शिमला

आखिर कब मिलेगा मेरे देश की बेटियों की आत्माओं को इंसाफ

स्वतंत्र हिमाचल

आखिर कोटखाई की इस बेटी को इंसाफ कब मिलेगा । क्या कसूर था इसका क्यों हैवानो ने इसे मार दिया । कहाँ है लोकतंत्र जहां बेटियां सुरक्षित नही ।क्या इसे लोकतंत्र कहते है जहां इंसाफ नही मिलता । वर्षों से इस बेटी के माता पिता इंसाफ मांग रहे है । उनकी आंखों का पानी सूख चुका है । परन्तु आरोपी अभी भी कानून की पकड़ से कोसों दूर हैं । हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ प्रदेश प्रबन्धन सदस्य व संघर्ष मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण शर्मा ने कहा कि जिस देश मे बेटियां सुरक्षित नही वहां पर लोकतंत्र सिर्फ किताबों तक ही सीमित है । एक बच्ची जिसे स्कूल में उसके माता पिता ने पढ़ने के लिए भेजा था । जिस बेटी ने बड़ी होकर एक देश सेवक बनना था उसे कुछ नीच लोगों ने हैवानियत दिखाते हुए बेरहमी से मार दिया गया । कानून चुप ।

क्या कारण है कि गरीबों को इंसाफ नही मिलता । जिस बच्ची ने अभी दसवीं पास नही की थी जिसने अभी जीना था । उसे क्यों मार दिया गया । हर साल बेटियों के साथ दुर्व्यहार होते है । उन्हें हवस का शिकार बनाया जाता है । परन्तु कानून भी उन लोगों का साथ देता है जो कानून को नही मानते । इस बेटी को ही नही बल्कि हर उस बेटी को इंसाफ मिलना चाहिए जो आज जिंदा नही है पर उनकी आत्मा न्याय के लिए भटक रही है । भारत देश एक मिसाल है कि जहां बेटियों को देवी तुल्य माना जाता है । बेटियों के साथ व्यभिचार न हो इसके लिए कड़े कानून बनाए जाएं । ताकि बेटी बचाओ का नारा सार्थक हो ।

प्रवीण शर्मा ने कहा कि दुख होता है जब एक गरीब परिवार न्याय के लिए कोर्ट कचहरियों में जाता है । परन्तु उसे न्याय नही मिलता । एक शिक्षक होने के नाते यह मेरा कर्तव्य है कि बुराई के खिलाफ बोलू । यह मेरा कर्तव्य है कि सामाजिक बुराइयों को खत्म करने के लिए आवाज बुलंद करूँ । इंसानियत को शर्मसार करने वाले बहशी दरिंदो के खिलाफ मेरी आवाज हमेशा बुलन्द रहेगी । हर उस गुड़िया को इंसाफ मिले जिसने अभी जीना था । मेरा सभी लोगों से निवेदन है कि पीड़ित बेटियों के हक के लिए लड़े। क्योंकि यह देवी देवताओं का देश है ।

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