दौलतपुर का ऐतिहासिक नौण प्राचीन काल की अद्भुत धरोहर

(कांगड़ा)मनोज कुमार

आजादी के कुछ समय बाद 1955 में निर्मित दौलतपुर का नौण आज भी पुराने जमाने की याद ताजा कर देता है। लगभग छह दशक से भी पुराने इस जल स्रोत से दौलतपुर के इलावा नजदीक के गांवों के बाशिंदों की अनमोल यादें जुड़ी हैं। सीमित जल संसाधनों के उस दौर में जब गर्मी के मौसम में छोटे जलस्रोत सूख जाते थे तो 2 – 3 कि०मी० की दूरी से लोग यहां से पेयजल ले जाया करते थे।

स्थानीय निवासी इसके स्वादिष्ट जल को आज भी उसी लगन के साथ घर लाते हैं जैसे 1950 के दशक में लाते थे। इसके साथ ही बने शिव मंदिर एव॔ हनुमानजी की प्रतिमा का प्रभाव और लोगों की आस्था के साथ मिलकर ये नौण (बावड़ी) प्राचीनता और आधुनिकता के बीच कड़ी की भूमिका निभा रहा है। स्थानीय निवासी इसके रख रखाव व सफाई के प्रति पूरी सजगता दिखाते हैं जिसमें कस्बे के वरिष्ठ बुद्धिजीवी युवा पीढ़ी का मार्गदर्शन करते रहते हैं। पानी भरने के लिए यहां दो हैंडपंप की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही कुछ दूरी पर एक छोटी बावड़ी (नौण) भी है जो स्नान आदि कार्यों के लिए प्रयोग होती है।
   इसके साथ ही बनी एक पक्की पगडंडी के रास्ते लोग  ढुगियाल व गणेश घाटी होते हुए कांगड़ा आया जाया करते थे क्योंकि उस समय आवाजाही के साधन सीमित थे। दौलतपुर मुख्य बाजार से 50 मीटर की दूरी पर स्थित इस नौण के साथ एक चबूतरा (टियाला) भी लोगों की यादों में दर्ज है जो रंगमंच की पहचान था। जिसे उस समय की मशहूर नाटक मंडलियां नाटकों के मंचन के लिए इस्तेमाल किया करती थीं। इसके इलावा दौलतपुर की सराय व बीबी की कोठी यहां की प्राचीन धरोहरों में शामिल थीं जो आज अपना अस्तित्व लगभग खो चुके हैं। लेकिन नौण का जीवनदायी जल वर्षों तक लोगों को अपने अतीत से जोड़ने में सफल हो ऐसी कामना कस्बे का हर नागरिक करता है। जानकारों का कहना है कि प्राचीन धरोहर हमारी संस्कृति को दर्शाती है जिसे विलुप्त होने से बचाने के लिए हर नागरिक को आगे आना चाहिए, वही आने वाली पीढ़ी को इस प्राचीन धरोहर को संजोए रखने के लिए जागरूक करना चाहिए।

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