शिमला

नई पेंशन स्कीम कर्मचारियों से धोखा : देविंद्र सिंह प्रेमी

 

स्वतंत्र हिमाचल

(रामपुर) अमन भारती

केंद्र सरकार में 1 जनवरी 2004 तथा हिमाचल सरकार में 15 मई 2003 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को एन पी एस /सी पी एस योजना के तहत लाया गया है ।जो की कर्मचारियों के साथ एक धोखा है इसमें कर्मचारी के वेतन का 10 प्रतिशत  हिस्सा काटा जाता है तथा उतना ही पैसा प्रदेश सरकार जमा करती है जो एनएसडीएल में जमा किया जाता है और ये पैसा भी शेयर मार्केट के हिसाब से घटता बढ़ता रहता है ।और कर्मियों की सेवा निवृति पर कुल जमा राशि का 60 प्रतिशत  पैसा कर्मचारियों को मिलता है और पैसा कंपनी में लगा कर के उसकी ही नाम मात्र की पेंशन मिलती है ।वर्तमान में किसी कर्मी को 1000 तो किसी को 1500 की पेंशन लग रही है वो भी मृत्यु तक स्थिर रहेगी उस पर कोई महगाई भत्ता कुछ नही मिलता ।

इतने कम राशि पर कैसे सेवा निवृत्त कर्मी अपना भी पेट नही पाल सकता परिवार का भरण पोषण तो दूर की बात है।जबकि दूसरी तरफ 15 मई 2003 से पूर्व के नियुक्त कर्मियों को सामान्य भविष्य निधि की सुविधा है वह अपनी इच्छा से इसमें पैसा जमा करता है और उस पर सरकार उचित व्याज भी देती है और कर्मी उस पैसे को जरूरत पड़ने पर निकाल भी सकता है और सेवा निवृति पर उसे पेंशन ग्रेटुइटी पेंशन कंम्यूटेशन इत्यादि सुविधा मिलती है और मृत्यु होने पर पारिवारिक पेंशन भी मिलती है ।

ऐसे में आज एनपीएस कर्मचारी हताशा में जी रहा है उसे अपने परिवार और बचों की चिंता सत्ता रही है कि किस तरह उनकी शादी इत्यादि करवानी है और रिटायरमेंट के बाद एक भिखारी की ज़िंदगी ज़ीने पर विवश होना पड़ेगा,,,इसलिए अक्तूबर 2015 में प्रदेश के सभी एनपीएस कर्मियों ने एक एनपीएस एम्प्लाइज एसोसिएशन का गठन किया है और समय समय पर प्रदेश सरकार से आग्रह करती आ रही है कि हमे भी एनपीएस से हटा कर पुरानी पेंशन दी जाए पर सरकार ने विधानसभा में कुछ विधायको द्वारा इस संदर्भ में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि सरकार का पुरानी पेंशन देने का कोई विचार नही है।मैं पूछता हूं कि 15 मई 2003 के बाद नियुक्त कर्मी क्या कमीशन से नही आये है क्या ये प्रदेश सरकार के कर्मी नही है क्या दोष है हमारा कि हम इस तिथि के बाद सरकारी सेवा में आये है।

सरकार को इस मुद्दे पर गम्भीरता से विचार करने पर अब हम सरकार को मजबूर करेंगे ।दिन रात जनता की सेवा में लीन कर्मचारी को पेंशन नही और एक विधायक और सांसद को बस शपथ लेते ही वह पेंशन का हकदार हो जाता है तब पक्ष विपक्ष ताली बजाकर अपने वेतन वृद्धि के सभी विधेयक को ध्वनिमत से पारित करती है जब कर्मियों की बारी आती है जो केवल अपने भविष्य की खातिर ही सरकारी सेवा में आया है उसके लिए कई बहाने,,, वेतन तो कम्पनी में भी सरकारी नोकरी से ज्यादा मिल जाता है।पर दुर्भाग्य है कि हम ऐसे प्रतिनिधि चुन कर भेजते है जो जनहित के मुद्दे पर कोई बात नही करते ।

मेरा प्रदेश सरकार से कहना है कि एनपीएस संघ तब तक पीछे नही हटेगा जब पुरानी पेंशन की बहाली न हो जाए।इस मुद्दे पर हर विभाग के अधिकारी और कर्मचारी एकजुट है और सरकार से मांग करते है कि अन्य कर्मियों की तर्ज पर हमें भी समान सुविधा प्रदान की जाये।
एनपीएस संघ के पूर्व जिला अध्यक्ष शिमला देविंद्र सिंह प्रेमी प्रदेश सरकार से मांग करते है कि सरकार एनपीएस प्रथा को बंद करके सभी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करे।

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