उपेक्षा का शिकार राजसीकाल का आध्यात्मिक केन्द्र तथा पर्यटन स्थल बंगलाधार

स्वतंत्र हिमाचल (चुराग) राज ठाकुर

मण्डी जिला की करसोग तहसील के अंतर्गत करसोग-चुराग मार्ग पर सड़क के साथ है चीट्टाधारठू गांव।यहां से दायीं ओर पक्की सड़क एक अलग शाखा के रुप में चुराग-भणोल कुफरी-झरान्डी को जाती है।इसी सड़क के साथ एक किलोमीटर दूर स्थित चुराग गांव का प्रवेशद्वार है।यहाँ से एक रास्ता ऊपर की ओर सिंचाई और जन-स्वास्थ्य विभाग के सहायक अभियंता कार्यालय की ओर जाता है।

चुराग के इस पड़ाव से कार्यालय तक छोटी गाड़ियों तथा पैदल भी पहुंचा जा सकता है।कार्यालय से कुछ दूरी पर चुराग और आस-पास की पंचायतों को जल की आपूर्ति करने हेतू विशाल भण्डारण टैंक जहां बने हैं,वह स्थान बंगलाधार के नाम से प्रसिद्ध है।बंगलाधार के नाम के विषय मे युवा पीढ़ी को भी खास पता नहीं है कि यह नाम कैसे पड़ा। राजसी काल में सुकेत शासक ने इस पहाड़ी टेकड़ी पर एक बंगला अर्थात भवन बनाया।इस बंगले के कारण इस स्थान का नाम बंगलाधार पड़ा।

उचित रख-रखाव और सरकारी उदासीनता के कारण रियासती शासनकाल का यह बंगला तो अब यहाँ पर नहीं है लेकिन इस बंगले के खंडहर में बदल जाने के बाद इसके पत्थरों से जो जल भण्डारण टैंक बनाए गये हैं वे आज धरोहर स्थलों की अनदेखी को बखूबी बयान कर रहे हैं।पानी के टैंकों के पास ही एक छोटा सा सूखा ताल है।इस ताल में अराध्य देवता की पिण्डी भी है।यह स्थान थलादेव जी,सुनानी नाग जी तथा टौणा देओ जी की भी विश्राम स्थली होने के कारण आध्यात्मिक दृष्टि से भी स्थानीय लोगों की आस्था का केन्द्र भी है।इस स्थान पर वर्ष में एक बार मेला भी लगता है।इस स्थान से शिकारीदेवी,कमरुनाग,दोफाधार,च्वासी-धमून,कचीन घाटी,किन्नौर,नारकंडा-शिमला-बैहड़ीधार,रेश्टाधार के लुभाने नजारों के साथ दूर-दराज के अनेक दिव्य स्थलों के साक्षात दर्शन इस स्थान की शोभा को और चार चाँद लगा देते हैं।चीड़ की पत्तियों से टकराती शीतल हवा का मधुर संगीत आगन्तुकों को बहुत रोमांचित करता है।लेेकिन यह दुर्भाग्य का विषय है कि इस ऐतिहासिक स्थान का विकास नहीं हो पाया है।इस धरोहर स्थल की दयनीय स्थिति इसकी बहाली की दास्तान खुद बयान कर रही है।इस स्थान को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा सकता है।पिकनिक स्पॉट के रूप में चिन्हित किया जा सकता है।यहाँ पर पंचवटी वाटिका का निर्माण कर इस ऐतिहासिक धरोहर का गौरव लौटाया जा सकता है।

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