद्युत योजनाएं बनाने की योजना बना रही है। इससे पूरी लाहुल घाटी उत्तराखंड की तरह त्रासदी की राह पर चली जाएगी।

 महिला मंडल गौशाल की सदस्य देकिड ने कहा कि हम अपने वनों को इतने समय से बचा रहे हैं। यहां तक कि महिला मंडल ने जंगल से धूप तक लाने में पाबंदी लगाई हुई है, ताकि भूस्खलन और एवलांच से गांव बचा रहे।  गौशाल पंचायत की प्रधान सुशीला राणा ने कहा कि उन्होंने एसजेवीएनएल द्वारा बनाई जा रही 104 मेगावाट की तांदी परियोजना को अनापत्ति नहीं दी है और न ही भविष्य में देंगे। सेब लाहुल-स्पीति के उपाध्यक्ष विक्रम कटोच ने कहा कि अलखनंदा में जो हुआ, उससे हम बहुत आहत हैं और वहां के प्रभावित समाज से अपनी संवेदना रखते हुए लाहुल में विनाशकारी विद्युत परियोजनाओं के खिलाफ जनजागरण के मुहिम को मजबूती से आगे बढ़ाएंगे। लिहाजा, अब लाहुल के लोगों ने निर्णय लिया है कि लाहुल में प्रस्तावित प्रोजेक्ट को बनने नहीं दिया जाएगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!