स्कूल व परीक्षाएं बंद करना कोरोना रोकथाम का समाधान नहीं : भूपेंद्र

 

(सरकाघाट)रितेश चौहान

हिमाचल सरकार ने पिछले कल दसवीं और दस जमा दो कक्षा की बोर्ड की परीक्षाओं को स्थगित करने का निर्णय लिया है और 17 मई तक स्कूलों को भी बन्द कर दिया गया है।इस फैसले के के ऊपर प्रतिक्रिया देते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता व पूर्व ज़िला परिषद सदस्य भूपेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार को स्कूल चलाने के लिए प्रबन्ध करना चाहिए न कि उन्हें बन्द करने की नीति लागू करनी चाहिए क्योंकि इससे बच्चों की पढ़ाई वाधित हो रही है और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पिछला पूरे वर्ष भी स्कूल नहीं लगे और अब जब कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर चल रही है तो फ़िर से स्कूल बंद करने का फ़ैसला सरकार ने लिया है जबकि होना ये चाहिए कि सरकार को स्कूलों को सेनिटाइज करने की व्यवस्था करनी चाइये थी। लेकिन पूरे एक साल में सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है और केवल मात्र स्कूल बन्द करके और परिक्षयायें स्थगित करने की ही नीति अपनाई है जो सही नहीं है और ये सब कदम इस महामारी की रोकथाम करने में सरकार की नाकामी का ही सबूत है।भूपेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले सप्ताह तक नगर निगम के चुनावों के समय इस प्रकार की कोई रोकथाम नहीँ थी और देश के कई राज्यों में आज भी विधानसभा चुनाव हो रहे हैं जहां कोरोना रोकने के नियमों को सरकार लागू नहीं कर रही है जिससे इस संक्रमण के फैलाव में वृद्धि हुई है।लेकिन सरकार दोहरे मापदंड लगा रही है और कोई दीर्घकालीन योजना भी तैयार नहींकी गई है।

धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र में तो सरकार के वरिष्ठ मन्त्री ही इन नियमों की उलनघन्ना करते रहते हैं।भूपेंद्र सिंह ने मांग की है कि सरकार को स्कूलों में नियमित पढ़ाई चालू करने के लिए प्रबन्ध करना चाहिए और बन्द करने की नीति को रोकना होगा अन्यथा प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।उन्होंने सरकार से मांग की है कि भविष्य के लिए सरकार को टिकाऊ और दीर्घलीन योजना तैयार करनी चाहिए औऱ बन्द करने की नीति बदलनी चाहिए।स्कूल न चलने के कारण प्रदेश के सैंकड़ों निजी स्कूलों के अधयापकों को एक साल से वेतन नहीं मिल पा रहा है जो उनके व उनके परिवार के लिए आर्थिक तंगी पैदा हो गई है।इसलिये अगर स्कूल ज़्यादा समय के लिए बन्द रखने पड़ें तो सरकार को उन्हें भत्ता देना चाहिये।

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