काँगड़ा

शक्तिपीठ मां श्री बज्रेश्वरी मंदिर में घृत मंडल पर्व की तैयारियां शुरु

मंदिर के पुजारियों ने मक्खन बनाने का काम किया शुरू

(कांगड़ा)मनोज कुमार


शक्तिपीठ बज्रेश्वरी देवी मंदिर में मकर संक्रान्ति 14 जनवरी से शुरू होने जा रहे घृत मंडल पर्व की तैयारियां शुरू हो गई हैं। माता की पिंडी पर देसी घी को एक सौ एक बार पानी से धोकर मक्खन तैयार करने का कार्य पुजारियों ने शुरू कर दिया है।लगभग 13.50 क्विंटल देसी घी पिंडी पर चढ़ाने के लिए श्रद्धालुओं ने दान स्वरूप भेंट किया है।

वहीं पुजारी वर्ग द्वारा 10 क्विंटन घी मक्खन के रुप में तैयार कर दिया गया है।मक्खन बनाने के लिए देसी घी दान देने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी  बढ़ती जा रही है।घृत पर्व के दिन श्रदालुओं को गर्भ ग्रह में अंदर जाने की अनुमति नहीं मिलेगी, श्रद्धालु मक्खन से बनाए जाने वाली माता की पिंडी के दूर से ही दर्शन कर सकेंगे।
 
मकर संक्रांति पर मां की पिंडी पर चढ़ने वाले मक्खन को बनाने की विधि आसान नहीं है। ठंड के बावजूद देसी घी को शीतल जल में एक सौ एक बार धोकर मक्खन बनाने के दौरान हाथ सुन्न से हो जाते हैं, पर मां के आशीर्वाद से यह काम जारी रहता है।पुजारियों का कहना है कि माता के आशीर्वाद से घृत पर्व के सभी कार्य स्वयं हो जाते हैं। 14 जनवरी की रात्रि मां की पावन पिंडी पर मक्खन का लेप किया जाएगा।मक्खन बनाने के लिए जुटे पुजारियों में अनुपम शर्मा, सवेद शर्मा, नितिन शर्मा, मिथुन शर्मा,  आशीष शर्मा, आयुष शर्मा, सचिन शर्मा, शिवनंदन शर्मा, राघव शर्मा, मनमोहन शर्मा ने तक लगभग 10 क्विंटल मक्खन तैयार कर लिया है। श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में देसी घी दान देने की प्रक्रिया चल रही है। मक्कखन बानने का कार्य 13 जनवरी तक चलेगा।

उपमंडल अधिकारी कांगड़ा मंदिर सहायक आयुक्त अभिषेक वर्मा  ने बताया अभी तक मंदिर प्रशासन को लगभग 13.50 क्विंटल देसी घी पिंडी पर चढ़ाने के लिए श्रद्धालुओं ने दान स्वरूप भेंट किया है। श्रद्धालुओं से अपील की है कि 13 जनवरी तक दान आने वाले देसी घी को मंदिर प्रशासन के पास जमा करवा दें और उसके बाद दान में आने वाले देसी घी का प्रयोग मक्खन बनाने में नही किया जाएगा। उन्होने बताया कि घृत पर्व के लिए मंदिर प्रशासन ने तैयारियां कर ली है।

क्या है मान्यता

पौराणिक कथा के अनुसार मां बज्रेश्वरी देवी जब जालंधर दैत्य से युद्ध करते हुए घायल हो गईं तब देवताओं ने उनके घावों पर मक्खन से लेप किया था। तभी से यह परंपरा चली आ रही है। मान्यता है कि सात दिन तक मक्खन माता की पिंडी पर चढ़ा रहता है। सातवें दिन पिंडी से मक्खन उतारने की प्रक्रिया शुरू होती है, फिर इन्हें श्रद्धालुओं में प्रसाद के तौर पर बांटा जाता है। यह भी मान्यता है कि इस प्रसाद को खाया नहीं अपितु शरीर पर लगाने से चरम जैसे रोग दूर होते हैं।

फोटो: मक्खन तैयार करते मन्दिर के  पुजारी गण।

फ़ोटो : तैयार किया गया मक्खन।

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