धर्मपुर में पँचायत चुनावों का रोस्टर जारी होने से पहले ही जलशक्ति मन्त्री कर रहे हैं उमीदवारों का चयन


मंत्री की कथित शय पर की जा रही हैं पंचायते और सीटें रिज़र्व
ज़िला परिषद सदस्य भूपेंद्र सिंह ने पूछा उन्हें कैसे पता चला रोस्टर


स्वतंत्र हिमाचल ( सरकाघाट)रंजना ठाकुर


हिमाचल प्रदेश में अगले साल जनवरी माह में पँचायत चुनाव होने वाले हैं।हालांकि अभी तक चुनाव आयोग ने अधिसूचना जारी नहीँ की है और न ही उपायुक्तों ने रोस्टर जारी किया है।लेक़िन धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक व वर्तमान सरकार के जलशक्ति मन्त्री पिछले तीन दिनों से अलग अलग जगह जा कर अपने उमीदवारों का चयन करने में लगे हैं। इस बारे ज़िला परिषद सदस्य भूपेंद्र सिंह ने सवाल खड़े किए हैं कि मन्त्री को पंचायतों व ज़िला परिषद के रोस्टर की जानकारी पहले ही कैसे मिल गई है? जबकि बाकी किसी को भी अभी तक रोस्टर की जानकारी नहीं है।उन्होंने आरोप लगाया है कि सत्ताधारी दल के मन्त्री को प्रशासन ये सब सूचनायें कैसे दे रहा है इस बारे जांच होनी चाहिये और सबन्धित अधिकारियों पर राज्य चुनाव आयोग को कड़ी कारवाई करनी चाहिए ताकि चुनाव सबंधी सभी जानकारियाँ निष्पक्षता और पारदर्शिता के आधार पर बिना किसी राजनैतिक हस्तक्षेप व भेदभाव के एक समान रूप में जारी हो सके।

भूपेंद्र सिंह ने बताया कि सजाओपीपलु ज़िला परिषद वार्ड से हटाई गई ग्राम पंचायत सजाओपीपलु, जोढन और सरी पंचायतों ने इस फेरबदल का विरोध किया है और संधोल क्षेत्र की गवैला पँचायत ने भी अपना विरोध दर्ज कराया है जिस बारे अभी उपयुक्त मंडी ने अपना निर्णय नहीं दिया है।लेकिन मन्त्री ने इस बार्ड के लिए भी उमीदवार तय कर दिया है। इससे स्पस्ट है कि इस ज़िला परिषद वार्ड में जो कांट छांट की गई है वो सब राजनैतिक आधार पर की गई है और जो आपत्तियां जनता ने दर्ज कराई हैं वो शायद औपचारिकता बन कर ही रह जायेगी।

भूपेंद्र सिंह ने राज्य चुनाव आयोग से मांग की है कि प्रदेश स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव कराने तथा रोस्टर की अधिसूचना जारी होने से पहले उसे सत्ताधारी पार्टी के नेताओं को पहले लीक करने पर रोक लगाई जाए और चुनाव में पारदर्शिता सुनिश्ति की जाये।भूपेंद्र सिंह ने ये भी कहा कि आज़कल हिमाचल प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामले हर रोज़ बढ़ रहे हैं और उसकी रोकथाम के लिए मुख्यमंत्री ने पिछली मन्त्रीमण्डल की मीटिंग में सभी मंत्रियों को अलग अलग जिलों में कोरोना रोकथाम के उपायों व प्रबंधों की मॉनिटरिंग का जिम्मा सौंपा है। लेकिन धर्मपुर में इस कार्य के बजाये मन्त्री पँचायतों व ज़िला परिषद के उमीदवारों का चयन करने के लिए बैठकें कर रहे हैं जो उनकी प्राथमिकता को दर्शाता है। वे सत्ता और मंत्रिपद का दुरूपयोग कर रहे हैं जबकि पँचायत चुनाव पार्टी आधारित न होकर गैर राजनैतिक होते हैं।

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